फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur Literary Fest inaugural session litterateur Prof. Nandakishore

गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट: उद्घाटन सत्र में बोले साहित्यकार प्रो. नंदकिशोर, अब बाजार से तय होती है शब्दों की विश्वसनीयता

Sun, 19 Dec 2021 02:47 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 19 Dec 2021 02:47 PM IST
सार

गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट का उद्घाटन सत्र शब्दों की विश्वसनीयता पर चर्चा से शुरू हुआ। कार्यक्रम के दौरान प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि मीडिया और राजनीति से काफी ऊपर है समाज।

विज्ञापन
Gorakhpur Literary Fest inaugural session litterateur Prof. Nandakishore
गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त साहित्यकार प्रो. नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि भाषा शुद्ध और शिष्ट होनी चाहिए, तभी उसकी सार्थकता है। वर्तमान में शब्द के सामने विश्वसनीयता का संकट है, इसलिए भाषा भी अशुद्ध और अशिष्ट हो रही है। प्रो. आचार्य शनिवार को ‘शब्दों की विश्वसनीयता’ विषय पर आयोजित लिटरेरी फेस्ट के उद्घाटन सत्र को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसकी प्रमुख वजह बाजार है। अब बाजार ही शब्दों की विश्वसनीयता तय कर रहा है। ऐसे में अब शब्द विश्वसनीयता के संकट से जूझ रहे हैं।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि 220 भाषाएं हिंदुस्तान में नष्ट हो गईं, जिसका अर्थ है कि 220 सामाजिक सांस्कृतिक समुदाय नष्ट हो गए। तो ऐसे विकास का क्या ही मतलब? भाषा तथा संस्कृति एक दूसरे के पूरक हैं और उन्हें नष्ट करके विकास की कल्पना बेमानी है। प्रो. आचार्य ने शब्दों के सही प्रयोग और सही शब्दों के प्रयोग पर जोर देते हुए कहा कि शब्द की हिंसा घातक है। बाजारवाद के फेर से शब्दों की हिंसा का दौर चल पड़ा है। बाजार ने शब्दों की मर्यादा भंग की है, यह चिंतन का विषय है। यह सिलसिला और आगे बढ़ा तो वह दिन दूर नहीं जब शब्द के बाद समाज और संस्कृति के सामने भी विश्वसनीयता का संकट खड़ा हो जाएगा।
विज्ञापन


भारतीय जनसंचार संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि यह अद्भुत समय है, जब समाज ने सब कुछ राजनीति और पत्रकारिता पर छोड़ दिया है। इसे समझना चाहिए कि मीडिया और राजनीति से समाज काफी ऊपर है। ऐसा चेतना के पतन की वजह से हो रहा है। यही वजह है कि शब्दों का अस्तित्व भी संकट में है। शब्दों की दुनिया के लोग शब्दों के विचार से कर्म में परिवर्तित होने के प्रति गंभीर बनें, तभी समाज सशक्त होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


साहित्यकार प्रो. चित्तरंजन मिश्रा ने कहा कि शब्द ना हो तो रूप की पहचान असंभव है। इसीलिए शब्द को सृष्टि की कुंजी कहा गया है। उन्होंने कहा कि भाषा अब तक की सबसे बड़ी खोज है। भाषा के बिना ज्ञान को कोई समझ नहीं सकता। प्रो. कृष्णचंद्र लाल ने कहा कि शब्द हमारे अभ्यंतर से निकलते हैं। यही वजह है कि प्राचीन काल में ही मनीषियों ने कहा है कि शब्द बहुत सोच-विचार कर बोले जाने चाहिए। इस सत्र का संचालन प्रो. हर्ष सिन्हा ने किया।

‘पुरवाई’ आर्ट गैलरी का हुआ शुभारंभ

साहित्यकार प्रो. नंद किशोर आचार्य एवं अन्य अतिथियों ने डॉ. राजीव केेतन की स्मृति में लगाई गई पुरवाई आर्ट गैलरी का शुभारंभ किया। इसके अलावा डॉक्टर रजनीकांत तथा डॉ. राजीव केतन की स्मृति में दो डॉक्यूमेंट्री को भी उद्घाटन सत्र के दौरान प्रदर्शित किया गया। डॉ. रजनीकांत की स्मृति में नवाबनामा और लिटरेरी फेस्ट की स्मारिका का विमोचन भी हुआ। प्रो. कृष्ण कुमार पांडेय की दो पुस्तकों ‘सरयू पार के युग पुरुष’ व ‘पूर्वांचल में स्वाधीनता का यथार्थ’ का विमोचन भी अतिथियों ने किया।

 

पहला दिन: साहित्यिक व सियासी विमर्श, सांस्कृतिक गतिविधियों से शब्द संवाद का आगाज

‘शब्द संवाद’ के पहले दिन, विमर्श के पांच सत्र आयोजित किए गए तो सांस्कृतिक गतिविधियों में चार प्रस्तुतियां हुईं।  शब्दों के महत्व पर विद्वानों ने जहां विस्तार से चर्चा की तो वहीं गीत, संगीत, नृत्य और नाटक की प्रस्तुतियों ने आयोजन की सार्थकता को बयां किया। साहित्य और राजनीति की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर विमर्श हुए। साहित्यिक सत्र में हिंदी साहित्य से दूर हो रही युवा पीढ़ी चर्चा के केंद्र में रही। वहीं, राजनीति सत्र में सियासत, शरारत, शराफत विषय पर चर्चा हुई तो नाट्य सत्र में ‘सिनेमा और थिएटर की मौलिकता और रचनाशीलता’ विषय के नाम रहा। विदेशिया नाटक की प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed