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खुशखबर: गोरखपुर में नहीं बंद होगा उद्योग, दस हजार लोगों का नहीं छिनेगा रोजगार
Wed, 22 Jan 2020 03:14 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 22 Jan 2020 03:14 PM IST
सार
- उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने आशंकाओं को किया खारिज
- यूपीडा ने मुख्यालय को भेजी रिपोर्ट
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प्रतिकात्मक तस्वीर।
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विस्तार
औद्योगिक क्षेत्र गोरखपुर (लच्छीपुर) के उद्योग बंद नहीं होंगे। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने उद्योगों की बंदी संबंधी सभी आशंकाओं को खारिज किया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस औद्योगिक क्षेत्र का कोई भी उद्योग प्रदूषणकारी नहीं है। साथ ही औद्योगिक खंडों के भू उपयोग परिवर्तन संबंधी सारी आपत्तियां भी शासन को भेज दी गईं हैं।
दरअसल, जिस ढंग से विज्ञापन निकाला गया है, उससे इस इंडस्ट्रियल एरिया के कई उद्योगों के बंद होने की आशंका बन गई थी। इसकी वजह से विभिन्न उद्योगों के संचालकों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में कम से कम 10 हजार लोगों का रोजगार छिनने की आशंका घर कर गई थी। क्योंकि उद्योगपतियों को लगा कि लैंड यूज चेंज होने के बाद यहां के कई उद्योग बंद हो जाएंगे। वर्तमान में इस इंडस्ट्रियल एरिया के पास ही इंडस्ट्रियल नथमलपुर, हैचरी जोन, कुलसुम नगर, बरगदवां एवं भगवानपुर में फैक्ट्रियां चल रही हैं।
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दरअसल, जिस ढंग से विज्ञापन निकाला गया है, उससे इस इंडस्ट्रियल एरिया के कई उद्योगों के बंद होने की आशंका बन गई थी। इसकी वजह से विभिन्न उद्योगों के संचालकों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में कम से कम 10 हजार लोगों का रोजगार छिनने की आशंका घर कर गई थी। क्योंकि उद्योगपतियों को लगा कि लैंड यूज चेंज होने के बाद यहां के कई उद्योग बंद हो जाएंगे। वर्तमान में इस इंडस्ट्रियल एरिया के पास ही इंडस्ट्रियल नथमलपुर, हैचरी जोन, कुलसुम नगर, बरगदवां एवं भगवानपुर में फैक्ट्रियां चल रही हैं।
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भू उपयोग बदलने संबंधी जो भी विज्ञापन निकाला गया गया है, उसमें लगे हुए उद्योगों को बंद करने जैसी कोई बात नहीं है। 250 मीटर की परिधि में लगा कोई भी उद्योग बंद नहीं होगा। इसके अलावा वर्तमान में यहां लगे कोई भी उद्योग प्रदूषण वाले नहीं हैं। इनको बंद करने जैसी कोई भी बात नहीं है। इसके इस संबंध में जो भी आपत्तियां आई हैं मुख्यालय को भेज दी गई हैं। आपत्तियों के संबंध में अब जो भी कार्रवाई होनी है, वह मुख्यालय स्तर से ही होगी।
केएल श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तरप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण
जीडीए की 2001 और 2021 दोनों महायोजना में यह औद्योगिक क्षेत्र
जीडीए की गोरखपुर महायोजना 2001 और 2021 दोनों में ही इस क्षेत्र को लोकेशन में ध्यान में रखते औद्योगिक क्षेत्र के रूप में आरक्षित किया गया है। वैसे गोरखपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना के पहले से ही यहां कई उद्योग पहले से चल रहे हैं। साथ ही अत्यंत प्रदूषणकारी उद्योग की श्रेणी में आने वाले खाद कारखाना के शुरू होने के मद्देनजर यहां सिर्फ उद्योग ही लगाए जा सकेंगे।
केएल श्रीवास्तव, क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तरप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण
जीडीए की 2001 और 2021 दोनों महायोजना में यह औद्योगिक क्षेत्र
जीडीए की गोरखपुर महायोजना 2001 और 2021 दोनों में ही इस क्षेत्र को लोकेशन में ध्यान में रखते औद्योगिक क्षेत्र के रूप में आरक्षित किया गया है। वैसे गोरखपुर विकास प्राधिकरण की स्थापना के पहले से ही यहां कई उद्योग पहले से चल रहे हैं। साथ ही अत्यंत प्रदूषणकारी उद्योग की श्रेणी में आने वाले खाद कारखाना के शुरू होने के मद्देनजर यहां सिर्फ उद्योग ही लगाए जा सकेंगे।
जीडीए की रिपोर्ट में यह इलाका उद्योगों के लिए बेहतर
