सीएम योगी से मुलाकात करेंगे आईएमए के पदाधिकारी, ये है बड़ी वजह
- गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में गलत जानकारी देने पर कार्रवाई का मामला
- आईएमए पदाधिकारियों ने नया मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच की मांग की
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गोरखपुर में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के बारे में गलत जानकारी देने पर कार्रवाई के मामले में आईएमए के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें प्रकरण की जानकारी देंगे। शनिवार या फिर रविवार को मुलाकात का समय मांगा गया है। उधर, कमिश्नर ने सीएमओ से फोन पर मामले की जानकारी ली है।
आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के अध्यक्ष डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव व सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि मामले की नए सिरे से जांच कराई जाए। जांच के लिए एक नए मेडिकल बोर्ड का गठन हो। इसमें मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर भी शामिल किए जाएं।
उन्होंने बताया कि मामले में कमिश्नर से मुलाकात कर जांच कराने की मांग की गई है। डीएम की ओर से की गई कार्रवाई पूरी तरह से गलत और एकतरफा है। सेंटरों को सील किया जाना ठीक नहीं है। अगर दो दिनों के अंदर सील नहीं खोले जाते, तो आईएमए कार्य बहिष्कार करेगा।
इस मौके पर मीडिया प्रभारी डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. आरपी त्रिपाठी, डॉ. डीके सिंह, डॉ. शिवशंकर शाही, डॉ. वाई सिंह, डॉ. जेपी जायसवाल, डॉ. आरपी शुक्ला, डॉ. स्मिता जायसवाल, डॉ. अरुणा छापड़िया, डॉ. मधु गुलाटी आदि मौजूद रहीं।
उपभोक्ता फोरम का है मामला, जालसाजी का केस गलत
सचिव डॉ. वीएन अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल बोर्ड नए सिरे से जांच कर डॉक्टरों को दोषी पाता है तो यह मामला उपभोक्ता फोरम में जाएगा। मामले में धारा 420 लगाना पूरी तरह से न्याय संगत नहीं है। डॉक्टरों ने मामले में कोई जालसाजी की ही नहीं है।
यह है मामला
देईपार निवासी अभिषेक पांडेय की गर्भवती पत्नी की जांच में गर्भस्थ शिशु की रिपोर्ट सामान्य आई थी। लेकिन जब बच्चा पैदा हुआ तो उसका एक हाथ नहीं है और सिर भी असामान्य है। इस मामले में चार डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कराते हुए डायग्नोस्टिक सेंटरों पर कार्रवाई की गई है। साथ ही इन सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों को डीएम के निर्देश पर सील भी कर दिया गया है।