{"_id":"6ad9289889ff7068350ceccd","slug":"goddess-durga-bid-farewell-with-teary-eyes-immersion-procession-taken-out-amidst-the-sound-of-drums-and-cymbals-gorakhpur-news-c-205-1-ksh1006-170638-2026-10-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई, ढोल-नगाड़ों के बीच निकली विसर्जन यात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: नम आंखों से मां दुर्गा को दी विदाई, ढोल-नगाड़ों के बीच निकली विसर्जन यात्रा
विज्ञापन
रामाभार पुल के नीचे हिरण्यवती नदी में विसर्जित हुईं कसया की प्रतिमाएं, घाटों पर रही कड़ी सुरक्षा
कसया। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद बुधवार को कसया और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। गाजे-बाजे के साथ निकली विसर्जन यात्रा में श्रद्धालु नाचते-गाते और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हुए आगे बढ़े।
दुर्गा माता की विदाई के दौरान माहौल भक्तिमय रहा। नदी और तालाबों में प्रतिमाओं के विसर्जन के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कसया नगर की प्रतिमाओं का विसर्जन देवरिया मार्ग स्थित रामाभार पुल के नीचे हिरण्यवती नदी में किया गया। वहीं, कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों की प्रतिमाएं हेतिमपुर स्थित छोटी गंडक नदी में विसर्जित की गईं। विसर्जन को लेकर घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
रामाभार पुल के नीचे प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए नाव और गोताखोरों की व्यवस्था की थी। प्रत्येक प्रतिमा के साथ पुलिस बल तैनात रहा। जॉइंट मजिस्ट्रेट जी. अक्षय दीपक ने स्थानीय पुलिस के साथ रामाभार पुल और खरदर पुल के समीप स्थित विसर्जन घाटों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सीओ अजय कुमार सिंह और कसया थानाध्यक्ष इत्यनाद पांडेय दोपहर से देर रात तक घाटों का भ्रमण करते रहे।
विज्ञापन
अधिकारियों ने विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अन्य इंतजामों पर नजर रखी। कसया क्षेत्र में कुल 32 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है। इनमें बाड़ीपुल, रामाभार पुल, चकदेइया, सिसई, खरदर पुल, कुकुत्था नदी स्थित ललका बाबा घाट, छोटी गंडक नदी के शतगुड़ही और अहिरौली बाजार स्थित शिव मंदिर प्रमुख हैं। इन स्थानों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।
विज्ञापन
कसया। शारदीय नवरात्र में नौ दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद बुधवार को कसया और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। गाजे-बाजे के साथ निकली विसर्जन यात्रा में श्रद्धालु नाचते-गाते और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाते हुए आगे बढ़े।
दुर्गा माता की विदाई के दौरान माहौल भक्तिमय रहा। नदी और तालाबों में प्रतिमाओं के विसर्जन के समय श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कसया नगर की प्रतिमाओं का विसर्जन देवरिया मार्ग स्थित रामाभार पुल के नीचे हिरण्यवती नदी में किया गया। वहीं, कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों की प्रतिमाएं हेतिमपुर स्थित छोटी गंडक नदी में विसर्जित की गईं। विसर्जन को लेकर घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
विज्ञापन
रामाभार पुल के नीचे प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए नाव और गोताखोरों की व्यवस्था की थी। प्रत्येक प्रतिमा के साथ पुलिस बल तैनात रहा। जॉइंट मजिस्ट्रेट जी. अक्षय दीपक ने स्थानीय पुलिस के साथ रामाभार पुल और खरदर पुल के समीप स्थित विसर्जन घाटों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सीओ अजय कुमार सिंह और कसया थानाध्यक्ष इत्यनाद पांडेय दोपहर से देर रात तक घाटों का भ्रमण करते रहे।
विज्ञापन
अधिकारियों ने विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और अन्य इंतजामों पर नजर रखी। कसया क्षेत्र में कुल 32 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है। इनमें बाड़ीपुल, रामाभार पुल, चकदेइया, सिसई, खरदर पुल, कुकुत्था नदी स्थित ललका बाबा घाट, छोटी गंडक नदी के शतगुड़ही और अहिरौली बाजार स्थित शिव मंदिर प्रमुख हैं। इन स्थानों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही।