Gorakhpur News: दो साल से मशीन खराब, दिल के मरीजों की इको जांच पर ग्रहण
जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में चार साल पहले मरीजों की सुविधा के लिए ईको मशीन लगाई गई थी। दो साल तक यह मरीजों की जांच करती रही, इसके बाद यह खराब हो गई। इंजीनियर ने इसे बनाने से इन्कार करते हुए नई मशीन के लिए प्रस्ताव दिया।
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जिला अस्पताल में दो वर्ष पहले कंडम हो चुकी ईको मशीन अब तक बदली नहीं जा सकी है। मशीन खराब होने के कारण हृदय के मरीजों की ईको जांच पर दो साल से ग्रहण लग गया है। मजबूरी में हर दिन 10 से 12 मरीज निजी पैथालॉजी पर रुपये खर्च करके जांच करा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल के हृदय रोग विभाग में चार साल पहले मरीजों की सुविधा के लिए ईको मशीन लगाई गई थी। दो साल तक यह मरीजों की जांच करती रही, इसके बाद यह खराब हो गई। इंजीनियर ने इसे बनाने से इन्कार करते हुए नई मशीन के लिए प्रस्ताव दिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने मशीन को कंडम घोषित कर दिया।
कंडम घोषित करने के बाद तीन बार शासन को नई मशीन खरीदने के लिए पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक शासन की तरफ से कोई भी निर्देश नहीं मिला है। इसके बाद से अस्पताल प्रशासन भी चुप्पी साधकर मरीजों को आर्थिक और शारीरिक दोनों दर्द दे रहा है। जबकि, हर दिन ईको जांच के लिए मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
सबसे ज्यादा दिक्कत आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को है। जांच के साथ उन्हें हृदय रोग की दवाएं भी बाहर से ही खरीदनी पड़ रही हैं। क्योंकि, हृदय रोग विभाग की दवाएं काफी महंगी हैं, जो जिला अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं।
300 की जगह खर्च करने पड़े 1,200 रुपये
जिला अस्पताल में ईको जांच 300 रुपये में की जाती थी। लेकिन, मशीन के खराब होने के बाद से अब मरीजों को बाहर इसी जांच के 1,200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार को इलाज के लिए 10 नंबर बोरिंग से आए सुधीर कुमार को डॉक्टर ने ईको जांच की सलाह दी। जांच के लिए बेतियाहाता स्थित एक निजी केंद्र पर गए, जहां पर उन्हें 1,200 रुपये खर्च करने पड़े। इतना ही नहीं कुछ केंद्रों पर ईको जांच के लिए 1,500 रुपये तक भी ले लिए जा रहे हैं।
80 लाख से एक करोड़ के बीच आएगी मशीन
नई ईको मशीन 80 लाख से एक करोड़ के बीच आएगी। इतनी रकम अस्पताल प्रशासन खुद से खर्च नहीं कर पा रहा है। जेम पोर्टल पर अस्पताल प्रशासन केवल पांच लाख रुपये तक के ही उपकरण खरीद सकता है। बताया जा रहा है कि नए मशीन के लिए जो प्रस्ताव भेजा गया है, उसमें अच्छी कंपनी की मशीन का जिक्र भी है।
ठंड में बढ़ जाते हैं हृदय रोगी
जिला अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ रोहित गुप्ता ने बताया कि ठंड शुरू होते ही हृदय रोगियों की संख्या बढ़ गई है। हर दिन ओपीडी में 100 से 110 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें कई मरीजों को हार्ट अटैक के लक्षण भी मिले हैं। इनमें 10 से 12 मरीजों को ईको जांच की सलाह दी जा रही है। लेकिन, मशीन खराब होने की वजह से मरीज मजबूरी में बाहर से जांच करवा रहे हैं।
क्या है ईको जांच
डॉ रोहित गुप्ता ने बताया कि इको जांच के जरिए यह देखा जाता है कि मरीज का हृदय कितना काम कर रहा है। हृदय में जाने वाली कोशिकाओं में रक्त के संचार की क्या स्थिति है। इसी के जरिए मरीजों के हृदय की सही जानकारी मिलती है। ज्यादा दिक्कत होने पर एंजियोग्रॉफी भी कराई जाती है।
जिला अस्पताल एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर ने कहा कि ईको मशीन काफी दिनों से खराब है। इस मशीन को कंडम घोषित किया जा चुका है। नई मशीन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही शासन से अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद से मरीजों की ईको जांच हो सकेगी।