Gorakhpur: गोरखपुर में चोरी की आठ बाइक, दो कार के साथ तीन गिरफ्तार
गिरोह के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आरटीओ के बाबुओं की मदद से नया आरसी जारी कैसे हो जाता था। क्योंकि चोरी का केस दर्ज होने पर पुलिस की ओर से आरटीओ दफ्तर को वाहन का पूरा डिटेल भेजा जाता है, ताकि वहां पर चोरी की जानकारी हो।
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गोरखपुर जिले के गुलरिहा पुलिस ने चोरी की आठ बाइक व दो कार के साथ तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया। गिरोह के लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कर आरटीओ की मिलीभगत से चोरी की बाइक को बेचकर नई आरसी भी बनवा लेते थे। अब मामला पकड़े जाने के बाद पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों और आरटीओ के बाबुओं की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजवा दिया।
आरोपियों की पहचान महराजगंज के निचलौल के बढ़ईपुरवा निवासी मोहम्मद इमरान, कुशीनगर के कप्तानगंज के मंसूरगंज निवासी अरविंद पांडेय और निचलौल के अफजल के रूप में हुई है। एसपी नार्थ मनोज कुमार अवस्थी ने पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर पकड़े गए बदमाशों के बारे में जानकारी दी।
बताया कि निचलौल का इमरान ही गिरोह का सरगना है। इसका महराजगंज में कार का वर्कशॉप भी है। ये सस्ते दामों पर चोरी की बाइक, कार खरीदता था, फिर आरटीओ से पता करता था कि असल मालिक कौन है। उसके नाम से फर्जी पहचान पत्र बनवा लेते थे और आरटीओ के बाबुओं की मिलीभगत से वाहनों को बेच दिया करता था।
पूछताछ में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिसकी तलाश में पुलिस टीम लगाई गई है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में इंस्पेक्टर गुलरिहा उमेश कुमार वाजपेयी, स्वाट टीम प्रभारी प्रदीप शर्मा, दरोगा अमित राय, ज्योति नारायण तिवारी सहित 13 पुलिसकर्मी शामिल थे।
नेपाल में भी बेचते थे वाहन
चोरी के वाहन का नया आरसी बनवाकर ये लोग आसपास के जिलों के अलावा नेपाल में भी बेच दिया करते थे। नेपाल में वाहन बेचने में आसानी होती थी। कीमत ज्यादा मिलने के साथ ही जांच पड़ताल में पकड़े जाने का भी डर नहीं रहता था। पुलिस पूछताछ के आधार पर जांच कर रही है कि कितने वाहनों को इन लोगों ने अब तक बेचा है।
वाहनों का चेसिस नंबर बदल देते थे
गिरोह के सदस्य गाड़ी पकड़ी न जाए, इसके लिए चेसिस नंबर मिटा देते थे। साथ ही नंबर प्लेट को भी बदल देते थे। इससे ये पकड़े नहीं जाते थे।
नया आरसी कैसे जारी होता था, जांच में जुटी पुलिस
गिरोह के पकड़े जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आरटीओ के बाबुओं की मदद से नया आरसी जारी कैसे हो जाता था। क्योंकि चोरी का केस दर्ज होने पर पुलिस की ओर से आरटीओ दफ्तर को वाहन का पूरा डिटेल भेजा जाता है, ताकि वहां पर चोरी की जानकारी हो। इसके बावजूद इसमें सेंधमारी हुई है। पुलिस मामले की तह तक जाने की जांच शुरू कर दी है।