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यूपी के इस जिले के लिए आत्महत्या बनी चिंता, यहां लोग उठा रहे हैं आत्मघाती कदम

Sat, 13 Feb 2021 03:09 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 13 Feb 2021 03:09 PM IST
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increasing trend of suicide became a matter of concern in sant kabir nagar
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले में दो दिनों के अंदर चार लोगों ने आत्मघाती कदम उठाया। आत्मघाती कदम उठाने की वजहें जो भी रहीं हों, लेकिन समाज में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति चिंता का विषय बन गई है। इसको लेकर पुलिस भी परेशान है।

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पहली घटना खलीलाबाद में बुधवार की रात घटी। गोरखपुर जिले के कैम्पियरगंज क्षेत्र के कैम्पियरनगर छोटी कटईया निवासी 30 वर्षीय कमलेश खलीलाबाद में किराए का कमरा लेकर अकेले रहते थे। वह फल की दुकान चलाते थे। वह किसी के कर्जदार थे। जबकि दूसरा शख्स कर्ज की वसूली लिए उन्हें प्रताड़ित करता था। कर्ज की वसूली की प्रताड़ना से आजिज आकर फल विक्रेता ने छत की कुंडी में मफलर से लटक कर आत्महत्या कर ली।
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दूसरी घटना नगर पंचायत मगहर में बुधवार की देर शाम घटी। कस्बे के तेली टोला निवासी 25 वर्षीय प्रवीन कुमार ने अज्ञात कारणों से कमरे में लगे पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। बुधवार की रात में महुली क्षेत्र की एक विवाहिता ने दुपट्टे के फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली।
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चौथी घटना धनघटा क्षेत्र में बृहस्पतिवार की देर शाम घटी। शनिचरा बाजार निवासी 32 वर्षीय शिवशंकर ने कमरे में छत के कुंडे से रस्सी के सहारे लटकर आत्महत्या कर ली। एसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने बताया कि दो दिनों के भीतर आत्महत्या की चार घटनाएं सामने आई हैं। वैसे महुली क्षेत्र की महिला का पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नहीं आया है। आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक हैं।

खलीलाबाद एचआरपीजी कॉलेज के समाजशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर विजय मिश्र ने कहा कि समाज अपनी परंपरा से दूर होता जा रहा है। युवा वर्ग आधुनिकता की अंधी दौड़ में शामिल होते जा रहे हैं। उपभोक्तावादी प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। जिसके पूरा नहीं होने पर तनाव पैदा हो रहा है। आधुनिक संस्कृति आत्महत्या के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में लोगों को अपनी परेशानी एक-दूसरे से साझा करनी चाहिए और हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

खलीलाबाद एचआरपीजी कॉलेज की प्रचार्य/ विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान डॉक्टर मंजू मिश्र ने कहा कि समाज में सहनशक्ति क्षीण होती जा रही है। पहले बड़ा परिवार होता था और लोग एक-दूसरे से अपनी परेशानी बताते थे और मिल जुलकर उस परेशानी को दूर कर लेते थे। अब लोग ऐसा नहीं करते हैं। इससे सामाजिक सुरक्षा थी, लेकिन अब लोग इससे दूर भागना ही उपाय मानते हैं। लोगों में महत्वाकांक्षा बढ़ गई है और असफलता से मिलने वाली निराशा को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।

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