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गोरखपुर: शाही जामा मस्जिद के इमाम नहीं रहे, गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी
Wed, 27 Oct 2021 10:00 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 27 Oct 2021 10:00 PM IST
सार
मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी मूलरूप से रायबरेली के रहने वाले थे। उन्होंने इस्लामी शिक्षा इलाहाबाद के मदरसा वसीउत उलूम और सहारनपुर के मदरसा मजाहिरुल उलूम से हासिल की। करीब 31 वर्ष पूर्व जामा मस्जिद, उर्दू बाजार में इमाम का पद ग्रहण किया।
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मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी की शव यात्रा में उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इस्लामी जगत की मशहूर हस्तियों में शामिल शाही जामा मस्जिद, उर्दू बाजार के इमाम मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी का मंगलवार देर रात निधन हो गया। वह एक वर्ष से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बेटे हुजैफा मजाहिरी ने बताया कि वह उंचवा स्थित एक निजी अस्पताल भर्ती थे। इलाज के दौरान रात करीब सवा दो बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके इंतकाल की खबर फैलते ही मुस्लिम समाज में दुख की लहर छा गई।
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मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी मूलरूप से रायबरेली के रहने वाले थे। उन्होंने इस्लामी शिक्षा इलाहाबाद के मदरसा वसीउत उलूम और सहारनपुर के मदरसा मजाहिरुल उलूम से हासिल की। करीब 31 वर्ष पूर्व जामा मस्जिद, उर्दू बाजार में इमाम का पद ग्रहण किया।
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वह अपने पीछे एक बेटी और तीन बेटे छोड़ गए हैं। बुधवार को रात साढ़े आठ बजे जामा मस्जिद उर्दू बाजार के गेट पर उनकी नमाज ए जनाजा पढ़ाई गई। इसके बाद काफिले के रूप में उनका जनाजा नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद कब्रिस्तान में सुपुर्दे-ए-खाक किया गया।
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निधन पर शोक व्यक्त किया
इमाम अब्दुल जलील मजाहिरी के निधन पर संभ्रांत समाज ने शोक प्रकट किया है। इनमें शायर मिन्नत उल्लाह मिन्नत, समाजसेवी आदिल अमीन, समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता कीर्ति पांडेय, हिंदू मुस्लिम एकता कमेटी के संरक्षक शाकिर सलमानी, मुतवल्लियान कमेटी के अध्यक्ष सैयद इरशाद अहमद, शकील शाही सहित अन्य लोग शामिल हैं।