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यूपी के इस शहर में सैकड़ों भवनों पर मंडरा रहा खतरा, जान जोखिम में डालकर रहते हैं लोग
Thu, 07 Jan 2021 03:48 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 Jan 2021 03:48 PM IST
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अलहदादपुर में स्थित जर्जर भवन। शहर में ऐसे भवनों की संख्या 117 है।
- फोटो : अमर उजाला।
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गाजियाबाद के मुरादनगर में अंत्येष्टि स्थल पर भवन गिरने से चिंतित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जर्जर भवनों को गिराने का जो आदेश दिया है, उसका बड़ा असर गोरखपुर में पड़ेगा। नगर निगम ने 117 भवन ऐसे चिह्नित किए हैं, जो पूरी तरह से जर्जर हैं। अपनी उम्र पूरी कर चुके इन भवनों में परिवार सहित लोग जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। अब कमिश्नर व जिलाधिकारी को निरीक्षण करके जर्जर भवनों को ढहाने का आदेश मिला है।
नगर निगम परिक्षेत्र में 70 वार्ड हैं। इन वार्डों में 117 भवन जर्जर हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। भवनों को खाली करने का नोटिस दिया गया, लेकिन कोई खास असर नहीं पड़ा। अब भी लोग जर्जर भवनों में रह रहे हैं। खाली न करने का कारण पूछने पर कहते हैं कि महंगाई इतनी ज्यादा है। घर छोड़कर कहां चले जाएं। दोबारा घर बनवाना चाहें तो लाखों रुपये खर्च होंगे। लिहाजा, जान जोखिम में डालकर जर्जर भवन में रह रहे हैं।
तमाम जर्जर भवन बाजारों में भी हैं। ऊपरी हिस्से में परिवार सहित लोग रहते हैं तो उसके निचले हिस्से में दुकानें हैं। खरीदारों की अक्सर भीड़ लगी रहती है। बहरहाल, जर्जर भवन से संबंधित कोई नया आदेश शासन से नहीं आया है, लेकिन मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर नगर निगम ने जर्जर भवनों को खाली कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
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नगर निगम परिक्षेत्र में 70 वार्ड हैं। इन वार्डों में 117 भवन जर्जर हैं, जो कभी भी गिर सकते हैं। भवनों को खाली करने का नोटिस दिया गया, लेकिन कोई खास असर नहीं पड़ा। अब भी लोग जर्जर भवनों में रह रहे हैं। खाली न करने का कारण पूछने पर कहते हैं कि महंगाई इतनी ज्यादा है। घर छोड़कर कहां चले जाएं। दोबारा घर बनवाना चाहें तो लाखों रुपये खर्च होंगे। लिहाजा, जान जोखिम में डालकर जर्जर भवन में रह रहे हैं।
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तमाम जर्जर भवन बाजारों में भी हैं। ऊपरी हिस्से में परिवार सहित लोग रहते हैं तो उसके निचले हिस्से में दुकानें हैं। खरीदारों की अक्सर भीड़ लगी रहती है। बहरहाल, जर्जर भवन से संबंधित कोई नया आदेश शासन से नहीं आया है, लेकिन मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर नगर निगम ने जर्जर भवनों को खाली कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
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तिवारीपुर और माधोपुर में सबसे ज्यादा जर्जर भवन
नगर निगम के रिकार्ड के मुताबिक, शहर में सबसे ज्यादा जर्जर भवन तिवारीपुर और माधोपुर इलाके में हैं। यह इलाका पुराना है। ज्यादातर भवनों की दीवारों व छत से प्लास्टर उखड़ चुके हैं। सरिया बाहर आ गया है। रेलिंग टूटकर गिर चुकी हैं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता है। इसके बावजूद लोग रहते हैं।
जर्जर भवनों का आंकड़ा
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि नगर निगम का निर्माण विभाग जर्जर भवनों का सर्वे कराता है। अब तक 117 भवन चिह्नित किए गए हैं। कुछ खाली करने तो कुछ को दोबारा मरम्मत कराने के लिए कहा गया है। मरम्मत के जो भी आवेदन आते हैं, उसपर अनुमति दी जाती है। यह सिलसिला लगातार चल रहा है। अगर जर्जर भवनों को गिराने या अन्य कोई कार्रवाई करने का आदेश मिला तो पूरी तैयारी है।
जर्जर भवनों का आंकड़ा
| वार्ड संख्या | वार्ड का नाम | भवनों की संख्या |
| 55 | अलहदादपुर | 03 |
| 32 | माधोपुर | 40 |
| 58 | तिवारीपुर | 25 |
| 68 | गोरखनाथ | 2 |
| 38 | दिलेजाकरपुर | 1 |
| 39 | धर्मशाला बाजार | 1 |
| 40 | दीवान बाजार | 3 |
| 51 | इस्माइलपुर | 2 |
| 53 | काजीपुर | 1 |
| 35 | बसंतपुर | 1 |
| 64 | चक्सा हुसैन | 8 |
| 11 | हुमायूंपुर | 1 |
| 59 | हासुपुर | 1 |
| 67 | काली बाड़ी मंदिर | 1 |
| 18 | जंगल तुलसी राम | 2 |
| 04 | मानवेला | 4 |
| 09 | बशारतपुर | 1 |
| 06 | चरगांवा | 1 |
| 54 | भेड़ियागढ़ | 3 |
| 31 | असुरन | 2 |
| 48 | सूर्यकुंड | 3 |
| 33 | रसूलपुर | 1 |
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि नगर निगम का निर्माण विभाग जर्जर भवनों का सर्वे कराता है। अब तक 117 भवन चिह्नित किए गए हैं। कुछ खाली करने तो कुछ को दोबारा मरम्मत कराने के लिए कहा गया है। मरम्मत के जो भी आवेदन आते हैं, उसपर अनुमति दी जाती है। यह सिलसिला लगातार चल रहा है। अगर जर्जर भवनों को गिराने या अन्य कोई कार्रवाई करने का आदेश मिला तो पूरी तैयारी है।