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हिंदी साहित्य संस्थान के पुरस्कारों में चमके गोरखपुर के ये सितारे, यहां देखें इनकी एक झलक
Sat, 27 Feb 2021 10:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 27 Feb 2021 10:51 AM IST
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गोरखपुर के छह साहित्यकारों की मेधा को सम्मान।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने शुक्रवार को वर्ष 2019 के लिए साहित्यिक पुरस्कारों की घोषणा कर दी। गोरखपुर के छह साहित्यकारों की मेधा को भी सम्मान मिला है। पुरस्कार की सूचना मिलते ही साहित्यकारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केसी लाल को मधुलिमये साहित्य सम्मान के लिए नामित किया गया है। वहीं, भोजपुरी साहित्यकार नरसिंह बहादुर चंद की 25 वर्षों की साहित्यिक यात्रा को सम्मान मिला है। उनका नाम साहित्य भूषण सम्मान की सूची में शामिल है। 2019 में प्रकाशित पुस्तकों के लिए अनीता अग्रवाल, श्रीधर मिश्र, नित्यानंद श्रीवास्तव और डॉ. फूलचंद गुप्त को चुना गया है। अनीता अग्रवाल की पुस्तक स्मृतियों का वातायन को श्रीधर पाठक पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
श्रीधर मिश्र को उनके कविता संग्रह छूट गया हूं मैं के लिए विजयदेव नारायण शाही पुरस्कार से नवाजा जाएगा। दिग्विजयनाथ पीजी कालेज के शिक्षक डॉ. नित्यानंद श्रीवास्तव की पुस्तक भक्ति : भय और भूख की अंतर्यात्रा के लिए राम विलास शर्मा पुरस्कार, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के शिक्षक फूलचंद गुप्त की पुस्तक महायोगी गोरखनाथ को विष्णु प्रभाकर पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। सम्मान और पुरस्कार के लिए नामित होने वाले साहित्यकारों ने अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं व्यक्त की।
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मधुलिमये साहित्य सम्मान पाने वाले प्रो. केसी लाल ने कहा कि पुरस्कार एक तरह से संदेश है कि साहित्य पर काम हो रहा है। वैसे भी जब लिखने-पढ़ने को सम्मान मिलता है तो प्रसन्नता होती है। हिंदी साहित्य संस्थान ने मेरी साहित्यिक सेवाओं का सम्मान किया है, इसके लिए मैं निर्णायक मंडल को हृदय से धन्यवाद देता हूं। मैं मानता हूं कि सम्मान को केवल सम्मान की दृष्टि नहीं देखा जाए, यह साहित्य सेवा की सामाजिक स्वीकृति भी है।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केसी लाल को मधुलिमये साहित्य सम्मान के लिए नामित किया गया है। वहीं, भोजपुरी साहित्यकार नरसिंह बहादुर चंद की 25 वर्षों की साहित्यिक यात्रा को सम्मान मिला है। उनका नाम साहित्य भूषण सम्मान की सूची में शामिल है। 2019 में प्रकाशित पुस्तकों के लिए अनीता अग्रवाल, श्रीधर मिश्र, नित्यानंद श्रीवास्तव और डॉ. फूलचंद गुप्त को चुना गया है। अनीता अग्रवाल की पुस्तक स्मृतियों का वातायन को श्रीधर पाठक पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
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श्रीधर मिश्र को उनके कविता संग्रह छूट गया हूं मैं के लिए विजयदेव नारायण शाही पुरस्कार से नवाजा जाएगा। दिग्विजयनाथ पीजी कालेज के शिक्षक डॉ. नित्यानंद श्रीवास्तव की पुस्तक भक्ति : भय और भूख की अंतर्यात्रा के लिए राम विलास शर्मा पुरस्कार, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के शिक्षक फूलचंद गुप्त की पुस्तक महायोगी गोरखनाथ को विष्णु प्रभाकर पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। सम्मान और पुरस्कार के लिए नामित होने वाले साहित्यकारों ने अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं व्यक्त की।
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मधुलिमये साहित्य सम्मान पाने वाले प्रो. केसी लाल ने कहा कि पुरस्कार एक तरह से संदेश है कि साहित्य पर काम हो रहा है। वैसे भी जब लिखने-पढ़ने को सम्मान मिलता है तो प्रसन्नता होती है। हिंदी साहित्य संस्थान ने मेरी साहित्यिक सेवाओं का सम्मान किया है, इसके लिए मैं निर्णायक मंडल को हृदय से धन्यवाद देता हूं। मैं मानता हूं कि सम्मान को केवल सम्मान की दृष्टि नहीं देखा जाए, यह साहित्य सेवा की सामाजिक स्वीकृति भी है।
