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गोरखपुर: उड़नदस्ते करेंगे पराली जलाने वालों की निगरानी, डीएम ने जारी किया निर्देश

Wed, 12 Oct 2022 03:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 12 Oct 2022 03:13 PM IST
सार

डीएम ने बताया कि शासन के निर्देश पर फसल अवशेष व पराली को जलाए जाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रत्येक विकास खंड व तहसील स्तर पर उड़न दस्तों का गठन किया गया है। इसमें तहसील स्तरीय सचल दस्ता में तहसीलदार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी, थानाध्यक्ष (संबंधित तहसील मुख्यालय) को नामित किया गया है तथा पर्यवेक्षीय अधिकारी उप जिलाधिकारी होंगे।

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Flying squads will monitor those who burn stubble in gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

पराली या फसलों के अवशेष जलाने वालों पर निगरानी के लिए डीएम कृष्णा करूणेश ने उड़न दस्तों का गठन किया है। ऐसे किसानों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा। साथ ही क्षतिपूर्ति की वसूली किसानों से की जाएगी।

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डीएम ने बताया कि शासन के निर्देश पर फसल अवशेष व पराली को जलाए जाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रत्येक विकास खंड व तहसील स्तर पर उड़न दस्तों का गठन किया गया है। इसमें तहसील स्तरीय सचल दस्ता में तहसीलदार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी, थानाध्यक्ष (संबंधित तहसील मुख्यालय) को नामित किया गया है तथा पर्यवेक्षीय अधिकारी उप जिलाधिकारी होंगे। इसी प्रकार विकास खंड स्तरीय सचल दस्ता में नायब तहसीलदार, कानूनगो, सहायक विकास अधिकारी कृषि, थानाध्यक्ष को नामित किया गया है तथा पर्यवेक्षीय अधिकारी खंड विकास अधिकारी होंगे।
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डीएम ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक तहसील एवं विकास खंड के समस्त लेखपाल कृषि विभाग के क्षेत्रीय कार्मिक एवं ग्राम प्रधानों को शामिल करते हुए एक वाट्सएप ग्रुप बनाया जाए तथा उस क्षेत्र में कहीं भी फसल अवशेष जलाए जाने की घटना होने पर या घटना की सूचना मिलने पर संबंधित लेखपाल, ग्राम प्रधान वाट्सएप ग्रुप एवं दूरभाष के माध्यम से संबंधित तहसील, विकास खंड स्तर पर गठित उड़न दस्ते को तत्काल रूप से सूचना दी जाए। किसी भी क्षेत्र में कृषि अवशेष जलाने की घटना प्रकाश में आने पर संबंधित लेखपाल जिम्मेदार होंगे।
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कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम का प्रयोग अनिवार्य

डीएम ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि फसल कटाई के दौरान प्रयोग की जाने वाली कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर, स्ट्ररेक, पैडी स्ट्राचापर, स्ट्रारीपर, रिवर्सिबल एमबी प्लाऊ, बेलर, मल्चर, रोस्टरी स्लेशर या सुपर सीडर का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाए। ऐसा न करने पर संबंधित कंबाइन हार्वेस्टर को जब्त कर लिया जाए तथा कंबाइन स्वामी के व्यय पर ही सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगवाने के उपरांत ही छोड़ी जाए।

जिला कृषि कार्यालय से एक सप्ताह में लें अनापत्ति प्रमाणपत्र
डीएम ने सभी कंबाइन हार्वेस्टर स्वामियों को निर्देशित किया है कि एक सप्ताह के अंदर अपने तहसील के उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी कार्यालय या जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में उपस्थित होकर अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर लें कि आपने अपनी कंबाइन हार्वेस्टर में उपरोक्तानुसार अपेक्षित अटैचमेंट लगवा लिया है। बिना अनापत्ति प्रमाणपत्र कंबाइन चलाने पर उसे सीज करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

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