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रिश्वत देकर सरकारी नौकरी पाने की लालच पड़ी भारी, दो ने गंवाए साढ़े आठ लाख रुपये

Wed, 16 Sep 2020 12:24 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 16 Sep 2020 12:24 PM IST
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government job fraud by miscriants
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala

गोरखपुर जिले में रिश्वत देकर सरकारी नौकरी हासिल करने के चक्कर में दो और युवकों ने रुपये गंवाए हैं। हालांकि इन दोनों ने थाने पर आकर मौखिक सूचना ही दी है, तहरीर नहीं। इसके पहले 13 सितंबर को एक युवक और एक युवती ने थाने में आकर तहरीर देकर 17 लाख रुपये की जालसाजी की जानकारी दी थी। इस मामले में पुलिस ने अबतक केस नहीं दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि आरोपित युवक इसके पहले कानपुर में जालसाजी के मामले में जेल भी जा चुका है। पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

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जानकारी के मुताबिक, पीपीगंज कस्बा निवासी दो युवक मंगलवार को थाने पहुंचे। पीड़ित युवकों ने थानेदार को बताया कि एक शख्स ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे साढ़े आठ लाख रुपये लिए थे। फर्जी नियुक्ति प्रमाण पत्र भी दिया था। जब नौकरी ज्वॉइन करने गए तो पता चला कि उनके साथ जालसाजी हुई है। इसके बाद रुपये वापस पाने के लिए दबाव बनाने लगे जिसके बाद आरोपी फरार हो गया। इससे पहले 13 सितंबर को तिघरा निवासी मोनू सिंह और बसंतपुर कॉलोनी निवासी साबिना ने तहरीर देकर फर्जी नियुक्ति के नाम पर रुपये लेने की शिकायत की थी।
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आरोपी के भाई से पूछताछ कर पुलिस ने छोड़ा
पुलिस ने आरोपी के भाई को इस मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था जिसे फिर छोड़ दिया गया। उसने ही पुलिस को यह जानकारी दी है कि उसका भाई इसके पहले कानपुर से जालसाजी के मामले में ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है।

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केस दर्ज करने को अफसर के आदेश का इंतजार

मोनू सिंह और साबिना से जालसाजी के मामले में पुलिस को तहरीर देने के बाद भी केस नहीं दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामला जालसाजी का होने की वजह से इसमें किसी अफसर का आदेश होगा तभी केस दर्ज किया जाएगा। हालांकि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का रवैया कहीं न कहीं से आरोपित को फायदा पहुंचा रहा है।

पीपीगंज थानाध्यक्ष राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि कथित जालसाज युवक कानपुर में जालसाजी के मामले में जेल गया था। इस मामले की जांच की जा रही है। जालसाजी के मामले में केस दर्ज करने के लिए अफसर का आदेश होना जरूरी होता है।

यह कहता है कानून
दीवानी कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर शरण त्रिपाठी ने बताया कि कानून के हिसाब से पुलिस को तहरीर के आधार पर तत्काल सीआरपीसी की धारा 154 के तहत केस दर्ज करना चाहिए। इसमें किसी अफसर के आदेश की जरूरत नहीं होती है। कानून में प्रावधान है कि पीड़ित की तहरीर पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए और फिर उसकी जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।

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