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UP Nikay Chunav 2023: सिस्टम साधने का दम हो तो बदल जाता है सिंबल भी

Thu, 20 Apr 2023 10:32 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 20 Apr 2023 10:32 AM IST
सार

पार्टी सूत्रों के मुताबिक वार्ड नंबर 61 से पूर्व महानगर अध्यक्ष शहाब अंसारी टिकट मांग रहे थे। मगर, पुरानी अदावत के चलते एक पूर्व महानगर अध्यक्ष लगातार उनके खिलाफ शीर्ष नेतृत्व में पैरवी कर रहे थे, तो एक और पूर्व महानगर अध्यक्ष उनके पक्ष में।

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From Ward No 61 two candidates each got symbol of SP and then one became independent
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Social media

विस्तार

नियम न कायदा। पहुंच और सिस्टम (व्यवस्था) को साधने का दम हो तो जिस पार्टी के टिकट की सूची में नाम न दर्ज हो सका, वहां नामांकन के आखिरी समय में नाम जुड़े बिना ही सिंबल मिल जाता है। चौकिए नहीं, समाजवादी पार्टी में ऐसा ही हुआ है।

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पार्टी के पूर्व महानगर अध्यक्ष, पार्षद के टिकट की दावेदारी कर रहे थे। मगर, पर्यवेक्षकों द्वारा लखनऊ भेजी गई टिकट की प्रस्तावित सूची से उनका नाम कट गया। टिकट की जब घोषणा हुई तो उनके वार्ड से दूसरे कार्यकर्ता को पार्टी ने टिकट दे दिया। मगर, नामांकन पत्रों की जांच वाले दिन वह निर्दल हो गया और पूर्व महानगर अध्यक्ष पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के समानांतर ताकत का इस्तेमाल कर इस खेल को रचने वालों में पार्टी के ही कुछ बड़े नेताओं के नाम आ रहे हैं। फिलहाल मामला, लखनऊ पहुंच गया है और माना जा रहा रहा है कि निकाय चुनाव के बाद इसमें कार्रवाई तय है।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक वार्ड नंबर 61 से पूर्व महानगर अध्यक्ष शहाब अंसारी टिकट मांग रहे थे। मगर, पुरानी अदावत के चलते एक पूर्व महानगर अध्यक्ष लगातार उनके खिलाफ शीर्ष नेतृत्व में पैरवी कर रहे थे, तो एक और पूर्व महानगर अध्यक्ष उनके पक्ष में। आखिरकार, पर्यवेक्षकों की तरफ से शीर्ष नेतृत्व को भेजी गई प्रत्याशियों की प्रस्तावित सूची में शहाब का नाम नहीं दर्ज हो सका।
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बावजूद इसके शहाब ने 14 अप्रैल को समाजवादी पार्टी की तरफ से पर्चा दाखिल कर दिया। हालांकि, सिंबल से जुड़ा दस्तावेज यानी फार्म ए,बी उन्होंने उस समय दाखिल नहीं किया था। इसी बीच 16 की शाम को पार्टी की तरफ से पार्षद प्रत्याशियों की सूची घोषित कर दी गई। वार्ड नंबर 61 से तारिक हसन को उम्मीदवार घोषित किया गया। पार्टी ने उन्हें सिंबल भी सौंपा, जिसके बाद उन्होंने नामांकन के आखिरी दिन पर्चा दाखिल किया। इसी दिन पूर्व महानगर अध्यक्ष शहाब अंसारी ने भी रिटर्निंग ऑफिसर के पास पार्टी सिंबल से जुड़ा फार्म ए,बी जमा किया।

 

18 अप्रैल को जब नामांकन पत्रों की जांच हुई तो तारिक हसन को निर्दल उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। प्रशासन की तरफ से दलील दी गई कि शहाब अंसारी का पर्चा पहले दाखिल हुआ था लिहाजा उन्हें ही अधिकृत प्रत्याशी माना जाएगा। तारिक ने बाद में नामांकन किया था, इसलिए उन्हें निर्दल प्रत्याशी माना जाएगा।

आरोप है कि पार्टी की तरफ से प्रत्याशियों को सिंबल से जुड़ा फार्म ए,बी उपलब्ध कराने के लिए कुछ वरिष्ठ नेताओं को 10 से 14 फार्म दिए गए थे। पूर्व महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम को भी निगम के आखिरी वार्डों के प्रत्याशियों को फार्म बांटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वार्ड नंबर 80 से पार्टी प्रत्याशी नम्रता सिंह ने सिंबल मिलने के बाद भी नामांकन ही नहीं किया। वहां से भाजपा प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय है। तारिक का आरोप है कि जियाउल ने वार्ड नंबर 80 के प्रत्याशी का ही फार्म ए-बी, पूर्व महानगर अध्यक्ष शहाब अंसारी को उपलब्ध करा दिया, जिसे दाखिल कर वह पार्टी प्रत्याशी बन गए।

पूर्व महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम ने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं। मुझे सिंबल से जुड़े 16 फार्म मिले थे। खुद के समेत मैने 12 उम्मीदवारों को यह फार्म उपलब्ध कराया और चार फार्म जिलाध्यक्ष को वापस लौटा दिया। वार्ड नंबर 80 के प्रत्याशी को जो सिंबल दिया गया है, वह उनके नाम से दिया गया। अब ऐसे में मैं, शहाब अंसारी को दूसरे का सिंबल कैसे उपलब्ध करा सकता हूं। इस तरह से पता करना है, तो यह पता किया जाए कि वार्ड नंबर 54, वार्ड नंबर पांच और वार्ड नंबर 69 से जिसे पार्टी प्रत्याशी घोषित किया गया, उन्होंने या तो नामांकन नहीं किया या फिर सिंबल का इस्तेमाल नहीं किया। ऐसे में ये सिंबल कहां गए। यदि इन्हीं में से किसी ने सिंबल इधर-उधर कर दिया हो, तो इसे भी बड़ा आधार मानने से कैसे इनकार किया जा सकता है।

 

शहाब अंसारी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी तय करेंगे किसे टिकट मिला किसे नहीं। उन्होंने ने ही मुझे टिकट दिया। वो सवाल करेंगे तो जवाब दूंगा कि कहां से टिकट मिला। उनके अलावा नीचे कोई नहीं है जो, ये सवाल करे। और, मुझे यकीन है कि वह भी सवाल नहीं करेंगे क्योंकि टिकट तो उन्होंने ही दिया।

तारिक हसन ने कहा कि मेरे लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश जी ने खुद जिलाध्यक्ष के पास फोन किया था। तब 16 की शाम को पार्टी ने मुझे उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही सिंबल भी दिया । 17 को मैनें नामांकन किया लेकिन पूर्व महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम के करीबी होने की वजह से शहाब ने उनसे दूसरे का फार्म एबी हासिल कर लिया। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान मुझे निर्दल बनाए जाने पर मैनें आरओ के सामने विरोध दर्ज कराया था। मगर, उनकी दलील थी कि शहाब ने भले ही फार्म एबी आखिरी दिन जमा किया लेकिन उन्होंने पर्चा पहले ही दाखिल कर दिया था। मैनें इसकी शिकायत जिलाध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक की है। उन्होंने मुझे उम्मीदवार बनाया है, इसलिए उनका सम्मान रखने के लिए मैं निर्दल ही चुनाव लड़ूंगा। मेरे पिता तौकीर हसन तीन बार पार्षद रह चुके हैं। जनता का मुझे पूरा समर्थन है।

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