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Gorakhpur News: तेज बुखार के साथ झटका आना इंसेफेलाइटिस के लक्षण, प्रशिक्षित किए जा रहे चिकित्सक

Fri, 23 Dec 2022 02:00 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 23 Dec 2022 02:00 PM IST
सार

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का प्राथमिक उपचार सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर उपलब्ध है। इंसेफेलाइटिस को लेकर जिले के सभी चिकित्सा अधिकारियों को हर वर्ष प्रशिक्षित भी किया जाता है।

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High fever accompanied by shock symptoms of encephalitis
इंसेफेलाइटिस। (फाइल) - फोटो : PTI

विस्तार

तेज बुखार के साथ बच्चों को झटका आना इंसेफेलाइटिस के लक्षण हैं। एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास लगातार जारी है। इसे लेकर इंसेफेलाइटिस प्रबंधन और उपचार के संबंध में जिले के सभी चिकित्साधिकारियों को प्रशिक्षित करने की शुरुआत बृहस्पतिवार से की गई है। यह प्रशिक्षण 24 दिसंबर तक चलेगा।
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सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार ने बताया कि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का प्राथमिक उपचार सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर उपलब्ध है। इंसेफेलाइटिस को लेकर जिले के सभी चिकित्सा अधिकारियों को हर वर्ष प्रशिक्षित भी किया जाता है।
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इसी क्रम में आठ अलग-अलग बैच में अधीक्षक, प्रभारी चिकित्साधिकारी और चिकित्साधिकारी इस वर्ष भी प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। एडी हेल्थ डॉ. आईबी विश्वकर्मा की मौजूदगी में प्रथम दो बैच का प्रशिक्षण बुधवार को पूरा हुआ।
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सभी को बताया गया है कि अगर तेज बुखार के साथ झटके भी आ रहे हैं और मरीज मानसिक तौर पर भी शिथिल हो रहा है तो यह इंसेफेलाइटिस का मामला हो सकता है। ऐसे मरीजों को 108 या 102 एंबुलेंस से ही नजदीकी सीएचसी या पीएचसी ले जाना है।

गंभीर स्थिति होने पर इंसेफेलाइटिस ट्रिटमेंट सेंटर (ईटीसी) में भर्ती कर मरीज के खून की सीरम जांच के लिए जिला स्तर पर स्थापित सेंटीनल लैब भेजे जाएंगे। अगर मरीज की स्थिति ज्यादा खराब होगी तो उसे जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा।


एईएस के 36 फीसदी मामले स्क्रबटाइफस से जुड़े
सीएमओ ने बताया कि एईएस के 36 फीसदी से ज्यादा मामले स्क्रबटाइफस से जुड़े हैं। इनकी दवाएं सभी अस्पतालों में उपलब्ध हैं। अगर सीएचसी, पीएचसी पर समय से मरीज पहुंच जाए तो ठीक होकर घर जा सकते हैं। प्रशिक्षण में डॉ. एके चौधरी, डॉ. सिद्धेश्वरी सिंह, डॉ. हरिओम पांडेय, डॉ. सुशील, डॉ. एके पांडेय, डॉ. अमरेश सिंह, एसीएमओ डॉ. नंद कुमार आदि मौजूद रहे।
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