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सीएम योगी के हस्तक्षेप के बाद इस शख्स को मिली राहत, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष ने कराई थी मुलाकात

Mon, 30 Nov 2020 02:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 30 Nov 2020 02:17 PM IST
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Gorakhpur industry owner Bhola Jaiswal paid less map fee after CM Yogi Adityanath instruction
सीएम योगी आदित्यनाथ(file) - फोटो : amar ujala
लघु उद्योग भारती की पहल पर गोरखपुर जिले के जंगल बेनीमाधव नंबर में फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहे उद्योगपति भोला जायसवाल को राहत मिली है। उद्योगपति को मानचित्र शुल्क के एवज में 32.50 लाख की जगह 6.25 लाख रुपये देने पड़े हैं।
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उद्योगपति भोला जायसवाल ने गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) परिक्षेत्र के जंगल बेनीमाधव नंबर दो में फैक्ट्री लगाने का फैसला किया था। इसके लिए मानचित्र पास कराने का आवेदन किया गया। जीडीए ने आकलन कराया, फिर मानचित्र पास कराने के एवज में 32.50 लाख रुपये जमा कराने का आदेश पारित कर दिया। इससे परेशान उद्योगपति ने लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष दीपक कारीवाल से मिलकर समस्या बताई।
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अध्यक्ष ने ही उद्योगपति को गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाया और समस्या के समाधान की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। मुख्यमंत्री कार्यालय से जैसे ही मामला जीडीए प्रशासन के पास पहुंचा, वैसे ही अफसर हरकत में आ गए। अफसरों ने मानचित्र शुल्क का नए सिरे से आकलन कराया और अब 6.25 लाख रुपये जमा कराने का आदेश पारित किया।
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गीडा में मानचित्र शुल्क 60 हजार रुपये लगते

गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि उद्यमी को मानचित्र शुल्क को लेकर कुछ संशय हो गया था। अब शासनादेश की कॉपी दे दी गई है। सभी तरह की शंकाओं का समाधान कर दिया गया है।

शासनादेश के अनुसार, अनुज्ञा शुल्क पांच रुपये प्रति वर्ग मीटर, निरीक्षण शुल्क-20 रुपये प्रति वर्ग मीटर, अंबार शुल्क- 40 रुपये प्रति वर्ग मीटर, विकास शुल्क - 210 रुपये प्रति वर्ग मीटर (अन्य के लिए 840 रुपये प्रति वर्ग मीटर), भू-विभाजन शुल्क-जमीन की कीमत का .4 प्रतिशत (दशमलव चार प्रतिशत) और लेबर सेस-एक प्रतिशत निर्धारित है।  

लघु उद्योग भारती गोरखपुर के अध्यक्ष दीपक कारीवाल का कहना है कि उद्योग लगाने के लिए मानचित्र शुल्क का अलग-अलग मानक है। भोला जायसवाल जंगल बेनीमाधव नंबर दो में करीब 10 हजार वर्ग मीटर में अपनी फैक्ट्री स्थापित कर रहे हैं। जीडीए के नियमानुसार उद्योगपति को 6.25 लाख रुपये देने पड़े हैं। अगर यही मामला गीडा का होता तो 60 हजार रुपये ही मानचित्र शुल्क जमा कराने पड़ते। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी। साथ ही मानचित्र शुल्क को एक समान करने की मांग रखी जाएगी।
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