Gorakhpur: तय समय बीतने के बाद भी लेबोरेट ने नहीं दिया नशीली दवाओं का रिकॉर्ड
लेबोरेट फार्मास्युटिकल मनीष केडिया ने कहा कि कंपनी से कागजात मांगे गए हैं। शुक्रवार तक सभी कागजात मिल जाएंगे, फिर ड्रग विभाग की टीम को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जिस दिन कागजात मांगे गए थे, उसी दिन कंपनी को ईमेल से सूचना भेज दी गई थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
ड्रग विभाग को लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल ने समय सीमा बीत जाने के बाद भी नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया है। मंगलवार को लेबोरेट को कागजात उपलब्ध कराने थे। लेकिन, अब तक एक भी कागज विभाग को नहीं मिला है। इस पर ड्रग विभाग ने दूसरी बार रिमाइंड भेजने का फैसला लिया। इसके लिए दो से तीन दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद अगर कागजात नहीं दिखाते हैं, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दो करोड़ रुपये की नशीली दवाओं की बरामदगी के बाद ड्रग विभाग की टीम भालोटिया मार्केट में लगातार छापा मार रही है। इस मामले में छह लोगों की गिरफ्तार हो चुकी है। जबकि, दवा व्यापारी सगे भाई आशीष गुप्ता और अमित गुप्ता फरार चल रहे हैं। इसके बाद से टीम लगातार आठ दुकानों से नारकोटिक्स की 16 दवाओं के नमूने ले चुकी है।
शनिवार को कफ सिरप एस कॉफ के सीएंडएफ लेबोरेट फार्मास्युटिकल के यहां छापा मारा गया था। इसके मालिक मनीष केडिया हैं। यहां से छह तरह की नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री की जाती है। मौके पर फर्म खरीद-बिक्री संबंधी कोई कागजात नहीं दिखा सकी। इसके लिए विभाग ने तीन दिन का समय भी दिया था, जो पूरा हो चुका है। वहीं, मैनकाइंड के सीएंडएफ ने 10 मिनट के अंदर ही तीन साल के रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिए थे। यह कंपनी भी नारकोक्टिस की दवाएं बनाती है।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की जानकारी न्यायालय को दी
ड्रग विभाग की टीम ने लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल के यहां छापा मारने के दौरान प्रसव पीड़ा में इस्तेमाल की जाने वाली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को बरामद किया था। यह इंजेक्शन दो से आठ डिग्री सेल्सियस में रखा जाना चाहिए था, लेकिन टीम को फर्श पर मिला था। इस पर टीम ने 5.91 लाख रुपये के इंजेक्शन जब्त कर लिए थे। इसकी सूचना टीम ने बुधवार को न्यायालय में दी है।
रिकॉर्ड देने में देरी खड़े कर रहे कई सवाल
जिस तरह मैनकाइंड ने 10 मिनट के अंदर तीन साल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिया। उसी तरह किसी अन्य दवा व्यापारी ने अब तक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया है। जबकि, सभी व्यापारियों के यहां कंप्यूटर लगे हुए हैं। व्यापारी चाहें तो एक क्लिक पर रिकॉर्ड उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल की तरफ से चार दिन बीत जाने के बाद भी रिकॉर्ड उपलब्ध न कराना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूचना न देने पर की जाएगी कानूनी कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि लेबोरेट फॉर्मास्युटिकल ने समय बीत जाने के बाद भी खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड नहीं दिया है। इसके लिए उन्हें फिर से रिमाइंडर भेजा जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई कागजात नहीं मिलते हैं तो ड्रग एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
लेबोरेट फार्मास्युटिकल मनीष केडिया ने कहा कि कंपनी से कागजात मांगे गए हैं। शुक्रवार तक सभी कागजात मिल जाएंगे, फिर ड्रग विभाग की टीम को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जिस दिन कागजात मांगे गए थे, उसी दिन कंपनी को ईमेल से सूचना भेज दी गई थी।