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Gorakhpur News: जालसाजी के लिए बिछाए जाल में केंद्र सरकार से भी मांगी थी मदद
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ग्रामीणों के उत्थान के लिए कामकाज का रुद्रांश ने दिलाया था भरोसा
सरकारी सहयोग को भेजा था पत्र, एक्सिस बैंक में खुलवाया गया था खाता
एक साथ सौ से अधिक जगहों पर कार्यालय खोलने की थी तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। फर्जी दस्तावेज पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.45 करोड़ की जालसाजी करने के मास्टरमाइंड रुद्रांश पांडेय ने करोड़ों की जालसाजी के लिए बिछाए गए जाल के लिए केंद्र सरकार से भी मदद मांगी थी। उसने ग्रामीण फाइनेंस कंपनी का पंजीकरण कराया था और उसे ग्रामीणों के उत्थान के लिए काम करने वाली संस्था बताते हुए फंड मांगा था। इसके लिए पत्र भेजने के साथ ही उसने कंपनी का ग्रामीणों के लिए किए जाने वाले कामों की रूपरेखा भी भेजी थी। इतना ही नहीं उसने एक्सिस बैंक में संस्था का खाता भी खुलवा लिया था। खबर है कि उसकी एक साथ देश के 100 जगहों पर कार्यालय खोलने की तैयारी थी, ताकि एक साथ बड़ी जालसाजी कर सके।
जानकारी के मुताबिक, उसने इस कंपनी में भी अपने चालक रियाज का नाम शामिल किया था। उसे कंपनी का कर्मचारी दिखाया था। हालांकि, रियाज नाम के चालक की भूमिका अभी साफ नहीं हो पाई है कि वह इस गिरोह का शातिर था। अभी तक पता चला है कि वह सिर्फ नौ हजार रुपये महीने की नौकरी करने के चक्कर में फंसा है। पुलिस उसके खाते का डिटेल खंगाल रही है, ताकि इसकी पुष्टि हो सके।
रिमांड पर आने के दौरान रुद्रांश ने तीन बैंक कर्मचारियों का भी नाम बताया था, जिसकी मदद से उसने जालसाजी की थी। पुलिस उन सभी की भूमिका की जांच कर रही है, जिसके टेबल से होकर चार करोड़ से अधिक रुपये के ऋण की फाइल गुजरी थी। पुलिस उस असल गुनहगार तक पहुंचना चाहती है, जिसने बिना किसी सत्यापन के ही रुद्रांश पांडेय की फर्जी कंपनी को ऋण दे दिया है। इसके साथ ही दोबारा उसकी फर्जी कंपनी कैसे पंजीकृत हो गई और एक बैंक से जालसाजी के बाद उसने खाता कैसे खुलवा लिया, इसकी भी जांच तेज कर दी गई है।
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यह हुआ था
बस्ती के मुरलीजोत में रहने वाला रुद्रांश पांडेय अपनी मां अर्चना व पिता राजेश के साथ शाहपुर के राप्तीनगर, ग्रीन वैली में मकान बनवाकर रहता है। मई 2022 को अर्चना व उनके पति राजेश ने आईसीआईसीआई बैंक की मेडिकल काॅलेज रोड शाखा में होम लोन के लिए आवेदन किया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ ही दूसरे की भूमि को अपना बताकर 31 मई 2022 को दो करोड़ रुपये लोन पास करा लिया। अगस्त 2022 में बालाजीपुरम राप्तीनगर में रहने वाले रियाज नाम के व्यक्ति ने होम लोन के लिए आवेदन किया। खुद को भारतीय खाद्य निगम का ठेकेदार बताते हुए रियाज इंटरप्राइजेज के नाम से दस्तावेज प्रस्तुत किया। लोन पास कराने की पैरवी रुद्रांश कर रहा था। अगस्त में रियाज का भी 2.45 करोड़ रुपये होम लोन पास हो गया। तीन माह के बाद किस्त जमा न होने पर बैंक के अधिकारियों ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि फर्जी दस्तावेज पर रुद्रांश ने अपनी मां अर्चना व रियाज के नाम पर लोन कराया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेजा।
कोट
पुलिस को रुद्रांश के पास से कई दस्तावेज मिले हैं। जिसमें फर्जी फर्म पंजीकरण के अलावा सरकार से मदद को भेजा गया पत्र भी शामिल है। पुलिस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी सिटी
