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Exclusive: गीता प्रेस ने बांग्ला में शुरू किया भागवत नवनीत का प्रकाशन, इन भाषाओं में भी हो चुकी है प्रकाशित
Mon, 20 Dec 2021 04:07 PM IST
vivek shukla
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 20 Dec 2021 04:07 PM IST
सार
इस पुस्तक का हिंदी से बांग्ला में अनुवाद स्वामी चेतनानंद गिरि ने किया है। गीता प्रेस से भागवत नवनीत की हिंदी भाषा में 70 हजार एवं गुजराती भाषा में 33 हजार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
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गीता प्रसे से प्रकाशित भागवत नवनीत।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
हिंदी और गुजराती के बाद अब बांग्ला भाषा में भी लोगों को भागवत नवनीत पढ़ने को मिलेगी। गीता प्रेस ने अपने नए प्रयोगों के क्रम में पहली बार बांग्ला भाषा में भागवत नवनीत का प्रकाशन शुरू किया है।
धार्मिक पुस्तकों के माध्यम से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में गीता प्रेस का महत्वपूर्ण योगदान है। 98 वर्षों में 15 भाषाओं में श्रीमद्भागवत गीता, रामचरित मानस सहित 72 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली गीता प्रेस ने हिंदी और गुजराती के बाद संत श्रीरामचंद्र केशव डोंगरेजी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा की लिपिबद्ध पुस्तक भागवत नवनीत का प्रकाशन शुरू किया है। पहले संस्करण में एक हजार पुस्तकें प्रकाशित भी हो गई हैं।
इस पुस्तक का हिंदी से बांग्ला में अनुवाद स्वामी चेतनानंद गिरि ने किया है। गीता प्रेस से भागवत नवनीत की हिंदी भाषा में 70 हजार एवं गुजराती भाषा में 33 हजार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हिंदी, गुजराती और बांग्ला के बाद अब गीता प्रेस प्रबंधन ने मराठी भाषा में भागवत नवनीत को प्रकाशित करने की योजना तैयार की है।
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गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि हिंदी और गुजराती के बाद बांग्ला भाषा में भागवत नवनीत का प्रकाशन शुरू किया गया है। पहले संस्करण में एक हजार पुस्तकें प्रकाशित की गईं हैं। इसकी कीमत दो सौ रुपये है। आगे इसे मराठी भाषा में भी प्रकाशित करने की योजना है।
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धार्मिक पुस्तकों के माध्यम से सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में गीता प्रेस का महत्वपूर्ण योगदान है। 98 वर्षों में 15 भाषाओं में श्रीमद्भागवत गीता, रामचरित मानस सहित 72 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन करने वाली गीता प्रेस ने हिंदी और गुजराती के बाद संत श्रीरामचंद्र केशव डोंगरेजी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा की लिपिबद्ध पुस्तक भागवत नवनीत का प्रकाशन शुरू किया है। पहले संस्करण में एक हजार पुस्तकें प्रकाशित भी हो गई हैं।
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इस पुस्तक का हिंदी से बांग्ला में अनुवाद स्वामी चेतनानंद गिरि ने किया है। गीता प्रेस से भागवत नवनीत की हिंदी भाषा में 70 हजार एवं गुजराती भाषा में 33 हजार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। हिंदी, गुजराती और बांग्ला के बाद अब गीता प्रेस प्रबंधन ने मराठी भाषा में भागवत नवनीत को प्रकाशित करने की योजना तैयार की है।
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डोंगरेजी महाराज की सुनाई कथा है भागवत नवनीत
संत श्रीरामचंद्र केशव डोंगरेजी का जन्म 1925 में हुआ था। इनकी तुलना शुकदेव मुनि से की जाती है। वह अपनी कथा को टेप नहीं करने देते थे। लेकिन एक बार किसी ने उनसे उनकी कथा टेप करने की अनुमति प्राप्त कर ली। ब्रजवासी प्रेमी मथुरिया भी इनकी कथा के रसिक श्रोता थे, उन्होंने परिश्रमपूर्वक डोंगरेजी महाराज की वाणी को टेप से ज्यों का त्यों अविकल रूप से लिपिबद्ध कर दिया। जो गीता प्रेस से नवनीत भागवत के रूप में प्रकाशित हो रही है।गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि हिंदी और गुजराती के बाद बांग्ला भाषा में भागवत नवनीत का प्रकाशन शुरू किया गया है। पहले संस्करण में एक हजार पुस्तकें प्रकाशित की गईं हैं। इसकी कीमत दो सौ रुपये है। आगे इसे मराठी भाषा में भी प्रकाशित करने की योजना है।