जीडीए की रिपार्ट के अनुसार मौजा जंगल बेनीमाधव नंबर दो एवं लच्छीपुर औद्योगिक क्षेत्र अपनी लोकेशन की वजह से नए उद्योग लगाने के लिए भी बेहतर है, क्योंकि जहां औद्योगिक क्षेत्र के पश्चिम की तरफ गोरखपुर सोनौली अंतरराष्ट्रीय मार्ग है। वहीं पूरब की ओर रेलवे लाइन है, जिसमें मालगाड़ियों के द्वारा कच्चे माल की आवक व तैयार माल की रेलमार्ग से ढुलाई के लिए साइडिंग इत्यादि उपलब्ध है। प्रस्तावित भू उपयोग परिवर्तन वाले भू-भाग की पूर्वी सीमा भी रेलवे लाइन से सटी है। साथ ही पटरी के दूसरी तरफ खाद कारखाना शुरू हो रहा है। खाद कारखाना शुरू होने के बाद इस इलाके में कई सहायक फैक्ट्रियां स्थापित हो सकती हैं।
इन उद्योगों पर मंडरा रहा था कथित खतरा
अगर भू-उपयोग बदलता तो काफी फैक्ट्रियां बंद हो सकती थीं। इनमें मॉडर्न लेमिनेटर्स एंड पैकेजिंग, दीवान इंडस्ट्रीज, निशा टेक्सटाइल, गुरु नानक बेकर, पूर्वांचल इंजीनियरिंग, दुर्गा इंडस्ट्रीज, हर्ष आइसक्रीम, इंडोल्यून रिफाइनरी, एसडी केमिकल्स, दीवान कोरेगेटर, आरके गृह उद्योग, अनमोल इंडस्ट्रीज समेत कई अन्य फैक्ट्रियां शामिल हैं।
इन उद्योगों पर मंडरा रहा था कथित खतरा
अगर भू-उपयोग बदलता तो काफी फैक्ट्रियां बंद हो सकती थीं। इनमें मॉडर्न लेमिनेटर्स एंड पैकेजिंग, दीवान इंडस्ट्रीज, निशा टेक्सटाइल, गुरु नानक बेकर, पूर्वांचल इंजीनियरिंग, दुर्गा इंडस्ट्रीज, हर्ष आइसक्रीम, इंडोल्यून रिफाइनरी, एसडी केमिकल्स, दीवान कोरेगेटर, आरके गृह उद्योग, अनमोल इंडस्ट्रीज समेत कई अन्य फैक्ट्रियां शामिल हैं।
अभी भी है उद्यमियों के मन में आशंका
उत्तरप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बॉयलॉज में लैंड यूज का प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों के बीच मल्टीप्लेक्स की स्थापना यूपीसीडा के नियमानुसार वर्जित है। इस तरह के स्थानों के शुरू हो जाने के बाद यहां बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं, युवतियों की आवाजाही काफी बढ़ जाएगी। दूसरी तरफ कच्चे माल को लाने और माल निर्यात करने के लिए भारी वाहनों की आवाजाही लगातार होती रहती है। ऐसे में दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा उद्योगों का हित प्रभावित हो सकता है।
अमित बथवाल, निदेशक, मॉडर्न पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड
जीडीए की महायोजना में जिस इलाके को करीब 50 साल पहले इंडस्ट्रियल एरिया के रूप में निर्धारित किया गया था, उसे आज उत्तरप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण बदलने पर तुला हुआ है, जबकि इसी जून माह में ही जीडीए बोर्ड मौजा लच्छीपुर बरगदवा एवं जंगल बेनीमाधव नंबर दो के लैंड यूज को बदलने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर चुका है। इस इलाके को औद्योगिक से आवासीय किए जाने संबंधी विज्ञापन पर मांगी गई आपत्तियों पर सुनवाई के बाद जीडीए सचिव ने चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज को अवगत कराया है कि भू-उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है। इसके बावजूद यूपीडा लैंड यूज को परिवर्तन कर उद्योगों को बंद करने की योजना बना रहा है।
सुमित कक्कड़, प्रबंध निदेशक, दीवान कारुगेटर्स
अमित बथवाल, निदेशक, मॉडर्न पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड
जीडीए की महायोजना में जिस इलाके को करीब 50 साल पहले इंडस्ट्रियल एरिया के रूप में निर्धारित किया गया था, उसे आज उत्तरप्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण बदलने पर तुला हुआ है, जबकि इसी जून माह में ही जीडीए बोर्ड मौजा लच्छीपुर बरगदवा एवं जंगल बेनीमाधव नंबर दो के लैंड यूज को बदलने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर चुका है। इस इलाके को औद्योगिक से आवासीय किए जाने संबंधी विज्ञापन पर मांगी गई आपत्तियों पर सुनवाई के बाद जीडीए सचिव ने चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज को अवगत कराया है कि भू-उपयोग परिवर्तन के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया गया है। इसके बावजूद यूपीडा लैंड यूज को परिवर्तन कर उद्योगों को बंद करने की योजना बना रहा है।
सुमित कक्कड़, प्रबंध निदेशक, दीवान कारुगेटर्स