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अमर उजाला खास: लाइन शिफ्टिंग के खेल में खुली अभियंताओं व रियल इस्टेट कारोबारियों की यारी, जांच जारी

Thu, 25 Aug 2022 01:02 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 25 Aug 2022 01:02 PM IST
सार

मुख्य अभियंता एके सिंह ने कहा कि हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करते वक्त नियमानुसार इस्टीमेट तैयार करवाया जाता है। इसमें लगने वाले खर्च को निगम में जमा करना होता है। इसके बाद लाइन शिफ्ट होती है। लेकिन, सहजनवां, गीडा और उनवल के पास लाइन शिफ्टिंग में भारी अनियमितता बरती गई। जांच की जा रही है।

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Illegally shifted line in Gida Sahjanwan and Unwal power house area
बिजली निगम। - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

बिजली निगम के अभियंताओं से यारी का रियल इस्टेट कारोबारियों को खूब फायदा हो रहा है। लाइन शिफ्टिंग मामलों की जांच रिपोर्ट यही बता रही। सहजनवां, गीडा और उनवल क्षेत्र में लाइन शिफ्टिंग के मामले इसके उदाहरण हैं। अभी हाल में ही गाजीपुर में तैनात अवर अभियंता, जिसकी वर्तमान तैनाती गोरखपुर शहरी क्षेत्र में थी, उसे भी ऐसे ही मामले में निलंबित किया जा चुका है।

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सूत्रों ने बताया कि रियल इस्टेट कारोबारी पहले हाईटेंशन लाइन के नीचे से गुजरने वाली प्लॉटिंग को प्राथमिकता देते हैं। कारण है कि हाईटेंशन लाइन के नीच जमीन होने के कारण सौदा सस्ते में हो जाता है। इसके बाद निगम के अभियंताओं से साठगांठ कर ये रियल इस्टेट कारोबारी हाईटेंशन लाइन हटवाकर, महंगी दरों पर जमीन की बिक्री शुरू कर देते हैं। जबकि, नियम है कि हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करने के लिए जिसकी जमीन होती है उसे प्रार्थना पत्र देना होता है।
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जिस जमीन से लाइन हटाकर ले जानी हो वहां से जिस जगह उसे शिफ्ट किया जाए, उस जमीन को भी उसी व्यक्ति द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से देना होगा। उस जमीन पर पहले से किसी प्रकार का कोई विवाद भी नहीं होना चाहिए। इसके बाद लाइन, बिजली के खंभे और अन्य को हटाने के पूरे खर्चे इस्टीमेट बिल जमा करना होता। इसके बाद उस लाइन को शिफ्ट किया जाता है। लेकिन, इधर के मामले जो सामने आए हैं, उनमें इन प्रक्रिया के बिना ही लाइन शिफ्टिंग कर दी गई।
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बिजली निगम के इन नियमों को भी पूरा करना जरूरी

मुख्य अभियंता एके सिंह ने बताया कि रियल इस्टेट कारोबारियों को अपनी प्लॉटिंग के वक्त नियमानुसार बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया भी पूरी करनी चाहिए। जैसे, कोई प्लॉट है और डेवलपर उसपर एक हजार स्कॉयर फीट की दस प्लॉटिंग कर रहा। ऐसे में उसे पहले बिजली निगम में प्रति प्लॉट पर 4 किलोवाट की तुलना में 10 प्लाटिंग के हिसाब से 40 किलोवाट का कनेक्शन लेना होगा। इसके बाद अपनी प्लॉटिंग साइट पर उसी क्षमता के अनुसार ट्रांसफार्मर लगवाना होगा। हाईटेंशन लाइन से प्लॉटिंग से एलटी लाइन का तार, बिजली का खंभा समेत अन्य इस्टेट का खर्च जमा करवाना होगा।

निगम के अधिशासी अभियंता के पास एक और प्रभार
बिजली निगम के अधिशासी अभियंता गीडा के पास एक और अतिरिक्त प्रभार है। हालांकि, ये प्रभार उनसे पहले वाले अधिशासी अभियंता के पास भी था। सूत्रों ने बताया कि पद का प्रभार होना कोई गलत नहीं है। लेकिन, नियमों के अनुसार पद दिया गया है, ये सवाल है। जैसे कारपोरेशन के चेयरमैन को सूचना देकर गीडा का अधिशासी अभियंता प्रभार दिया गया था? पदभार ग्रहण करने के बाद मुख्य अभियंता को इसकी जानकारी दी गई थी। इधर, गीडा में लाइन शिफ्टिंग का जांच शुरू हुई तो अतिरिक्त प्रभार वाला मामला खुलकर सामने आया।

मुख्य अभियंता एके सिंह ने कहा कि हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करते वक्त नियमानुसार इस्टीमेट तैयार करवाया जाता है। इसमें लगने वाले खर्च को निगम में जमा करना होता है। इसके बाद लाइन शिफ्ट होती है। लेकिन, सहजनवां, गीडा और उनवल के पास लाइन शिफ्टिंग में भारी अनियमितता बरती गई। जांच की जा रही है।

केस 1
गीडा में तीन स्थानों पर हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट किया गया था। कारपोरेशन के पास सूचना पहुंची कि नियमों को दरकिनार कर अभियंताओं ने रियल इस्टेट कारोबारी को फायदा पहुंचाने के लिए लाइन शिफ्ट करवा दी थी। मामले की जांच के लिए चेयरमैन ने जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित की।

केस 2
उनवल बिजली घर क्षेत्र में एचटी लाइन को अवैध तरीके से शिफ्ट किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप लगा कि सात माह पहले प्लॉट को खाली कराने के लिए अवैध तरीके से एचटी लाइन को शिफ्ट किया गया था। इसमें विभागीय नियमों की अनदेखी की गई। निगम को राजस्व की भी क्षति हुई।

 
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