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लॉकडाउन में भूख से बेहाल कुत्ते हो रहे 'हमलावर', बचाव के लिए डॉक्टर दे रहे ये खास सलाह

Thu, 23 Apr 2020 02:02 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Thu, 23 Apr 2020 02:02 PM IST
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Dog Attack on People due to hunger during lockdown in gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आ गया है। भूख और प्यास से बेहाल कुत्ते चिड़चिड़े और खतरनाक हो गए हैं, जो लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, लॉकडाउन में रोजाना 150 से ज्यादा लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।
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सोमवार को यह संख्या 200 के आसपास पहुंच जा रही है। पशु डॉक्टरों का कहना है कि कुत्तों को खाना नहीं मिल रहा, इसी वजह से वे आक्रामक हो रहे हैं। रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड की दुकानों का बचा-खुचा भोजन ही गली-मोहल्लों के आवारा पशुओं के काम आता है। लॉकडाउन में ये दुकानें बंद हैं।
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ऐसे में कुत्तों को भोजन नहीं मिल पा रहा है और वे चिड़चिड़े होकर लोगों पर हमला कर दे रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि नगर निगम और पशुपालन विभाग की ओर से कुत्तों, बिल्ली, गाय, बंदरों को खाना खिलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने घर के आसपास के कुत्तों को खाना-पानी जरूर दें।
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जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है वैक्सीन

जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके सिंह ने बताया कि एंटी रैबीज वैक्सीन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है। मरीजों को लगाया भी जा रहा है। एक व्यक्ति को चार एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। इसमें जिस दिन कुत्ते ने काटा हो उस दिन, फिर तीसरे दिन, सातवें और अंत में 28वें दिन वैक्सीन लगाने की जरूरत होती है।

सीएचसी और पीएचसी पर नहीं लग रहा वैक्सीन
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से ही सीएचसी और पीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगाया जा रहा है। इस पर शासन की ओर से ही रोक लगा दी गई है। आम तौर पर 0.25 प्रतिशत कुत्ते ही रैपिड होते हैं, जिनके काटने से रैबीज होता है। पालतू कुत्तों के काटने से रैबीज की संभावना न के बराबर होती है, क्योंकि पालतू कुत्तों को लोग पहले ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगवा देते हैं।
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