गोरखपुर: एक साल में 1254 मानचित्र पास कर कमाए 60 करोड़, रोज की प्रगति की समीक्षा कर रहे जीडीए उपाध्यक्ष
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि प्राधिकरण के लिए लोगों को कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन नक्शा दाखिल होने के बाद अधिकतम एक सप्ताह में निस्तारित कर दिया जा रहा है। एक साल में 1254 मानचित्र स्वीकृत हुए हैं। इनसे 60 करोड़ से अधिक की आय हुई है।
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मानचित्र स्वीकृत करने की बिगड़ी व्यवस्था सुधरने से जहां आवासीय व व्यावसायिक निर्माण कराना आसान हुआ है वहीं, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को भी इससे मोटी कमाई हो रही है। एक साल में प्राधिकरण ने 1254 मानचित्र पास किए हैं, जिससे 60 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई है।
इनमें एक हजार सात मानचित्र ऑनलाइन स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 42 करोड़ रुपये की कमाई हुई हैं। इसी तरह ऑफलाइन तरीके से 247 मानचित्र स्वीकृत हुए जिससे 18 करोड़ रुपये मिले हैं।
जीडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक आवासीय मानचित्र स्वीकृत करने के लिए एक महीने और व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत करने के लिए सात और 15 दिन का समय तय है। कोशिश की जा रही है कि हाई रिस्क जोन में नहीं आने वाले सभी मानचित्र आवेदन के तीन से चार दिन के भीतर स्वीकृत कर दिए जाएं ताकि लोगों को दौड़ना न पड़े। मानचित्र को लेकर संवेदनशील जीडीए उपाध्यक्ष कार्यभार संभालने के बाद रोज इसके आवेदनों की समीक्षा कर रहे हैं। जो मानचित्र अस्वीकृत हो रहे हैं, उनके आवेदकों को बुलाकर खामियां दूर कराकर उन्हें भी स्वीकृत किया जा रहा है।
मानचित्र स्वीकृत, रुपये ही नहीं जमा कर रहे आवेदक
मानचित्र स्वीकृत करने की प्रक्रिया में आया बदलाव इससे भी महसूस किया जा सकता है कि जीडीए ने 137 मानचित्र स्वीकृत कर दिए मगर आवेदक फीस ही नहीं जमा कर रहे। सभी को फोन कर बार-बार रिमाइंडर दिया जा रहा है। जीडीए के मुताबिक यदि इन आवेदकों ने रुपये जमा कर दिए तो जीडीए को इससे भी मोटी आय होगी।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि प्राधिकरण के लिए लोगों को कार्यालय आने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन नक्शा दाखिल होने के बाद अधिकतम एक सप्ताह में निस्तारित कर दिया जा रहा है। एक साल में 1254 मानचित्र स्वीकृत हुए हैं। इनसे 60 करोड़ से अधिक की आय हुई है। इस धनराशि का उपयोग शहर के विकास में किया जा रहा है। यदि किसी को भी मानचित्र से जुड़ी समस्या हो तो वह सीधे मुझसे आकर मिल सकता है।