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सरकारी सहयोग को भेजा था पत्र, एक्सिस बैंक में खुलवाया गया था खाता
एक साथ सौ से अधिक जगहों पर कार्यालय खोलने की थी तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। फर्जी दस्तावेज पर आईसीआईसीआई बैंक से 4.45 करोड़ की जालसाजी करने के मास्टरमाइंड रुद्रांश पांडेय ने करोड़ों की जालसाजी के लिए बिछाए गए जाल के लिए केंद्र सरकार से भी मदद मांगी थी। उसने ग्रामीण फाइनेंस कंपनी का पंजीकरण कराया था और उसे ग्रामीणों के उत्थान के लिए काम करने वाली संस्था बताते हुए फंड मांगा था। इसके लिए पत्र भेजने के साथ ही उसने कंपनी का ग्रामीणों के लिए किए जाने वाले कामों की रूपरेखा भी भेजी थी। इतना ही नहीं उसने एक्सिस बैंक में संस्था का खाता भी खुलवा लिया था। खबर है कि उसकी एक साथ देश के 100 जगहों पर कार्यालय खोलने की तैयारी थी, ताकि एक साथ बड़ी जालसाजी कर सके।
जानकारी के मुताबिक, उसने इस कंपनी में भी अपने चालक रियाज का नाम शामिल किया था। उसे कंपनी का कर्मचारी दिखाया था। हालांकि, रियाज नाम के चालक की भूमिका अभी साफ नहीं हो पाई है कि वह इस गिरोह का शातिर था। अभी तक पता चला है कि वह सिर्फ नौ हजार रुपये महीने की नौकरी करने के चक्कर में फंसा है। पुलिस उसके खाते का डिटेल खंगाल रही है, ताकि इसकी पुष्टि हो सके।
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रिमांड पर आने के दौरान रुद्रांश ने तीन बैंक कर्मचारियों का भी नाम बताया था, जिसकी मदद से उसने जालसाजी की थी। पुलिस उन सभी की भूमिका की जांच कर रही है, जिसके टेबल से होकर चार करोड़ से अधिक रुपये के ऋण की फाइल गुजरी थी। पुलिस उस असल गुनहगार तक पहुंचना चाहती है, जिसने बिना किसी सत्यापन के ही रुद्रांश पांडेय की फर्जी कंपनी को ऋण दे दिया है। इसके साथ ही दोबारा उसकी फर्जी कंपनी कैसे पंजीकृत हो गई और एक बैंक से जालसाजी के बाद उसने खाता कैसे खुलवा लिया, इसकी भी जांच तेज कर दी गई है।
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यह हुआ था
बस्ती के मुरलीजोत में रहने वाला रुद्रांश पांडेय अपनी मां अर्चना व पिता राजेश के साथ शाहपुर के राप्तीनगर, ग्रीन वैली में मकान बनवाकर रहता है। मई 2022 को अर्चना व उनके पति राजेश ने आईसीआईसीआई बैंक की मेडिकल काॅलेज रोड शाखा में होम लोन के लिए आवेदन किया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के साथ ही दूसरे की भूमि को अपना बताकर 31 मई 2022 को दो करोड़ रुपये लोन पास करा लिया। अगस्त 2022 में बालाजीपुरम राप्तीनगर में रहने वाले रियाज नाम के व्यक्ति ने होम लोन के लिए आवेदन किया। खुद को भारतीय खाद्य निगम का ठेकेदार बताते हुए रियाज इंटरप्राइजेज के नाम से दस्तावेज प्रस्तुत किया। लोन पास कराने की पैरवी रुद्रांश कर रहा था। अगस्त में रियाज का भी 2.45 करोड़ रुपये होम लोन पास हो गया। तीन माह के बाद किस्त जमा न होने पर बैंक के अधिकारियों ने खोजबीन शुरू की तो पता चला कि फर्जी दस्तावेज पर रुद्रांश ने अपनी मां अर्चना व रियाज के नाम पर लोन कराया है। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेजा।
कोट
पुलिस को रुद्रांश के पास से कई दस्तावेज मिले हैं। जिसमें फर्जी फर्म पंजीकरण के अलावा सरकार से मदद को भेजा गया पत्र भी शामिल है। पुलिस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी सिटी