Exclusive: गीता प्रेस ने बंद किया भविष्य पुराण का प्रकाशन, जानिए क्या है वजह
कुछ तथ्यों पर आपत्ति के बाद प्रकाशन बंद करने का निर्णय लिया गया। प्रबंधन विवादित तथ्यों पर मंथन कर रहा है, जल्द प्रकाशन हो सकता है।
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गोरखपुर गीता प्रेस ने भविष्य पुराण का प्रकाशन बंद कर दिया है। 18 पुराणों में से एक भविष्य पुराण में कुछ तथ्यों पर आपत्ति आने के बाद गीता प्रेस प्रबंधन ने भविष्य पुराण का प्रकाशन फिलहाल बंद कर दिया है। गीता प्रेस प्रबंधन का कहना है कि विवादित तथ्यों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। ऐसे अंशों को निकाल कर जल्द ही भविष्य पुराण का प्रकाशन किया जा सकता है।
बता दें कि गीता प्रेस से अब तक विभिन्न भाषाओं में करीब 33 लाख पुराणों का प्रकाशन हो चुका है। इनमें 18 पुराण और तीन उप-पुराण शामिल हैं। धार्मिक पुस्तकों के लिए गीता प्रेस की दुनिया भर में पहचान है। हर साल लाखों धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं। शायद ही ऐसा कोई हिंदू घर हो जहां गीता प्रेस से प्रकाशित धार्मिक पुस्तकें न हों। गीता प्रेस की स्थापना के 10 वर्षों बाद यानी 1933 से पुराणों का प्रकाशन शुरू किया गया है। सबसे पहले विष्णु पुराण प्रकाशित किया गया।
1998 में शुरू हुआ था प्रकाशन
गीता प्रेस से भविष्य पुराण का प्रकाशन 1998 से शुरू हुआ था। भविष्य पुराण की हिंदी में अब तक 85500 और गुजराती में 5000 हजार प्रतियां प्रकाशित हुई हैं।
इन पुराणों का हो रहा प्रकाशन
विष्णु पुराण, पद्म पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्म वैवर्त पुराण, शिव महापुराण, भागवत पुराण, मार्कंडेय पुराण, नारद पुराण, ब्रह्म पुराण, वारह पुराण, गरुण पुराण, अग्नि पुराण, लिङ्ग पुराण, वामन पुराण, मत्स्य पुराण, कूर्म पुराण, देवी भागवत पुराण, नरसिंह उप पुराण, महाभागवत देवी उप पुराण और गणेश उप पुराण।
गीता प्रेस प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि भविष्य पुराण में कुछ चीजें बाद में जोड़ी गई थीं। ऐसे में भविष्य पुराण के प्रकाशन को बंद कर दिया गया है। अब इस पर मंथन चल रहा है कि इसमें जो भी विवादित सामग्री है उसे निकालकर फिर से प्रकाशित किया जाए।