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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Durga statue will not be installed in Durgabari first time in 68 years due to coronavirus

68 सालों में पहली बार दुर्गाबाड़ी में इस बार नहीं होगी दुर्गा प्रतिमा की स्थापना, बंगाली रीति-रिवाज से होगी पूजा-अर्चना

Sun, 04 Oct 2020 02:57 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 04 Oct 2020 02:57 PM IST
सार

  • बंगाली रीति-रिवाज से कलश स्थापित कर होगी पूजा-अर्चना
  • नहीं होंगे कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम, कोलकाता से ढोल भी नहीं मंगाए जाएंगे
  • बंगाली समिति 113 वर्षों से जिले में करती आ रही है दुर्गा प्रतिमा की स्थापना

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Durga statue will not be installed in Durgabari first time in 68 years due to coronavirus
फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुर्गा पूजा में गोरखपुर शहर की पहचान माने जाने वाली दुर्गाबाड़ी में 68 वर्षों में पहली बार अबकी दुर्गा प्रतिमा की स्थापना नहीं होगी। यहां सिर्फ कलश की स्थापना कर पूजन-अर्चन होगा। किसी भी तरह का कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम प्रांगण में नहीं होगा। साथ ही कोलकाता से ढोल भी नहीं मंगाए जा रहे हैं।

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बंगाल के बाद पूरे देश में अगर कहीं सबसे अधिक दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना होती है वह गोरखपुर शहर में होती है और इसका श्रेय यहां की बंगाली समिति को जाता है, जिसने 113 वर्ष पूर्व दुर्गा पूजा में दुर्गा प्रतिमा स्थापना की शुरुआत की। उसके बाद से शहर में दुर्गा पूजा पर हजारों की संख्या में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित होने लगी हैं, लेकिन उन सभी प्रतिमाओं में अभी भी सबसे ज्यादा ख्याति दुर्गाबाड़ी की प्रतिमा की है। यहां शहर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल से भक्त माता के दर्शन को पहुंचते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण 68 वर्षों में पहली बार यहां प्रतिमा स्थापित नहीं की जाएगी।
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यह है शहर में प्रतिमा स्थापना का इतिहास
शहर में दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना लगभग 113 वर्ष पूर्व शुरू हुई थी। जिला अस्पताल से शुरू हुई यह परंपरा शहर के विभिन्न स्थानों तक पहुंची। लेकिन अगर एक ही स्थान पर दुर्गा प्रतिमा के लगातार स्थापित होने की बात करें तो दुर्गाबाड़ी में 68 सालों से प्रत्येक वर्ष दुर्गा प्रतिमा की स्थापना बंगाली समाज की ओर से की जाती है। पहली बार यहां 1952 में प्रतिमा स्थापित की गई थी।
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यह है कार्यकारिणी

मृणाल कांति चटर्जी अध्यक्ष, विजय कृष्ण नंदी उपाध्यक्ष, अरुण सचिव, अभिषेक चटर्जी व पार्थो चटर्जी सहायक सचिव, शुभाजित नियोगी कोषाध्यक्ष, शक्ति मुखर्जी संस्कृति सचिव, जय देव मुखर्जी साहित्य सचिव और अशोक देव नीलू मीडिया प्रभारी।

 
बंगाली समिति दुर्गाबाड़ी के सह सचिव व पूजन प्रभारी पार्थो चटर्जी ने बताया कि कोरोना वायरस को देखते हुए इस बार बंगाली समिति प्रतिमा स्थापित न कर सिर्फ कलश स्थापना कर विधि-विधान से पूजन करेगी। इस दौरान दुर्गाबाड़ी परिसर में कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होगा। अगर शासन की गाइडलाइन में पंडालों में प्रतिमा स्थापना की अनुमति मिली तो इस पर विचार किया जाएगा।

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