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गीताप्रेस की मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ के 95 साल, वार्षिक विशेषांक छपकर तैयार
Wed, 05 Feb 2020 10:36 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 05 Feb 2020 10:36 AM IST
सार
- बोधकथा विशेषांक की एक लाख 85 हजार प्रतियां पाठकों को भेज रहा गीता प्रेस
- सात हजार पुस्तकें रोजाना डाक के माध्यम से पहुंचाई जा रहीं
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गीताप्रेस की मासिक पत्रिका कल्याण।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गीताप्रेस की मासिक पत्रिका कल्याण अपने 95वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। इसी के साथ हर वर्ष जनवरी में प्रकाशित किए जाने वाले पुस्तक के वार्षिक विशेषांक बोध कथा की प्रतियां भी पाठकों को उपलब्ध होने लगी हैं। कल्याण के इस 94वें विशेषांक की एक लाख 85 हजार प्रतियां छपकर तैयार हो चुकी हैं। हर दिन गीता प्रेस से सात हजार पुस्तकें डाक के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाई जा रही हैं।
गीता प्रेस से कल्याण पत्रिका का प्रकाशन 1926 में शुरू हुआ। पत्रिका के प्रथम संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार थे। 1982 से राधेश्याम खेमका की देखरेख में कल्याण का प्रकाशन हो रहा है। अब तक इसकी 16 करोड़ 20 लाख प्रतियां छप चुकी हैं। पांच सौ आठ पृष्ठों के इस बार के विशेषांक में महापुरुषों के बोध परख जीवन प्रसंग, प्रेरणाप्रद लघु बोध कथाएं, विभिन्न धर्म एवं संस्कृतियों की प्रेरक बोध कथाएं, लोक जीवन की बोध कथाएं, आध्यत्मिक बोध कथाएं, आर्ष साहित्यकी बोध कथाएं, कर्म सिद्धांत बोध कथाएं, नीति परख बोध कथाएं आदि शामिल हैं।
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गीता प्रेस से कल्याण पत्रिका का प्रकाशन 1926 में शुरू हुआ। पत्रिका के प्रथम संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार थे। 1982 से राधेश्याम खेमका की देखरेख में कल्याण का प्रकाशन हो रहा है। अब तक इसकी 16 करोड़ 20 लाख प्रतियां छप चुकी हैं। पांच सौ आठ पृष्ठों के इस बार के विशेषांक में महापुरुषों के बोध परख जीवन प्रसंग, प्रेरणाप्रद लघु बोध कथाएं, विभिन्न धर्म एवं संस्कृतियों की प्रेरक बोध कथाएं, लोक जीवन की बोध कथाएं, आध्यत्मिक बोध कथाएं, आर्ष साहित्यकी बोध कथाएं, कर्म सिद्धांत बोध कथाएं, नीति परख बोध कथाएं आदि शामिल हैं।
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ऐसे हुई कल्याण की शुरुआत
दिल्ली में अप्रैल 1926 में आयोजित मारवाड़ी अग्रवाल सभा के आठवें अधिवेशन में घनश्यामदास बिड़ला ने भाईजी को अपने विचारों व सिद्धांतों पर आधारित एक पत्रिका निकालने की सलाह दी। गीताप्रेस के संस्थापक सेठजी जयदयाल गोयंदका की सहमति से 22 अप्रैल 1926 को पत्रिका का नाम कल्याण निश्चित हुआ। इसी वर्ष भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार के संपादकत्व में कल्याण का प्रथम साधारण अंक मुंबई से प्रकाशित हुआ। दूसरे वर्ष कल्याण का प्रथम विशेषांक भगवन्नामांक गोरखपुर से प्रकाशित हुआ।
कल्याण का बोध कथा वार्षिक विशेषांक छप कर तैयार है। देशभर के एक लाख 85 हजार कल्याण पाठकों तक विशेषांक पहुंचाने का कार्य शुरू हो गया है। प्रतिदिन सात हजार पुस्तकें पाठकों को भेजी जा रही है।
लालमणि तिवारी, उत्पाद प्रबंधक गीताप्रेस
कल्याण का बोध कथा वार्षिक विशेषांक छप कर तैयार है। देशभर के एक लाख 85 हजार कल्याण पाठकों तक विशेषांक पहुंचाने का कार्य शुरू हो गया है। प्रतिदिन सात हजार पुस्तकें पाठकों को भेजी जा रही है।
लालमणि तिवारी, उत्पाद प्रबंधक गीताप्रेस