साहित्य भूषण सम्मान पाने वाले नरसिंह बहादुर चंद ने कहा कि मेरी 25 वर्षों की साहित्य सृजन यात्रा को सम्मान मिला है। साहित्य भूषण सम्मान के लिए नामित होने पर प्रसन्नता हुई। पुरस्कार से मेरा हौसला बढ़ा है। अब और बेहतर करने की कोशिश करूंगा। साहित्य संगम संस्था के माध्यम से नए रचनाकारों को प्रशिक्षित करूंगा। साहित्य सृजन यात्रा में पहली पुस्तक कब तक मौन रहूंगा थी और अंतिम पुस्तक सरयू के स्वर है। इसमें सरयू तट से जुड़े कई जिलों के 156 कवियों की कृतियां संपादित करके जगह दी गई है। गजल संग्रह दर्द की दीवार, कविता संग्रह वीर भोग्या वसुंधरा और भोजपुरी साहित्य हरसिंगार को महत्वपूर्ण कृति मानता हूं।
श्रीधर पाठक पुरस्कार पाने वाली अनीता अग्रवाल ने कहा कि पुरस्कार से दायित्वबोध बढ़ गया है। इस वर्ष स्मृतियों का वातायन पुस्तक को पुरस्कार के लिए नामित किया गया है, जबकि बीते वर्ष मेरी पुस्तक बारहमासा चयनित हुई थी। खुशी है कि मेरे सृजन, साहित्य की दुनिया में छाप छोड़ने में सफल हैं।
राम विलास शर्मा पुरस्कार पाने वाले डॉ. नित्यानंद श्रीवास्तव ने बताया कि राम विलास शर्मा पुरस्कार के लिए मेरी पुस्तक भक्ति, भय और भूख की अंतर्यात्रा का नामित होना गर्व की बात है। यह पुरस्कार भविष्य में और अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करेेगा। मेेरी यह दूसरी कृति थी। पहली पुस्तक जातीयता की चेतना साहित्य भाषिक विमर्श थी। पुरस्कार चयन के लिए निर्णायक मंडल को धन्यवाद देता हूं।
विजयदेव नारायण शाही पुरस्कार पाने वाले श्रीधर मिश्र ने कहा कि पुरस्कार लेखनी की स्वीकार्यता होती है। हम जो कुछ लिख रहे हैं उसे जब स्वीकार किया जाता है तो निश्चित रूप से प्रसन्नता होती है और हौसला भी बढ़ता है। मैं पुरस्कार को एक प्रोत्साहन के रूप में देखता हूं। विजय देव नारायण शाही के नाम का पुरस्कार मिलने से आह्लादित हूं। इससे नए सृजन की प्रेरणा मिलेगी।
विष्णु प्रभाकर पुरस्कार पाने वाले डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि मेरी पुस्तक महायोगी गोरखनाथ को पाठकों ने काफी सराहा है। ऐसे में इस पुस्तक को हिंदी संस्थान का पुरस्कार मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। इससे मेरी साहित्यिक यात्रा को संबल मिलेगा। यह गोरखपुर के साहित्यकारों और गुरु गोरक्षनाथ का सम्मान है। 2016 में मेरी कृति बटोहिया के सौवें को भिखारी ठाकुर सर्जना सम्मान मिल चुका है। अब तक मेरी 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
श्रीधर पाठक पुरस्कार पाने वाली अनीता अग्रवाल ने कहा कि पुरस्कार से दायित्वबोध बढ़ गया है। इस वर्ष स्मृतियों का वातायन पुस्तक को पुरस्कार के लिए नामित किया गया है, जबकि बीते वर्ष मेरी पुस्तक बारहमासा चयनित हुई थी। खुशी है कि मेरे सृजन, साहित्य की दुनिया में छाप छोड़ने में सफल हैं।
राम विलास शर्मा पुरस्कार पाने वाले डॉ. नित्यानंद श्रीवास्तव ने बताया कि राम विलास शर्मा पुरस्कार के लिए मेरी पुस्तक भक्ति, भय और भूख की अंतर्यात्रा का नामित होना गर्व की बात है। यह पुरस्कार भविष्य में और अच्छा लिखने के लिए प्रेरित करेेगा। मेेरी यह दूसरी कृति थी। पहली पुस्तक जातीयता की चेतना साहित्य भाषिक विमर्श थी। पुरस्कार चयन के लिए निर्णायक मंडल को धन्यवाद देता हूं।
विजयदेव नारायण शाही पुरस्कार पाने वाले श्रीधर मिश्र ने कहा कि पुरस्कार लेखनी की स्वीकार्यता होती है। हम जो कुछ लिख रहे हैं उसे जब स्वीकार किया जाता है तो निश्चित रूप से प्रसन्नता होती है और हौसला भी बढ़ता है। मैं पुरस्कार को एक प्रोत्साहन के रूप में देखता हूं। विजय देव नारायण शाही के नाम का पुरस्कार मिलने से आह्लादित हूं। इससे नए सृजन की प्रेरणा मिलेगी।
विष्णु प्रभाकर पुरस्कार पाने वाले डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि मेरी पुस्तक महायोगी गोरखनाथ को पाठकों ने काफी सराहा है। ऐसे में इस पुस्तक को हिंदी संस्थान का पुरस्कार मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। इससे मेरी साहित्यिक यात्रा को संबल मिलेगा। यह गोरखपुर के साहित्यकारों और गुरु गोरक्षनाथ का सम्मान है। 2016 में मेरी कृति बटोहिया के सौवें को भिखारी ठाकुर सर्जना सम्मान मिल चुका है। अब तक मेरी 13 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।