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50 साल बाद बदलेगी ये परंपरा, इस बार पंडाल में नहीं इस खास मंदिर में स्थापित होगी दुर्गा प्रतिमा
Wed, 07 Oct 2020 04:10 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 07 Oct 2020 04:10 PM IST
सार
- कोरोना के कारण समिति ने पंडाल न लगा मंदिर में छोटी प्रतिमा स्थापित करने का लिया निर्णय
- दुर्गाबाड़ी के बाद दूसरी सबसे पुरानी है कालीबाड़ी की बंगाली रूप की दुर्गा प्रतिमा
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फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर की दूसरी सबसे पुरानी कालीबाड़ी की बंगाली दुर्गा प्रतिमा इस बार पंडाल में न स्थापित होकर कालीबाड़ी मंदिर के भीतर स्थापित की जाएगी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए दुर्गा पूजा समिति कालीबाड़ी ने शासन की गाइडलाइन के पूर्व ही कोरोना से बचाव के लिए यह निर्णय लिया है।
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मंदिर में प्रतिमा आसानी से रखी जा सके इसके लिए प्रतिमा की उंचाई 12 फुट से घटाकर चार फुट कर दी गई है। बंगाल से इस बार कलाकार नहीं आने के कारण स्थानीय मूर्तिकार कालीबाड़ी की दुर्गा प्रतिमा बना रहे हैं।
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श्री श्री दुर्गा पूजा समिति, कालीबाड़ी, रेती चौक इस वर्ष अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। समिति ने 50वें वर्ष को और भी भव्य तरीके से मनाने की तैयारी की थी लेकिन कोरोना ने इन तैयारियों पर ग्रहण लगा दिया। जिसके बाद समिति ने कोरोना से बचाव के लिए कालीबाड़ी मंदिर में चार फुट की छोटी प्रतिमा स्थापित कर पूजन करने का निर्णय लिया।
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पूजा पद्धति में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। पूजा पहले की तरह ही बंगाली रीति-रिवाज से होगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक बार में 10 लोगों को ही अंदर आने की इजाजत होगी। मास्क, सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रिनिंग के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।
हर साल बंगाल से ढाक (ढोल) वालों को बुलाया जाता था लेकिन इस बार उन्हें नहीं बुलाया गया है। पूजन का सारा सामान बनारस से आएगा। विसर्जन 26 तारीख को बांग्ला विधि से किया जाएगा। शोभा यात्रा की इस बार कोई व्यवस्था नहीं है। प्रशासन की जो गाइडलाइन होगी उसका पालन करते हुए मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा।
1971 से शुरू हुई थी कालीबाड़ी की दुर्गा पूजा
पुराने शहर के हृदय स्थल कालीबाड़ी मंदिर क्षेत्र में स्थापित होने वाली दुर्गा पूजा का अपना अलग महत्व है। शहर के रेती चौक क्षेत्र स्थित कालीबाड़ी दुर्गा उत्सव की शुरुआत वर्ष 1971 में विश्वनाथ विश्वास, बीएन कुंडू, स्वतंत्र रस्तोगी और कृष्ण चंद्र गुप्ता ने की थी। पहली बार जो मूर्ति स्थापित की गई उसे समिति के सदस्यों ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था। उस समय माता का रौद्र रूप दर्शनीय था।
कालीबाड़ी श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक महंत रविंद्र दास ने बताया कि कोरोना को देखते हुए इस बार माता की प्रतिमा को कालीबाड़ी मंदिर परिसर में रखने की अनुमति दी गई है। मंदिर परिसर के भीतर होने के कारण शासन के गाइडलाइन किसी भी प्रकार से उल्लंघन नहीं हो सकेगा।
कालीबाड़ी श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष चंदन अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के कारण इस बार सादगी के साथ दुर्गा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। जबकि इस बार 50वां वर्ष होने के कारण भव्य कार्यक्रम की तैयारी थी। दुुर्गा पूजन के दौरान पूरी तरह से कोविड-19 नियमों के पालन कराया जाएगा।
कालीबाड़ी श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के संरक्षक महंत रविंद्र दास ने बताया कि कोरोना को देखते हुए इस बार माता की प्रतिमा को कालीबाड़ी मंदिर परिसर में रखने की अनुमति दी गई है। मंदिर परिसर के भीतर होने के कारण शासन के गाइडलाइन किसी भी प्रकार से उल्लंघन नहीं हो सकेगा।
कालीबाड़ी श्री श्री दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष चंदन अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के कारण इस बार सादगी के साथ दुर्गा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। जबकि इस बार 50वां वर्ष होने के कारण भव्य कार्यक्रम की तैयारी थी। दुुर्गा पूजन के दौरान पूरी तरह से कोविड-19 नियमों के पालन कराया जाएगा।