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गोरखपुर के डॉक्टर क्यों नहीं उठाते थे अनजान नंबर का फोन, जानिए क्या है वजह
Sun, 24 May 2020 03:17 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 24 May 2020 03:17 PM IST
सार
- डॉक्टरों में दहशत थी माफिया अमित मोहन शर्मा और रामायण उपाध्याय की
- दोनों ने शहर के दर्जनों डॉक्टरों से वसूली थी रंगदारी
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वर्ष 2000 के दशक में एक समय ऐसा भी था जब गोरखपुर के डॉक्टर किसी भी अनजान नंबर का फोन उठाते ही नहीं थी। अब आप सोच रहे होंगे क्या वास्तव में ऐसा हो सकता है तो आपको बताते हैं यह दहशत थी माफिया अमित मोहन वर्मा और रामायण उपाध्याय की।
वर्ष 2000 के दशक में यह दोनों बदमाश सिर्फ डॉक्टरों से ही रंगदारी वसूलते थे। उनका खौफ इतना था कि कोई डॉक्टर अनजान कॉल रिसीव नहीं करता था।
अमित और रामायण ने शहर के दर्जनों डॉक्टरों से रंगदारी वसूली थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी सिंह से भी उन्होंने रंगदारी मांगी थी लेकिन जब डॉ. जेपी सिंह ने पैसा देने से इनकार कर दिया तो दोनों ने उनके घर के पास 2004 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
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वर्ष 2000 के दशक में यह दोनों बदमाश सिर्फ डॉक्टरों से ही रंगदारी वसूलते थे। उनका खौफ इतना था कि कोई डॉक्टर अनजान कॉल रिसीव नहीं करता था।
अमित और रामायण ने शहर के दर्जनों डॉक्टरों से रंगदारी वसूली थी। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी सिंह से भी उन्होंने रंगदारी मांगी थी लेकिन जब डॉ. जेपी सिंह ने पैसा देने से इनकार कर दिया तो दोनों ने उनके घर के पास 2004 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
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इस सनसनीखेज वारदात से शहर के डॉक्टरों में पहली बार खौफ पैदा हुआ था। यही नहीं जब डॉ. जेपी सिंह का राजघाट में राप्ती तट पर अन्तिम संस्कार किया जा रहा था उस दौरान भी अमित ने दो डॉक्टरों के पास फोन कर रंगदारी मांगी थी। न देने पर डॉक्टर जेपी सिंह की तरह उनका भी हश्र होने की बात कही थी।
उसका यह नेटवर्क ही था कि उसने उन डॉक्टरों को जब फोन किया तब वे जेपी सिंह की शव यात्रा में शामिल थे। उसने धमकाया था कि जिस तरह से जेपी सिंह की शव यात्रा निकाली जा रही है उसी तरह तुम्हारी भी निकाली जाएगी।
फिलहाल उन्हीं में एक डॉक्टर ने हिम्मत जुटाई और तत्कालीन एसएसपी बीबी बक्शी के जाल में अमित और रामायण फंस गए। शहर के नार्मल मैदान में उनका एनकाउंटर हुआ जिसके बाद डॉक्टरों में दहशत खत्म हुआ था।
उसका यह नेटवर्क ही था कि उसने उन डॉक्टरों को जब फोन किया तब वे जेपी सिंह की शव यात्रा में शामिल थे। उसने धमकाया था कि जिस तरह से जेपी सिंह की शव यात्रा निकाली जा रही है उसी तरह तुम्हारी भी निकाली जाएगी।
फिलहाल उन्हीं में एक डॉक्टर ने हिम्मत जुटाई और तत्कालीन एसएसपी बीबी बक्शी के जाल में अमित और रामायण फंस गए। शहर के नार्मल मैदान में उनका एनकाउंटर हुआ जिसके बाद डॉक्टरों में दहशत खत्म हुआ था।