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एक्सक्लूसिव: जालसाजों के लिए साफ्ट टारगेट बना एम्स, जानिए कैसे कर रहे हैं ठगी

Thu, 18 Feb 2021 04:16 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 18 Feb 2021 04:16 PM IST
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Gorakhpur AIIMS soft target for criminals
गोरखपुर एम्स। - फोटो : अमर उजाला

गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जालसाजों के लिए साफ्ट टारगेट बन गया है। वर्ष 2019 से लेकर अब तक एम्स के नाम पर तमाम फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं। जालसाज कभी कैंटीन, साइकिल स्टैंड और मेडिकल स्टोर आवंटन तो कभी नियुक्ति के नाम पर ठगी कर रहे हैं।

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अभी तक छह से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। एक मामले में केस भी दर्ज हुआ है। एम्स प्रशासन लगातार अपील कर रहा है, लेकिन लोग जालसाजों के झांसे में आ ही जा रहे हैं। एम्स प्रशासन का कहना है कि अगर कोई नियुक्ति सहित अन्य के नाम पर रुपये वसूलता है, तो एक बार एम्स की वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी ले लें। वेबसाइट से भी अगर जानकारी नहीं मिल पाती, तो एम्स में आकर भी लोग सही जानकारी ले सकते हैं।
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केस एक
पटना में बनी फर्जी वेबसाइट पर निकाली गई वैकेंसी
एम्स के नाम पर पटना में एक फर्जी वेबसाइट बनाई गई। इस वेबसाइट पर स्टाफ नर्स से लेकर लैब टेक्नीशियन सहित हेल्थ वर्कर के नाम पर वैकेंसी निकाली गई। बकायदा रजिस्टर्ड नंबर भी डाला गया। कई लोगों ने संपर्क कर जालसाजों के खाते में रुपये भी जमा कर दिए। जब लोग नियुक्ति पत्र लेकर एम्स पहुंचे तो उन्हें ठगी की जानकारी हुई।

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केस 2

कैंटीन के नाम पर नौ लाख की ठगी
एम्स के नाम पर जालसाजी का यह पहला केस था। वर्ष 2019 में कुशीनगर निवासी शाहरुख से एम्स में कैंटीन के नाम पर नौ लाख रुपये ठग लिए गए। इस मामले में गोरखनाथ थाना पुलिस ने चिलुआताल इलाके के रहने वाले पवन कुमार त्रिपाठी के खिलाफ केस दर्ज किया। हालांकि इस मामले में कार्रवाई कोई खास आगे नहीं बढ़ी है।  

केस 3
फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर कई लोग पहुंचे
लॉकडाउन से पहले एम्स के आसपास नंदानगर सहित कई कॉलोनियों के लोग भी जालसाजी के शिकार हो गए थे। एक दर्जन से अधिक युवक फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर एम्स में पहुंच गए। इस पर एम्स प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि कोई भी नियुक्ति एम्स में नहीं हुई है। नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचे लोगों ने बताया कि उन्होंने इसके लिए तीन-तीन लाख रुपये से अधिक दिए हैं।

केस 4
मेडिकल स्टोर के नाम पर भी ठगी
कुशीनगर के सुकरौली के रहने वाले एक शख्स ने करीब एक पखवारे पूर्व ही एम्स में कैंटीन और मेडिकल स्टोर के नाम पर एक जालसाज को तीन लाख रुपये दे दिए। जब वह एम्स पहुंचे तो रजिस्ट्रार ने इसे फर्जी करार दिया। अब वह जालसाज तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हुए हैं, लेकिन उसका मोबाइल नंबर लगातार बंद है। उसने घर का पता भी गलत दिया है।

फर्जी मुहर और हस्ताक्षर तक बना ले रहे जालसाज

जालसाज इतने शातिर हैं कि एम्स का फर्जी मुहर और एम्स प्रशासनिक अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर तक तैयार करवा ले रहे हैं। पटना में बनी एम्स की फर्जी वेबसाइट में भी डिजिटल हस्ताक्षर के जरिये लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। यही नहीं, ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं जिसमें खुद को अधिकारियों का खासमखास बताकर जालसाजी की जा रही है। भालोटिया मार्केट के दो व्यापारियों से इसी तरह से ठगी हुई। बताया जा रहा है किसी अधिकारी का खास बताकर जालसाजों ने दोनों से दवाओं की आपूर्ति के नाम पर लाखों रुपये वसूल लिए।
 
एम्स निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि जालसाजी के मामले सामने तो आए हैं, लेकिन अब तक लिखित तौर पर कोई शिकायत नहीं मिली है। एम्स में नियुक्ति के नाम पर अगर कोई रुपये मांगता है, तो तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दें। अधिक जानकारी के लिए एम्स की आधिकारिक वेबसाइट पर भी संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा एम्स प्रशासन से भी जानकारी ले सकते हैं।  
 
डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि जालसाजी के मामले सामने आने पर तत्काल केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। लोगों को भी जागरूक रहना चाहिए, ताकि ठगी के शिकार न हों।
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