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UP: मां की डांट से नाराज छात्र ने छोड़ा घर, साथ ले गया सोना के बिस्कुट; 635 किमी दूर यहां में मिली लोकेशन

Thu, 25 Dec 2025 03:27 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 25 Dec 2025 03:27 PM IST
सार

गोरखपुर में हाईस्कूल के छात्र ने मां की डांट से नाराज होकर घर छोड़ दिया। वह घर से सोना के बिस्कुट साथ ले गया। छात्र के पिता दुबई में रहते हैं। मां ने गुमशुदगी दर्ज कराई है।

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high school student left home after being scolded by his mother taking gold with him In Gorakhpur
युवक। (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : freepik

विस्तार

गोरखपुर एम्स थाना क्षेत्र में मां की डांट से नाराज होकर हाईस्कूल का छात्र घर से भाग गया। जाते समय वह घर की अलमारी में रखे 10-10 ग्राम के दो सोने के बिस्किट भी साथ ले गया। महिला ने एम्स थाने में तहरीर देकर बेटे के लापता होने की सूचना दी है। 
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पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर किशोर की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस की छानबीन में उसकी लोकेशन सिलीगुड़ी में मिली है। एम्स थाना क्षेत्र के झरना टोला न्यू टीचर कॉलोनी निवासी महिला ने तहरीर देकर बताया कि उनके पति दुबई में एक निजी कंपनी में काम करते हैं। 
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उनके दो बेटे हैं, जिनमें छोटा बेटा 16 वर्ष का है और वह एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में हाईस्कूल का छात्र है। मां के अनुसार, बेटा अक्सर शरारत करता रहता है, जिस कारण वह उसे डांटती रहती हैं। 21 दिसंबर को बेटा काफी देर से स्कूल से घर लौटा। 
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पूछने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया, जिससे नाराज होकर मां ने उसे डांटा। उसी दिन शाम करीब पांच बजे वह बिना बताए घर से चला गया और अलमारी से दो सोने के बिस्किट लेकर गया। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। 

रिश्तेदारों, दोस्तों, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर खोजबीन की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। घबराकर महिला ने सोमवार को बड़े बेटे के साथ एम्स थाने पहुंचकर सूचना दी। पुलिस के अनुसार, किशोर की लोकेशन सिलीगुड़ी में मिल रही है। थाना प्रभारी संजय मिश्रा ने बताया कि पुलिस टीम किशोर को जल्द ही उसे सुरक्षित खोजकर परिजनों को सौंपेगी।

बालमन को रास नहीं आ रहा टोकना...नादानी में छोड़ रहे घर का आंगन
बदलते दौर में किशोरों का मन पहले से अधिक संवेदनशील और अस्थिर होता जा रहा है। माता-पिता के टोकने पर उनकी भावनाएं आहत हो जा रही हैं। छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर घर छोड़ने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हाल के दिनों में शहर में ऐसे कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां माता-पिता की डांट या रोक-टोक बच्चों को इतनी अखर गई कि वे घर का आंगन ही छोड़ बैठे।
 

विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया और आभासी दुनिया (वर्चुअल वर्ल्ड) ने किशोरों की सोच पर गहरा प्रभाव डाला है। तुलना, प्रतिस्पर्धा और ‘परफेक्ट लाइफ’ की चाह में बच्चे मानसिक दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में जब घर में टोका-टाकी या डांट पड़ती है, तो वे इसे अस्वीकार कर भावनात्मक प्रतिक्रिया दे बैठते हैं।
 

पिछले कुछ महीनों में पुलिस के पास ऐसे कई मामले पहुंचे हैं, जहां किशोर मामूली झगड़े के बाद घर से निकल गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभिभावक छोटी बातों को भी गंभीरता से लें और बच्चों के व्यवहार में आए बदलावों को नजरअंदाज न करें।

केस एक
मां की डांट से डरकर भाग गया था किशोर
जून 2025 में खजनी थाना क्षेत्र के विश्वनाथपुर गांव में 12 वर्षीय किशोर मां की डांट से नाराज होकर घर से चुपके से गायब हो गया था। पुलिस और परिजनों ने 12 घंटे के भीतर किशोर को गांव के पास ही सुरक्षित ढूंढ लिया था। उसने बताया था कि मां की डांट से डरकर मैं घर से भाग गया था।

केस दो
मां की डांट से आहत किशोरी ने फंदे से लटक कर दी थी जान

जुलाई 2024 में गीडा थाना क्षेत्र के गीडा सेक्टर 22 में मां की डांट से नाराज किशोरी ने फंदे से लटक कर जान दे दी थी। वह मां के साथ ही रहती थी। दोपहर में मां ने किसी बात को लेकर डांट दिया, जिसपर नाराज होकर वह कमरे में सोने चली गई। कुछ देर बाद मां जब कमरे पर पहुंची तो फाटक अंदर से बंद था।

बोले विशेषज्ञ...
आधुनिक जीवनशैली, शिक्षा प्रणाली का बढ़ता दबाव, पारिवारिक तनाव और सोशल मीडिया की चमक ने बच्चों के बाल मन को गहराई से प्रभावित किया है। निरंतर तुलना, प्रतिस्पर्धा एवं परिवार की ऊंची अपेक्षाएं बच्चों को भावनात्मक रूप से अस्थिर बना रही हैं। संवाद की कमी और समय का अभाव उन्हें अकेलापन महसूस कराता है, जिससे उनके व्यवहार में आक्रामकता, चिड़चिड़ापन और सहनशीलता की कमी देखने को मिल रही है। बच्चे अब पहले की तरह मिलजुल कर खेलने या बातें साझा करने से परहेज कर रहे हैं, जिससे सामूहिकता और संवेदनशीलता में कमी आई है। - डॉ. मनीष कुमार पांडेय, समाजशास्त्र विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय
 

पहले बच्चों की परवरिश में संयुक्त परिवार का सहारा और सामाजिक जुड़ाव था, जिससे उनमें धैर्य और भावनात्मक संतुलन विकसित होता था। आज के बच्चों को हर चीज तुरंत मिल जाती है, जिससे उनमें सहनशीलता कम हो गई है। माता-पिता भी व्यस्तता में उन्हें सबकुछ उपलब्ध कराकर निश्चिंत हो जाते हैं। ऐसे में जब उन्हें डांट या रोक-टोक मिलती है, तो वे भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं। मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल ने उनकी वास्तविक दुनिया से दूरी बढ़ा दी है, यही कारण है कि छोटी-छोटी बातों पर वे तनावग्रस्त या आवेगपूर्ण कदम उठा रहे हैं।
- डॉ. आकृति पांडेय, मनोवैज्ञानिक
 
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