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गोरखपुर में दम तोड़ रही आयुष्मान योजना, लाखों लोगों का नहीं बन सका गोल्डन कार्ड

Wed, 26 Feb 2020 01:13 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर
नीरज मिश्र, अमर उजाला, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Wed, 26 Feb 2020 01:13 PM IST
सार

  • 11 लाख से ज्यादा लोगों के नहीं बन सके हैं गोल्डन कार्ड
  • जिला अस्पताल में भी गोल्डन कार्ड बनवाने की गति बेहद धीमी

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Health department negligence on Ayushman Bharat scheme in gorakhpur
आयुष्मान भारत (file)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना पर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का ‘ग्रहण’ लग गया है। लापरवाही इस कदर है कि गोरखपुर जिले में करीब 11 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड ही अब तक नहीं बन पाए हैं। जिला अस्पताल में गोल्डन कार्ड बनवाने की व्यवस्था है, फिर भी नेटवर्क सहित अन्य समस्याओं का हवाला देकर कार्ड नहीं बनाया जा रहा।
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आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का निशुल्क उपचार मिलता है। 2011 की जनगणना के मुताबिक जिले में तीन लाख छह हजार छह सौ अट्ठावन लाख परिवारों (करीब 15 लाख लोग) का इस योजना में चयन हुआ। इनमें से 1.40 लाख 269 परिवारों (करीब 3.84 लाख लोग) के गोल्डन कार्ड बन पाए हैं। योजना शुरू हुए करीब दो वर्ष हो गए, फिर भी अभी तक जिले में 11.16 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं।
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सबसे ज्यादा दिक्कत जनगणना सूची से नाम तलाशने में आ रही है। 2011 की जनगणना सूची पुराने वार्ड के हिसाब से बनी है। अब वार्डों की संख्या बदल गई है। ऐसे में नाम ढूंढकर निकालना चुनौतीपूर्ण है।
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जिला अस्पताल में एक दिन में बन रहे महज 8-10 कार्ड

जिला अस्पताल की बात करें तो किसी दिन आठ तो किसी दिन 10 गोल्डन कार्ड ही बन पा रहे हैं। मंगलवार को जंगल कौड़िया से गोल्डन कार्ड बनवाने आए रामकुमार ने बताया कि विभाग की ओर से प्रपत्र भेजा गया था। इसमें केवल मुखिया का नाम है। परिवार के चार लोगों के गोल्डन कार्ड अब तक नहीं बन सके हैं। सीएचसी पर कार्ड बन नहीं पा रहा है। मजबूरन जिला अस्पताल आना पड़ा है।

एक लाख लाभार्थी ‘लापता’
आयुष्मान योजना में शामिल एक लाख लोग ऐसे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं ढूंढ पा रही है। आशा बहुओं और एएनएम सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को खोजबीन में लगाया भी गया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी। ये सभी विभाग की उस 11.16 लाख लोगों की सूची में हैं, जिनके कार्ड नहीं बन सके हैं। 

सीएचसी और पीएचसी पर नहीं बन पा रहे कार्ड

जिले में 79 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन केंद्रों पर गोल्डन कार्ड न बनाने से लाभार्थियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जिला अस्पताल आ रहे हैं। उधर, प्रभारी सीएमओ डॉ आईबी सिंह का कहना है कि सीएचसी और पीएचसी में गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।

1500 कॉमन सर्विस सेंटर, फिर भी नहीं बन पा रहे कार्ड
जिले में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए 1500 कॉमन सर्विस सेंटर खोले गए हैं। इन सेंटरों पर 30 रुपये लेकर गोल्डन कार्ड बनवाने की व्यवस्था है। इसके बावजूद गोल्डन कार्ड बनवाने की रफ्तार इतनी सुस्त क्यों हैं, जिम्मेदारों के पास इसका कोई जवाब नहीं है।

फैक्ट फाइल

306658 आयुष्मान योजना के लाभार्थी (परिवार)
61 प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा
23 सरकारी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था
दो सालों में 16212 लोगों को मिल सका है लाभ

गोल्डन कार्ड लगातार बनवाए जा रहे हैं। जल्द ही अभियान चलाकर और कार्ड बनाए जाएंगे। जिले में 1500 कॉमन सर्विस सेंटर को कार्ड बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। हर लाभार्थी तक योजना का लाभ पहुंचाने की कोशिश है।
- डॉ. एनके पांडेय, नोडल प्रभारी आयुष्मान योजना  

आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड हर सीएचसी और पीएचसी पर भी बनाए जा रहे हैं। आरोग्य मेले में विशेष अभियान चलाकर गोल्डन कार्ड बनाया जा रहा है। अक्सर आधार कार्ड में नाम गलत होने की समस्या आ रही है। इसकी वजह से थोड़ी देरी हो रही है। जल्द ही सभी लोगों के कार्ड बना दिए जाएंगे।
- डॉ आईबी सिंह, प्रभारी सीएमओ
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