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रैंकिंग में बिगाड़ न दे खेल: मुख्य सड़कों का कूड़ा शहर की गलियों में ऐसे तो गोरक्षनगरी नहीं बन पाएगी इंदौर

Mon, 22 May 2023 03:46 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 22 May 2023 03:46 PM IST
सार

पुर्दिलपुर शंकर सिंह ने कहा कि सफाई कर्मचारी नियमित नहीं आते हैं। आज तो दोपहर तक कूड़ा हटाने के लिए सफाई कर्मचारी आए ही नहीं। सफाई को लेकर बहुत दिक्कत है। हम लोग तो अधिकारियों से कहकर थक चुके हैं।

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Dirt being found everywhere in inspection of Municipal Commissioner
हरिओम नगर में कूड़े से पटी नाली। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर शहर को इंदौर की तर्ज पर सजाने-संवारने में जुटा नगर निगम सफाई व्यवस्था को बेहतर नहीं बना पा रहा है। शहर की प्रमुख सड़कों को तो चमका दिया जा रहा, लेकिन मोहल्लों और गलियों में कूड़ा पटा पड़ा है। सफाई इंतजामों की पड़ताल में हालात बेहद खराब मिले हैं। जहां नगर आयुक्त खुद निरीक्षण करने के बाद गंदगी मिलने पर नाराजही जता चुके हैं, वहां भी कूड़ा नहीं हटाया जा रहा है।

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यह हाल तब है, जबकि स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 के लिए टीम आने वाली है और सफाई पर ही प्रति माह चार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जाहिर है कि अगर शहर कि सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी तो इस बार भी स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में शहर पिछड़ सकता है।
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केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्रालय ने इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए कुल 9500 नंबर तय किए हैं। पिछली सर्वेक्षण में 7500 अंक थे, जिसमें 4500 अंक मिले थे और देश में 74वां रैंक मिला था। जबकि, प्रदेश में सातवां रैंक था। इसमें सफाई में नंबर कम मिले थे। इसे सुधारने के लिए कोशिशें चल रहीं हैं। लेकिन, यह कोशिशें धरातल पर कम ही दिख रही हैं। नगर आयुक्त रोजाना साइकिल से विभिन्न मोहल्लों में पहुंचकर निरीक्षण कर रहे हैं। शनिवार को नगर आयुक्त ने सिविल लाइंस, बेतियाहाता सहित कई मोहल्लों का निरीक्षण किया था। रविवार को उन सभी जगहों पर कूड़े का ढेर मिला।
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दृश्य एकः सिविल लाइंस में सड़कों के किनारे कूड़े का ढेर

रविवार की दोपहर 12.24 बजे हरिओम नगर गेट के पास नाली में कूड़े का ढेर पड़ा हुआ था। नाली भी गंदगी से पटी मिली। यहां से आगे बढ़ने पर आंबेडकर चौराहे पर स्थित कॉफी की दुकान के सामने कचरा नजर आया। दीवानी कचहरी गेट के पास दीवार से सटी दुकानें हैं। उनके सामने कागज सहित अन्य सामान पड़ा हुआ था। इसी रोड पर आगे जाकर फिराक चौराहे के पहले सड़क पर कूड़ा पड़ा हुआ था। नाले की सफाई नहीं हुई थी।

दाउदपुर से रुस्तमपुर ढाला रोड पर दाउदपुर में सड़क पर कूड़े का ढेर लगा था। मोहल्ले में एक सफाई कर्मचारी ठेले पर कूड़ा ले जाते हुए मिला। थोड़ा आगे बढ़ने पर दूरभाष केंद्र, बेतियाहाता के सामने कूड़े का ढेर पड़ा था। यहां नाले की सफाई भी नहीं हुई थी। जबकि, शनिवार को इसी रोड पर नगर आयुक्त ने निरीक्षण करके व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा था।

दृश्य दोः डीबी इंटर कॉलेज के सामने नहीं उठा कूड़ा
दोपहर 01. 20 बजे बेनीगंज में डीबी इंटर कॉलेज के सामने कूड़ा फैला हुआ था। बेनीगंज पुलिस चौकी से आगे जाने पर सड़क की बायीं ओर कूड़े का ढेर था। नालियां भी चोक थीं। आगे बढ़ने पर कई जगह गंदगी मिली। यहां के लोगों ने बताया कि नियमित सफाई नहीं होती है। सफाई कर्मी कभी सुबह तो कभी दोपहर में आते हैं।

