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एनआईए का फर्जी इंस्पेक्टर गिरफ्तार, टिकट कन्फर्म कराने के लिए एजेंसी के फर्जी लेटर पैड पर किया था आवेदन

Sat, 10 Apr 2021 10:13 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 10 Apr 2021 10:13 AM IST
सार

  • गोरखधाम एक्सप्रेस में मुख्यालय कोटा से बर्थ कंफर्म कराने के लिए आया था पत्र
  • लखनऊ में बर्थ पर पहुंचने पर आरपीएफ ने हिरासत में लिया

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Fraud man arrested for applying on fake letter pad of National Investigation Agency for ticket confirmation
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ट्रेन का टिकट कन्फर्म कराने के लिए खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का इंस्पेक्टर बताकर एजेंसी का फर्जी लेटर पैड इस्तेमाल करने वाले एक व्यक्ति को चारबाग जीआरपी ने गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
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मामला गुरुवार का है। इंस्पेक्टर अंजनी कुमार सिंह के अनुसार आरोपी सौरभ कुमार शुक्ला गोरखपुर जिले के बेलीपार का निवासी है। उसने लैपटॉप पर एनआईए का फर्जी लेटर पैड तैयार कर टिकट आरक्षित कराने के लिए सीसीएम कार्यालय, गोरखपुर में आवेदन भेजा था। जीआरपी ने लैपटॉप जब्त कर लिया है।
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सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी को गोरखधाम एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जाना था। लेटर में फोन नंबर न होने व अन्य कमियों के कारण कोटा आवंटित करने वाले अधिकारी को शक हुआ तो उन्होंने एनआईए लखनऊ ब्रांच के एसपी से संपर्क साधा। एसपी ने बताया कि उनके कार्यालय से एक भी पत्र कोटा के लिए जारी नहीं किया गया है।
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विजिट पर आए थे

एनआईए का पत्र फर्जी पुष्ट होने के बाद कोटा आवंटन अफसर ने जालसाज को पकड़ने के लिए गोरखधाम एक्सप्रेस के कोच नंबर एस-3 में 46 नंबर बर्थ आवंटित कर दिया। इसकी सूचना लखनऊ कंट्रोल और जीआरपी को दे दी। लखनऊ में ट्रेन में सवार होने के बाद जीआरपी ने सौरभ शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया।

एनआईए के फर्जी पत्र पर सीसीएम को लिखे आवेदन में कहा गया था कि एनआईए इंस्पेक्टर दिल्ली से गोरखपुर विजिट पर गए थे। उन्हें आठ अप्रैल को दिल्ली लौटना है। उनका आरक्षण गोरखधाम के स्लीपर में है, ऐसे में उनका बर्थ कन्फर्म कराने का कष्ट करें।

स्लीपर बर्थ बनी शक की वजह  
स्लीपर बर्थ शक की असली वजह बनी क्योंकि अगर यात्री इंस्पेक्टर है तो उसे स्लीपर नहीं बल्कि एसी का टिकट मिलेगा। दूसरा पूरे आवेदन पत्र में न तो यात्री का मोबाइल नंबर था और न ही कार्यालय का कोई नंबर लिखा था। इन्हीं आधार पर कोटा आवंटन अधिकारी को शक हुआ।

एनईआर सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि 8 अप्रैल 2021 को आपातकालीन कोटा के लिए एक फर्जी लेटर पैड पर आवेदन प्राप्त हुआ। जिस पर कोटा जारी करने वाले अधिकारी को संदेह हुआ। उन्होंने संबंधित कार्यालय को संपर्क कर पता किया तो आवेदक के फर्जी होने की पुष्टि की गई। संबंधित विभाग से सामंजस्य स्थापित करने के बाद उस व्यक्ति को ट्रैप करने के लिए कोटा आवंटित किया गया, जिसके पश्चात उसे पकड़ लिया गया।
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