नेपाल में दिखा चीनी विरोधी आंदोलन का असर, बैन भारतीय चैनल हुए बहाल
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चीन से नजदीकी के चलते इन दिनों जनाक्रोश झेल रही नेपाल की ओली सरकार बैकफुट पर आ गई है। राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग को लेकर देशभर में जारी आंदोलनों के बीच नेपाल सरकार ने 32 भारतीय चैनलों पर जारी बैन हटा लिया है। भारतीय चैनलों का प्रसारण शुरू होने से दर्शकों में उत्साह है।
लोगों का मानना है कि इससे नेपाल-भारत के बीच तल्ख हुए संबंधों में फिर से प्रगाढ़ता आएगी। इस कदम से रोटी-बेटी के संबंधों को फिर से नई ऊर्जा मिलेगी। इन दिनों पूरे नेपाल में सरकार विरोधी आंदोलन जारी हैं। शिवसेना नेपाल, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पाटी, जनता पार्टी, नेपाल समाजवादी पार्टी, विश्व हिंदू महासंघ नेपाल आदि दल सरकार की चीन से बढ़ी नजदीकी को लेकर आंदोलित हैं।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की नीतियों से खफा ये दल अब राजशाही की वापसी चाह रहे हैं। इनकी एक प्रमुख मांग नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र की पहचान दिलाना भी है। करीब पखवारे भर से राष्ट्रव्यापी रूप ले चुके इस आंदोलन का असर अब नेपाल सरकार पर नजर आने लगा है।
इसी के चलते नेपाल सरकार ने कई महीने से बैन चल रहे भारतीय चैनलों से प्रतिबंध हटा लिया है। इससे भारतीय सीमा के करीब बसे नेपाली इलाकों सहित पूरे देश में मौजूद हिंदी भाषी आबादी में उत्साह है। नेपाल के बेलहिया निवासी किशन कुमार, हरिश्चंद्र जायसवाल, सग्रीव गुप्ता, पवन कुमार का मानना है कि इससे पिछले दिनों सीमा विवाद से बिगड़े रिश्तों पर जमी बर्फ साफ होगी।
नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि भारतीय चैनलों का प्रसारण शुरू होने से आपसी रिश्ते मजबूत होंगे। मधेशियों के बीच भारतीय मनोरंजक चैनल काफी लोक्रप्रिय है। प्रतिबंध हटकार सरकार ने अच्छा काम किया है।
दुष्प्रचार के लिए लिया था मीडिया का सहारा
पिछले दिनों लिपुलेख और सीमा को लेकर भारत-नेपाल के रिश्तों में खटास आई थी। ड्रैगन की करीबी ओली सरकार ने तब भारत के खिलाफ रेडियो और टेलीविजन से दुष्प्रचार शुरू किया था। इसके जरिए उसकी मंशा नेपाली जनमानस में भारत विरोधी भावनाएं भड़काने की थी। तब वहां रेडियो और टेलीविजन पर भारत विरोधी गीत खूब बजाए गए।
हालांकि, इस बीच पूरे नेपाल में खुद ही सरकार विरोधी आंदोलन शुरू हो गया है। ऐसे में अब सरकार बैकफुट पर है और वहां फिर से भारतीय चैनलों का प्रसारण शुरू हो चुका है।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष अजय वर्मा ने कहा कि नेपाल में भारतीय मनोरंजक टीवी चैनल पसंद किए जाते हैं। सभी प्रदेश में नेपाली की अपेक्षा हिंदी चैनलों की बेहतर पैठ है। मधेश में तो भारतीय चैनलों की टीआरपी पहले पायदान पर रहती है। बात चाहे फिल्म की हो या फिर धारावाहिक की, यहां भारतीय चैनल सभी की जुबां पर रहते हैं।
डिश होम मीडिया नेपाल प्रबंधक निदेशक सुदीप आचार्य ने कहा कि 108 भारतीय चैनलों पर प्रतिबंध लगा था। जिसमें से 32 भारतीय चैनल गुरुवार से फिर से पूरे नेपाल में प्रसारित हुए हैं। नेपाल में भारतीय चैनलों के प्रसारण पर लगी रोक को नेपाल सरकार ने हटा लिया है।