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Flood: गोरखपुर जिले के 46 गांवों तक पहुंचा बाढ़ का पानी, चलाई जा रहीं 40 नावें

Fri, 23 Sep 2022 04:39 PM IST
vivek shukla विवेक शुक्ला, गोरखपुर।
विवेक शुक्ला, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 23 Sep 2022 04:39 PM IST
सार

आपदा कार्यालय से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, घाघरा नदी का जलस्तर अयोध्या में कम हुआ, लेकिन देवरिया के बरहज में यह नदी खतरे के निशान से 1.35 मीटर ऊपर बह रही है। राप्ती नदी का जलस्तर अब घट रहा है। यह नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर नीचे बह रही है।

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Flood water reached 46 villages of Gorakhpur district
गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

राप्ती और घाघरा नदी का पानी अब जिले के 46 गांवों तक पहुंच गया है। इन गांवों में नावें लगाई गई हैं। फसलें डूब चुकी हैं। ग्रामीणों ने आसपास के बंधों पर सहारा लिया है। हालांकि, नदियों का जलस्तर तेजी से नहीं बढ़ रहा है। इस वजह से राहत की उम्मीद जताई जा रही है। गोर्रा नदी का जलस्तर भी स्थिर है।

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बारिश थमने के बाद नदियों का जलस्तर भले नीचे आना शुरू हो गया है, लेकिन अब भी 46 गांव पानी में घिरे हुए हैं। उन गांवों के लोगों की सुविधा के लिए प्रशासन की तरफ से 40 नावों को लगाया गया है। इसके अलावा प्रशासनिक अमला लगातार मॉनीटरिंग कर रहा है।
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आपदा कार्यालय से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, घाघरा नदी का जलस्तर अयोध्या में कम हुआ, लेकिन देवरिया के बरहज में यह नदी खतरे के निशान से 1.35 मीटर ऊपर बह रही है। राप्ती नदी का जलस्तर अब घट रहा है। यह नदी खतरे के निशान से 49 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। रोहिन नदी भी खतरे के निशान से 46 सेमी नीचे आ गई है। गोर्रा नदी का जलस्तर स्थिर है।
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तरकुलानी रेगुलेटर से निकाला जा रहा पानी

Flood water reached 46 villages of Gorakhpur district
गोरखपुर राप्ती नदी में तेजी से बढ़ रहा पानी। - फोटो : अमर उजाला।

अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह के मुताबिक, बारिश के दौरान तरकुलानी रेगुलेटर भी पूरी क्षमता से चल रहा है। एक बार में 150 क्यूसेक पानी निकाला गया। शहर के गोड़धोइया व अन्य नालों का पानी तरकुलानी क्षेत्र में आता है, जिसे रेगुलेटर के माध्यम से राप्ती नदी में ले जाया जाता है। इस कारण खोराबार, उससे सटे शहरी और तरकुलानी क्षेत्र  में जलभराव नहीं होता है।

नदियों का पानी उतरने लगा है। कुछ स्थानों पर जलस्तर स्थिर है। शुक्रवार तक जलस्तर नीचे आना शुरू हो जाएगा। जिन गांवों में पानी पहुंचा है, वह जिले का निचला इलाका माना जाता है। तटबंधों की सतत निगरानी की जा रही है। कहीं कोई खतरे की बात नही है।
- दिनेश सिंह, अधीक्षण अभियंता सिंचाई विभाग

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