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गोरखपुर: रेडीमेड गारमेंट के लिए गीडा में बनाई जाएगी फ्लैटेड फैक्ट्री, उद्यमियों को होगी सहूलियत
Wed, 03 Mar 2021 01:35 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 03 Mar 2021 01:35 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में रेडीमेड गारमेंट उद्यमियों के लिए फ्लैटेड फैक्ट्री का निर्माण किया जाएगा। इसके निर्माण को लेकर गीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ने सहमति जता दी है। फैक्ट्री के लिए जमीन की तलाश भी शुरू कर दी गई है। दो से चार एकड़ जमीन में इन फ्लैटेड फैक्ट्रियों के निर्माण की संभावना है।
गीडा स्थित उद्योग भवन में उद्यमियों के साथ पहली बैठक में गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने इस संबंध में जानकारी दी। बताया कि फ्लैटेड फैक्ट्री के निर्माण के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जल्द ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा। दरअसल चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज की ओर से रेडीमेड गारमेंट को लेकर फ्लैटेड फैक्ट्री की मांग रखी गई थी। उद्यमियों का कहना था कि इंडस्ट्रियल एरिया और गीडा में अगल-अलग फ्लैटेड फैक्ट्री स्थापित होने से उद्यमियों को सहूलियत होगी।
बैठक में उद्यमियों ने भूखंड आवंटन के दो साल तक उद्योग नहीं लगाने पर विस्तारीकरण शुल्क देने के प्रावधान का मसला भी उठाया। कहा कि कोविड में इसे लेकर छह महीने की छूट दी गई है, लेकिन गीडा में इसे लागू नहीं किया गया है। इसे जल्द लागू किया जाए। उद्यमियों ने कहा कि विस्तारीकरण शुल्क एक साल का लिया जा रहा है। अन्य विभाग यह शुल्क तीन महीने का ले रहे हैं। चेंबर की तरफ से रखरखाव शुल्क भी एक महीने के लिए टालने का अनुरोध किया गया। उद्यमियों ने ऑनलाइन नोटिस की भी मांग रखी। जिसपर सीईओ ने अमल करने का आश्वासन दिया।
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गीडा स्थित उद्योग भवन में उद्यमियों के साथ पहली बैठक में गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने इस संबंध में जानकारी दी। बताया कि फ्लैटेड फैक्ट्री के निर्माण के लिए जमीन तलाशी जा रही है। जल्द ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा। दरअसल चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज की ओर से रेडीमेड गारमेंट को लेकर फ्लैटेड फैक्ट्री की मांग रखी गई थी। उद्यमियों का कहना था कि इंडस्ट्रियल एरिया और गीडा में अगल-अलग फ्लैटेड फैक्ट्री स्थापित होने से उद्यमियों को सहूलियत होगी।
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बैठक में उद्यमियों ने भूखंड आवंटन के दो साल तक उद्योग नहीं लगाने पर विस्तारीकरण शुल्क देने के प्रावधान का मसला भी उठाया। कहा कि कोविड में इसे लेकर छह महीने की छूट दी गई है, लेकिन गीडा में इसे लागू नहीं किया गया है। इसे जल्द लागू किया जाए। उद्यमियों ने कहा कि विस्तारीकरण शुल्क एक साल का लिया जा रहा है। अन्य विभाग यह शुल्क तीन महीने का ले रहे हैं। चेंबर की तरफ से रखरखाव शुल्क भी एक महीने के लिए टालने का अनुरोध किया गया। उद्यमियों ने ऑनलाइन नोटिस की भी मांग रखी। जिसपर सीईओ ने अमल करने का आश्वासन दिया।
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मानचित्र का मामला उठा
बैठक में औद्योगिक इकाइयों के मानचित्र स्वीकृति न रोकने की मांग की गई। महासचिव प्रवीण मोदी ने कहा कि अगर किसी भूखंड की किस्त समय से नहीं जमा है तो संपत्ति विभाग से एनओसी न मिलने के कारण मानचित्र स्वीकृत नहीं हो पा रहा है। जबकि, समय से किस्त न जमा करने पर गीडा ब्याज भी वसूलता है। 2014 में जिन उद्यमियों के लिए औद्योगिक भूखंड आवंटित हुआ है। जिन्होंने उद्योग स्थापित नहीं किया उनका 31 मार्च तक भूखंड निरस्त होना है, ऐसे उद्यमियों को और समय दिया जाये। एआरपी फैक्ट्री के निदेशक आजम खां ने नौसड़ से तेनुआ टोल प्लाजा के फोरलेन तक जाने वाली सड़क की मरम्मत की मांग की। इसके साथ ही बिल्डिंग बायलॉज एफएआर बढ़ाने की भी मांग की गई। उद्यमी दाताराम ने 68 भूखंड के आवंटन को अनुचित बताया। बैठक में उद्यमी आरएन सिंह, नवीन अग्रवाल, विनय अग्रवाल, आकाश जालान, धीरज मस्करा, रमाशंकर शुक्ल, सनूप साहू, प्रवीण मोदी, सुमित कक्कड़, एवं गीडा के ओएसडी आरएस यादव, वरिष्ठ प्रबंधक सिविल एससी मिश्रा, प्रबंधक चेतराम सिंह, रामेंद्र कुशवाहा आदि मौजूद थे।