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UP News: गोरखपुर में एक-एक डॉक्टरों ने आठ से 10 अस्पतालों का करा रखा है रजिस्ट्रेशन, जांच में जुटा विभाग

Fri, 13 Jan 2023 04:20 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 13 Jan 2023 04:20 PM IST
सार

सीएमओ ऐसे डॉक्टरों की लिस्ट तैयार करवा रहे हैं। साथ ही इन अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए पांच टीमें अस्पतालों की जांच में जुटी हैं।

 

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Each doctor in Gorakhpur has registered eight to 10 hospitals
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सत्यम हॉस्पिटल में गर्भवती की हुई मौत के बाद जिले भर के नर्सिंग होम, अस्पताल, पैथालॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच शुरू हो गई है। शुरुआती जांच में सीएमओ को जानकारी मिली है कि एक-एक डॉक्टरों ने आठ से 10 अस्पतालों, नर्सिंग होमों, पैथालॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर अपनी डिग्री दे रखी है। सीएमओ ऐसे डॉक्टरों की लिस्ट तैयार करवा रहे हैं। साथ ही इन अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए पांच टीमें अस्पतालों की जांच में जुटी हैं।

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जानकारी के मुताबिक, जिले में 837 अस्पताल, नर्सिंग होम, पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटर और क्लीनिक पंजीकृत हैं। इनमें 30 से 40 फीसदी अस्पताल ऐसे हैं, जिनके नाम पर अस्पताल पंजीकृत तो हैं, लेकिन यह लोग अस्पतालों में बैठते नहीं।
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इसका खुलासा सीएमओ के शुरुआती जांच में हुआ है। इसके लिए सीएमओ ने पांच टीमें बनाई हैं, जो अस्पतालों की जांच शुरू कर दी है। 10 से 12 दिनों के अंदर टीमें पूरी रिपोर्ट सौंप देंगी। ऐसे अस्पताल सबसे अधिक तारामंडल, गुलरिहा और ग्रामीण क्षेत्र के इलाकों में हैं।
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इस खेल में स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मियों भी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। क्योंकि, बिना विभाग की शह पर यह खेल संभव नहीं है। पंजीकरण से पहले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अस्पतालों और नर्सिंग होम का निरीक्षण करने के साथ डिग्री की भी जांच करते हैं।

यह देखते हैं कि कहीं डॉक्टर ने किसी और अस्पताल को तो डिग्री नहीं दे रखी है। लेकिन, जांच के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों ने इसका पालन नहीं किया। आंख मूंदकर पंजीकरण का खेल खेलते रहे। इस काम में विभाग के दो कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध दिखी है।  

 

बाहर रहकर कर रहे पढ़ाई, वसूल रहे संचालकों से रुपये

अस्पताल, नर्सिंग होम पंजीकरण के दौरान सभी डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग को शपथ पत्र भी सौंपे हैं, जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि पंजीकरण के बाद वह अस्पताल में मरीजों की जांच करेंगे। लेकिन, 30 से 40 फीसदी डॉक्टर ऐसा बिल्कुल नहीं कर रहे हैं। कोई दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, बेंगलूरु रहकर पीजी की पढ़ाई में जुटे हैं। डिग्री के बदले हर माह अच्छी खासी रकम अस्पताल संचालकों से वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं पैथालॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर के पंजीकरण के लिए भी कई डॉक्टरों ने अपनी डिग्री दूसरे जिलों में भी दे रखी है।

एक डॉक्टर के नाम पर दो अस्पतालों का हो सकता है पंजीकरण
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि नियम के तहत एक डॉक्टर के नाम पर दो अस्पतालों का पंजीकरण कराया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए दोनों अस्पतालों की दूरी 30 किलोमीटर की परिधि के अंदर होनी चाहिए, जिससे की दोनों जगहों पर डॉक्टर पहुंच सके। लेकिन, यहां पर जिन डॉक्टरों ने दो से अधिक अस्पतालों के लिए पंजीकरण कराया है, उनकी दूरी भी अधिक है।

बताया कि ऐसे अस्पतालों की सूची बनाकर एसएसपी को भी सौंपी जाएगी। साथ ही इसकी सूचना नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) को सौंपकर उनका रजिस्ट्रेशन भी निरस्त कराया जाएगा, जिससे की वह कहीं और प्रैक्टिस न कर सकें।

इस गाइडलाइन का पालन अनिवार्य
सीएमओ ने बताया कि 50 फीसदी अस्पताल गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों को नोटिस भी जारी किया जाएगा। गाइड लाइन के तहत हॉस्पिटल और नर्सिंग होम के बोर्ड पर बड़े अक्षरों में सीएमओ कार्यालय का रजिस्ट्रेश नंबर, उसकी वैद्यता साफ-साफ अंकों में अंकित होनी चाहिए।

हॉस्पिटल और नर्सिंग होम में कार्यरत सभी डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ आदि का नाम और मोबाइल नंबर मुख्य द्वार पर अंकित होना चाहिए। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड सभी सेंटर बोर्ड लगाकर उस पर साफ अक्षरों में रजिस्ट्रेशन संख्या, वैद्यता अंकित करें। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड सेंटर वाले डॉक्टर का फोटोग्रॉफ मुख्य स्थान पर अंकित करें।

सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि एक-एक डॉक्टरों के नाम पर आठ से अधिक अस्पतालों का पंजीकरण है। शुरुआती जांच में यह जानकारी मिली है। इसकी जांच के लिए पांच टीमें लगा दी गई हैं। टीमें आठ से 10 दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपेंगी। इसके बाद इसकी पूरी लिस्ट सार्वजनिक करते हुए एसएसपी को सौंपी जाएगी। ऐसे अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त कराते हुए मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
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