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गोरखपुर विश्वविद्यालय: प्रो. कमलेश गुप्ता को हाईकोर्ट से राहत, निलंबन वापस का निर्देश
Wed, 22 Nov 2023 01:07 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 22 Nov 2023 01:07 PM IST
सार
हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस विकास ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलील सुनने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा पहले निलंबन आदेश सह आरोप पत्र के साथ ही दूसरे निलंबन आदेश और आरोप पत्र को खारिज कर दिया। सभी चार्जशीट भी खत्म कर दी गई।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय में धरने पर बैठे प्रो कमलेश गुप्ता। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर विश्वविद्यालय में पिछले दो वर्षों में तीसरी बार निलंबन का सामना कर हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. कमलेश कुमार गुप्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके निलंबन समेत सभी अनुशासनात्मक कार्रवाई को समाप्त कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस विकास ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलील सुनने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा पहले निलंबन आदेश सह आरोप पत्र के साथ ही दूसरे निलंबन आदेश और आरोप पत्र को खारिज कर दिया। सभी चार्जशीट भी खत्म कर दी गई। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा है कि प्रो. कमलेश के मामले में गोविवि द्वारा गठित अनुशासनिक समिति संविधान के अनुरूप नहीं बनी थी।
बता दें कि प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने वर्ष 2021 में तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह पर उनके कार्यकाल में हुए आय-व्यय की जांच किए जाने और उन्हें उनके पद से हटाए जाने की मांग कुलाधिपति से की थी।
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कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले प्रो. कमलेश को पिछले दो वर्षों में तीन बार निलंबन का सामना करना पड़ा। तीन बार में वे करीब 15 महीने तक निलंबित रहे हैं। कोर्ट से निलंबन रद्द होने के बाद प्रो. कमलेश गुप्त ने फेसबुक पर लिखा है, यह दुराग्रह के विरुद्ध सत्याग्रह की जीत है।
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जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस विकास ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलील सुनने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा पहले निलंबन आदेश सह आरोप पत्र के साथ ही दूसरे निलंबन आदेश और आरोप पत्र को खारिज कर दिया। सभी चार्जशीट भी खत्म कर दी गई। कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा है कि प्रो. कमलेश के मामले में गोविवि द्वारा गठित अनुशासनिक समिति संविधान के अनुरूप नहीं बनी थी।
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बता दें कि प्रो. कमलेश कुमार गुप्त ने वर्ष 2021 में तत्कालीन कुलपति प्रो. राजेश सिंह पर उनके कार्यकाल में हुए आय-व्यय की जांच किए जाने और उन्हें उनके पद से हटाए जाने की मांग कुलाधिपति से की थी।
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कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले प्रो. कमलेश को पिछले दो वर्षों में तीन बार निलंबन का सामना करना पड़ा। तीन बार में वे करीब 15 महीने तक निलंबित रहे हैं। कोर्ट से निलंबन रद्द होने के बाद प्रो. कमलेश गुप्त ने फेसबुक पर लिखा है, यह दुराग्रह के विरुद्ध सत्याग्रह की जीत है।