Exclusive: गीडा में स्थापित होगी खाद्य तेल की फैक्ट्री, किसानों को भी होगा फायदा
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की अधिसूचना के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और मान में संशोधन करते हुए सरसों तेल को बिना किसी सम्मिश्रण के बेचना बाध्यकारी कर दिया गया है। पहले सरसों के तेल में चावल की भूसी यानी राइस ब्रान तेल, पाम तेल या अन्य किसी सस्ते खाद्य तेल की मिलावट होती थी। अब ऐसा नहीं होगा।
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अगले साल तक गीडा में एडिबल ऑयल (खाद्य तेल) का भी उत्पादन होने लगेगा। राजयश एग्रो वेदिक एंड हेल्थ केयर के एमडी अतुल सिंह गीडा में खाद्य तेल की एक फैक्ट्री लगाने जा रहे हैं। इस फैक्ट्री में सरसों, मूंगफली और तिल के तेल का उत्पादन होगा। पूरी संभावना है कि अगले साल से इस फैक्ट्री में इन खाद्य तेलों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इस फैक्ट्री के बन जाने से किसानों समेत प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 250 लोगों को रोजगार मिलेगा।
गीडा के सेक्टर 15 में स्थापित होने वाली इस फैक्ट्री की क्षमता करीब चार टन प्रति दिन की होगी। यानी कि रोजाना इस फैक्ट्री को करीब चार टन कच्चे माल (सरसों, मूंगफली और मिल) की जरूरत पड़ेगी। फिलहाल इस जरूरत को पूरा करने के लिए राजस्थान और मध्यप्रदेश से आयात कर पूरा किया जाएगा। आने वाले समय में इसकी पूर्ति यहां के किसानों से उत्पादन कराकर की जाएगी। प्रत्यक्ष तौर पर इस कंपनी में 20 लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं सरसों, मूंगफली और तिल का उत्पादन करने वाले 225 से ज्यादा किसान लाभान्वित होंगे।
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कंपनी किसानों से करेगी करार
अतुल सिंह ने बताया कि फैक्ट्री में रोजाना चार टन सरसों, मूंगफली और तिल की आवश्यकता पड़ेेगी। ऐसे में फैक्ट्री देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के किसानों के साथ उनके उत्पादन के लिए करार करेगी। इसके तहत किसान अपनी खेतों में नकदी फसल के रूप में सरसों, मूंगफली और तिल का उत्पादन करेंगे। फैक्ट्री किसानों की पूरी फसल खरीद लेगी।
बिना मिक्सिंग के तैयार होगा सरसों तेल
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की अधिसूचना के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और मान में संशोधन करते हुए सरसों तेल को बिना किसी सम्मिश्रण के बेचना बाध्यकारी कर दिया गया है। पहले सरसों के तेल में चावल की भूसी यानी राइस ब्रान तेल, पाम तेल या अन्य किसी सस्ते खाद्य तेल की मिलावट होती थी। अब ऐसा नहीं होगा। वहीं लोगों को शुद्ध सरसों का तेल मेड इन गोरखपुर से ही प्राप्त हो जाएगा।
नए साल में फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हो जाएगा। खाद्य तेल के रूप सरसों, मूंगफली और तिल के तेल का उत्पादन किया जाएगा। चार करोड़ लागत की इस कंपनी की क्षमता करीब चार टन प्रतिदिन की होगी। प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से किसानों समेत 250 लोगों को रोजगार मिलेगा। - अतुल सिंह, एमडी, राजयश एग्रोवेदिक एंड हेल्थ केयर