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जीडीए के रुख से बढ़ी बेचैनी, रसूखदार भी परेशान, दिनभर घनघनाते रहे अफसरों के फोन
Sun, 22 Nov 2020 12:20 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 22 Nov 2020 12:20 PM IST
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण
- फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेलवे स्टेशन के सामने नजूल की भूमि पर जीडीए के रुख से मकान, दुकान, होटल या फिर व्यावसायिक कांप्लेक्स बनवाने वालों की बेचैनी बढ़ी है। रसूखदार भी परेशान हैं। शनिवार को तमाम रसूखदारों ने जीडीए के अफसरों को फोन किया। साथ ही भूमि को फ्री होल्ड करने की अपील की। लेकिन अफसरों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। साफ कहा कि नजूल की भूमि राजस्व की होती है। इसे फ्री होल्ड करने का अधिकार सिर्फ जिलाधिकारी के पास है।
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जीडीए ने पहली बार स्वीकार किया कि रेलवे स्टेशन के सामने की बेशकीमती भूमि नजूल की है। इसे प्राधिकरण फ्री होल्ड नहीं कर सकता है। यदि जिला प्रशासन भूमि जीडीए के नाम दर्ज करा दे, तभी फ्री होल्ड किया जा सकता है।
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नजूल की भूमि पर बनी दुकानों को 99 साल के लीज पर दिया गया था। इन दुकानों को तुड़वाकर तमाम रसूखदारों ने होटल, व्यावसायिक कांप्लेक्स, मकान या फिर दुकान बनवा लिए हैं। अब भूमि के फ्री होल्ड न होने और मालिकाना हक न मिलने की जानकारी मिली तो हड़कंप मच गया।
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दरअसल, दुकानदार, मकान, होटल व व्यावसायिक कांप्लेक्स के मालिक जिला प्रशासन की सख्ती से डरे हैं। उनका कहना है कि जिला प्रशासन ने नजूल व सीलिंग की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है। सुमेर सागर ताल की परिधि में बने आलीशान मकान तक ढहा दिए गए। अब फ्री होल्ड का मामला पूरी तरह से प्रशासन के पास जाएगा। ऐसे में प्रशासन का रवैया क्या रहेगा, यह देखने वाला होगा।