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राप्ती नदी खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर
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राप्ती नदी खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर
गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार को खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर रहा। इससे बाढ़ का खतरा गहरा गया है। उत्तरी व दक्षिणी कोलिया, डोमिनगढ़, घुनघुन कोठा, उत्तरासोत, मंझरिया और कठउर सहित तमाम इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। उत्तरी और दक्षिणी बहरामपुर के घरों में पानी भरा है। इससे चुनौती बढ़ी है। बंधों पर जबरदस्त दबाव बना है। शहरी क्षेत्रों में भी कटान का खतरा बरकरार है।
गंडक नदी के बाल्मीकि बैराज से पानी छोड़ने का सिलसिला जारी है। इस सोमवार को भी बैराज से 1,72,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसी का नतीजा है कि नदियों का उफनाना जारी है। राप्ती, घाघरा, गोर्रा और रोहिन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कैंपियरगंज, सहजनवां, गोरखपुर शहर, खजनी और गोला तहसील क्षेत्र के 80 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। 21 गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुके हैं। फसलें जलमग्न और चौपट हो गईं। अब नाव से ही आने-जाने का विकल्प है। इन क्षेत्रों के लोग मवेशियों के साथ बंधों पर आ गए हैं। बारिश का पानी भी अलग-अलग स्रोतों से नदियों में आ रहा है। आमी नदी का जलस्तर भले ही नहीं मापा जाता है लेकिन यह नदी फसलों की भीषण बर्बादी करती है। आबादी को भी प्रभावित करती है।
सोमवार को नदियों का जलस्तर (मीटर में)
नदी खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा (अयोध्या) 92.730 93.510 93.510
राप्ती (बर्डघाट) 74.980 75.955 75.950
कुआनो (मुखलिसपुर) 78.650 78.460 78.450
रोहिन (त्रिमुहानी) 82.440 82.450 82.590
गोर्रा (पिड़राघाट) 70.500 71.200 71.200
ट्यूब की नाव बनाकर आने-जाने की मजबूरी
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश का पानी भी एकत्र है। नौसड़ बगहा बाबा मंदिर और हरैया में वाहनों के ट्यूब को नाव बनाकर आना-जाना पड़ रहा है। यही समस्या शहर के तमाम मुहल्लों की है। तारामंडल, सैनिक विहार और सैनिक कुंज के अलग-अलग इलाकों में अब भी जलभराव है।
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गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार को खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर रहा। इससे बाढ़ का खतरा गहरा गया है। उत्तरी व दक्षिणी कोलिया, डोमिनगढ़, घुनघुन कोठा, उत्तरासोत, मंझरिया और कठउर सहित तमाम इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया। उत्तरी और दक्षिणी बहरामपुर के घरों में पानी भरा है। इससे चुनौती बढ़ी है। बंधों पर जबरदस्त दबाव बना है। शहरी क्षेत्रों में भी कटान का खतरा बरकरार है।
गंडक नदी के बाल्मीकि बैराज से पानी छोड़ने का सिलसिला जारी है। इस सोमवार को भी बैराज से 1,72,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसी का नतीजा है कि नदियों का उफनाना जारी है। राप्ती, घाघरा, गोर्रा और रोहिन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कैंपियरगंज, सहजनवां, गोरखपुर शहर, खजनी और गोला तहसील क्षेत्र के 80 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। 21 गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुके हैं। फसलें जलमग्न और चौपट हो गईं। अब नाव से ही आने-जाने का विकल्प है। इन क्षेत्रों के लोग मवेशियों के साथ बंधों पर आ गए हैं। बारिश का पानी भी अलग-अलग स्रोतों से नदियों में आ रहा है। आमी नदी का जलस्तर भले ही नहीं मापा जाता है लेकिन यह नदी फसलों की भीषण बर्बादी करती है। आबादी को भी प्रभावित करती है।
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सोमवार को नदियों का जलस्तर (मीटर में)
नदी खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा (अयोध्या) 92.730 93.510 93.510
राप्ती (बर्डघाट) 74.980 75.955 75.950
कुआनो (मुखलिसपुर) 78.650 78.460 78.450
रोहिन (त्रिमुहानी) 82.440 82.450 82.590
गोर्रा (पिड़राघाट) 70.500 71.200 71.200
ट्यूब की नाव बनाकर आने-जाने की मजबूरी
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश का पानी भी एकत्र है। नौसड़ बगहा बाबा मंदिर और हरैया में वाहनों के ट्यूब को नाव बनाकर आना-जाना पड़ रहा है। यही समस्या शहर के तमाम मुहल्लों की है। तारामंडल, सैनिक विहार और सैनिक कुंज के अलग-अलग इलाकों में अब भी जलभराव है।
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