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गोरखपुर चिड़ियाघर का हाल: बाड़े का काम अधूरा, गैंड़ा लाए जाने की तैयारी कागजों में पूरी
Mon, 06 Dec 2021 11:10 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 06 Dec 2021 11:10 AM IST
सार
गोरखपुर प्राणि उद्यान में असम से दो गैंड़े लाए जाने हैं, लेकिन तैयारी नहीं होने से देरी हो रही। बाड़े में अभी बिजली, रंग-रोगन बाकी है, वहीं मिट्टी से कील, शीशे-पत्थर के टुकड़े नहीं हटाए जा सके हैं।
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गोरखपुर चिड़ियाघर
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
शहीद अशफाक उल्लाह खान प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में गैंड़े के बाड़े का काम अभी अधूरा है और गैंड़ा लाए जाने की तैयारी प्रबंधन ने कागजों में पूरी कर ली है। प्राणि उद्यान प्रबंधन ने असम जाकर गैंड़ा लाए जाने की प्रक्रिया समझने के साथ अनुमति तो ले ली, लेकिन बाड़े तैयार नहीं होने से इन्हें लाया नहीं जा सका है। बाड़े में लगभग 35 छोटे-बड़े काम ऐसे हैं, जिन्हें राजकीय निर्माण निगम को पूरा करना है।
चिड़ियाघर के अंदर प्रवेश के बाद लकड़बग्घे के बाड़े से ठीक पहले गैंडे़ का बाड़ा बनाया गया है। इसके अंदर दीवारों का काम अभी अधूरा है। बाड़े के अंदर की तरफ अभी बिजली का इंतजाम नहीं है। अंदर के हिस्सों में रंग-रोगन नहीं हुआ है। सबसे खास यह कि बाड़े के अंदर मिट्टी की सतह पर पड़े कील, शीशे और पत्थर के टुकड़े नहीं हटे हैं। ऐसे में गैंड़ा लाए जाने के बाद उन्हें रखने में काफी परेशानी होगी।
प्राणी उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह के साथ अन्य सदस्यों की टीम 25 अक्तूबर को असम गई थी। वहां, राज्य प्राणी उद्यान गुवाहाटी से दो गैंडे़ (नर और मादा) लाए जाने की कागजी प्रक्रिया को पूरा करने के साथ गैंड़ों के स्वास्थ्य की जानकारियां ली। वहां से किस रास्ते लाए जाना बेहतर होगा, इसकी जानकारी इकट्ठा कर रूटमैप (मार्ग) बनाया। तय हुआ कि तीन राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, बिहार) की सीमा को पार कर लगभग 1200 किमी की दूरी तय कर इन्हें यहां लाया जाएगा। प्राणि उद्यान में गैंड़ों को रखे जाने वाले बाड़े अभी पूरी तरह तैयार क्यों नहीं है, इस सवाल पर राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह ने बताया कि हमारी तरफ से काम में कोई कमी नहीं है। बाड़े का काम पूरा किया जा चुका है। प्राणि उद्यान प्रबंधन चाह रहा कि इसमें अतिरिक्त काम किया जाए।
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प्राणि उद्यान के एसडीओ मनोज वर्मा ने बताया कि गैंड़ों के बाड़े का काम अभी बचा हुआ है। प्राथमिकता के आधार पर काम पूरा करवाया जा रहा है। निर्माण निगम को पांच दिन पहले पत्र भेजकर काम तेजी से करवाने के लिए कहा गया है।
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चिड़ियाघर के अंदर प्रवेश के बाद लकड़बग्घे के बाड़े से ठीक पहले गैंडे़ का बाड़ा बनाया गया है। इसके अंदर दीवारों का काम अभी अधूरा है। बाड़े के अंदर की तरफ अभी बिजली का इंतजाम नहीं है। अंदर के हिस्सों में रंग-रोगन नहीं हुआ है। सबसे खास यह कि बाड़े के अंदर मिट्टी की सतह पर पड़े कील, शीशे और पत्थर के टुकड़े नहीं हटे हैं। ऐसे में गैंड़ा लाए जाने के बाद उन्हें रखने में काफी परेशानी होगी।
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प्राणी उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह के साथ अन्य सदस्यों की टीम 25 अक्तूबर को असम गई थी। वहां, राज्य प्राणी उद्यान गुवाहाटी से दो गैंडे़ (नर और मादा) लाए जाने की कागजी प्रक्रिया को पूरा करने के साथ गैंड़ों के स्वास्थ्य की जानकारियां ली। वहां से किस रास्ते लाए जाना बेहतर होगा, इसकी जानकारी इकट्ठा कर रूटमैप (मार्ग) बनाया। तय हुआ कि तीन राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, बिहार) की सीमा को पार कर लगभग 1200 किमी की दूरी तय कर इन्हें यहां लाया जाएगा। प्राणि उद्यान में गैंड़ों को रखे जाने वाले बाड़े अभी पूरी तरह तैयार क्यों नहीं है, इस सवाल पर राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक डीबी सिंह ने बताया कि हमारी तरफ से काम में कोई कमी नहीं है। बाड़े का काम पूरा किया जा चुका है। प्राणि उद्यान प्रबंधन चाह रहा कि इसमें अतिरिक्त काम किया जाए।
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हैंडओवर पहले ले लिया, अब हो रही परेशानी
सूत्रों ने बताया कि प्राणि उद्यान उद्घाटन के समय ही प्रबंधन ने कार्यदायी संस्था से बाड़ों का हैंडओवर ले लिया। शायद उस समय बाड़ों की भौगोलिक स्थिति की समीक्षा की गई होती तो इसकी नौबत नहीं आती। हैंडओवर करने से उन कामों को पूरा मान लिया जाता है। ऐसे में अब अधूरे काम बताकर प्रबंधन की तरफ से निर्माण निगम को पूरा करवाने के लिए पत्र लिखने में तकनीकी दिक्कत हो रही।नवंबर में लाने की थी योजना
सूत्रों ने बताया कि प्रबंधन की तरफ से 20 नवंबर तक बाड़ों में इन गैंड़ों को लाया जाना था। लेकिन, बाड़े का काम अधूरा होने की वजह से इन्हें अभी तक नहीं लाया जा सका। अब सवाल है कि आखिर जब बाड़े अधूरे हैं तो असम से लाया गैंड़ा रखा कहां जाएगा ?प्राणि उद्यान के एसडीओ मनोज वर्मा ने बताया कि गैंड़ों के बाड़े का काम अभी बचा हुआ है। प्राथमिकता के आधार पर काम पूरा करवाया जा रहा है। निर्माण निगम को पांच दिन पहले पत्र भेजकर काम तेजी से करवाने के लिए कहा गया है।