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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Fishes of Ramgarhtal not coming contract period extended

Gorakhpur News: रास नहीं आ रहीं रामगढ़ताल की मछलियां, ठेके की अवधि बढ़ी

Fri, 23 Dec 2022 12:30 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 23 Dec 2022 12:30 PM IST
सार

जीडीए दो बार टेंडर निकाला लेकिन उसे निरस्त करना पड़ा। तीसरी बार 21 नवंबर को ई-निविदा निकाली गई और 20 दिसंबर तक आवेदन की आखिरी तिथि थी। 22 को नीलामी होनी थी लेकिन कोई आवेदन ही नहीं आया। अब प्राधिकरण ने फिर अवधि बढ़ा दी है।

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Fishes of Ramgarhtal not coming contract period extended
रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रामगढ़ताल में मछली पालन और उसका शिकार गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के लिए घाटे का सौदा तो बना ही है, ठेके के लिए कोई समिति भी आगे नहीं आ रही। करीब साल भर के भीतर दो टेंडर निरस्त हो गए । तीसरी बार टेंडर निकला तो कोई आवेदन करने ही नहीं आया। एक महीने का समय बीत जाने पर भी कोई ई- निविदा नहीं आने पर जीडीए ने अब आवेदन का समय 31 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दिया है। चार जनवरी को नीलामी होगी।

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करीब चार साल पहले एक अप्रैल 2019 में 22.79 करोड़ रुपये में पांच साल के लिए रामगढ़ताल में  मछली पकड़ने का ठेका फाइनल हुआ था। इतनी मोटी रकम की बोली लगने पर प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारी बहुत उत्साहित थे। वर्ष 2019 के पहले यही ठेका 2.60 करोड़ रुपये में हुआ था।
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मगर अधिकारियों का 20 करोड़ रुपये के मुनाफे का सपना तीन साल में ही टूट गया।  ठेका पाने वाली मत्स्यजीवी समिति तीन साल में ठेके की पूरी रकम अदा करने की शर्त के विपरीत  केवल 5.19 करोड़ रुपए ही जमा करने में हांफ गई ।
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 बार-बार की चेतावनी के बाद भी समिति ने रुपये नहीं जमा किए तो प्राधिकरण ने पिछले साल सितंबर 2021 में मछली मारने पर रोक लगाने के साथ ही टेंडर निरस्त कर दिया। अनुबंध के तहत ठेका पाने वाली मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ उर्फ महेरवा की बारी, कूड़ाघाट को 28 जून 2024 तक मछली पकड़ने का अधिकार मिला था।

अनुबंध में प्राधिकरण ने समय-समय पर एक निश्चित राशि भी जमा करने की शर्त लगाई थी। पहले और दूसरे साल 40-40 फीसदी और तीसरे साल बाकी बची 20 फीसदी रकम जमा करनी थी। यानी समिति को तीन साल में पूरी रकम 22.79 करोड़ रुपये जमा करनी थी जो कि वह जमा नहीं कर सकी।

इसके बाद जीडीए दो बार टेंडर निकाला लेकिन उसे निरस्त करना पड़ा। तीसरी बार 21 नवंबर को ई-निविदा निकाली गई और 20 दिसंबर तक आवेदन की आखिरी तिथि थी। 22 को नीलामी होनी थी लेकिन कोई आवेदन ही नहीं आया।


अब प्राधिकरण ने फिर अवधि बढ़ा दी है। प्राधिकरण के जिम्मेदारों का कहना है कि जन सामान्य के अनुरोध पर आवेदन का समय बढ़ाया गया है।  इस बार निलामी की न्यूनतम बोली करीब 11 करोड़ से शुरू होने की शर्त रखी गई हैं। मछली मारने वाली समितियां इस रकम को भी अधिक मान रही हैं।

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