दृश्य तीनः दुर्गाबाड़ी रोड पर चकाचक मिली व्यवस्था
दो दिन पूर्व नगर आयुक्त ने धर्मशाला से तिवारीहाता, दुर्गाबाड़ी रोड, सूर्यकुंड ओवरब्रिज मोड़ होते हुए तिवारीपुर, सूर्य विहार सहित अन्य जगहों का निरीक्षण किया था। रविवार को दुर्गाबाड़ी चौक, तिवारीपुर रोड, गंगेज चौराहा सहित अन्य जगह सफाई व्यवस्था दुरुस्त नजर आई। लोगों ने बताया कि नगर आयुक्त की सख्ती का असर नजर आ रहा है। पहले यहां भी गंदगी पड़ी रहती थी।

 

दृश्य चारः सफाई कर्मी आए ही नहीं

दोपहर 02.00 बजे, पुर्दिलपुर में हट्टी माई स्थान की तरफ जाने वाले रास्ते पर कूड़े का ढेर मिला। सड़क के किनारे कूड़ा फैला हुआ था, जिसमें गाय खा रही थी। पुर्दिलपुर मोहल्ले में रहने वाले शंकर सिंह ने बताया कि सफाई कर्मी आए ही नहीं। पूरे दिन कूड़ा पड़ा रहेगा, पशु आकर इसे सड़क पर फैला देंगे। यह नरक तो रोज भोगना पड़ रहा है।

सफाई व्यवस्था में हर माह चार करोड़ रुपये का खर्च
सफाई पर नगर निगम हर महीने चार करोड़ रुपये का बजट खर्च करता है। कुल 3600 सफाई कर्मचारी काम करते हैं, इनमें 750 स्थायी कर्मचारी शामिल हैं। मोहल्लों से निकलने वाले कूड़े को नजदीक के पड़ाव केंद्र पर पहुंचाने से लेकर डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए छोटी-बड़ी कुल 450 गाड़ियां चल रही हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण में विभिन्न बिंदुओं पर दिए जाएंगे अंक
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए कुल 9500 अंक तय किए हैं। इसमें सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग रखने के लिए 1750 अंक, कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था दुरुस्त होने पर 1830 नंबर, सीवरलाइन की व्यवस्था के लिए कुल 945 अंक, वाटर प्लस में 1000, खुले में शौच मुक्त शहर होने पर 650 अंक, ओडीएफ में पांच सितारा होने पर 1050 अंक सहित अन्य बिंदुओं पर अंक दिए जाएंगे। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, कूड़े का निस्तारण, सीवर की स्थिति, घर से कूड़ा उठाने, शौचालय और मूत्रालय के ओडीएफ होने इत्यादि पर अंक दिए जाते हैं। वर्ष 2022 में नगर निगम गोरखपुर स्वच्छ सर्वेक्षण में 74वें रैंक पर रहा है।

पुर्दिलपुर शंकर सिंह ने कहा कि सफाई कर्मचारी नियमित नहीं आते हैं। आज तो दोपहर तक कूड़ा हटाने के लिए सफाई कर्मचारी आए ही नहीं। सफाई को लेकर बहुत दिक्कत है। हम लोग तो अधिकारियों से कहकर थक चुके हैं।

छोटेकाजीपुर गोपाल दत्ता ने कहा कि सफाई कर्मचारी रोजाना सफाई करने आते हैं। कूड़ा उठने के बाद भी कुछ लोग कचरा फेंक देते हैं। इससे दिक्कतें आती हैं। कूड़ा उठने के बाद जो लोग कचरा फेंकें, उनके खिलाफ कार्रवाई हो।

बेनीगंज अंजली ने कहा कि सुबह मोहल्ले में झाडू तो लगा है, लेकिन कूड़ा नहीं हटाया गया। सफाईकर्मी कहने पर भी नजरअंदाज कर देते हैं। अधिकारियों को निरीक्षण करके जिम्मेदारों पर कार्रवाई करना चाहिए।

मियां बाजार एहतेशाम ने कहा कि मेरे मोहल्ले में भी जगह-जगह कूड़ा रखा रहता है, जिसे पशु फैला देते हैं। इसलिए सफाई से लेकर कूड़ा उठाने तक में कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

सहायक नगर आयुक्त/ नोडल अफसर स्वच्छ भारत मिशन डॉ. मणि भूषण तिवारी ने कहा कि शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर सभी को निर्देश दिए गए हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए इसमें लापरवाही नहीं होनी जाएगी। सफाई कर्मचारियों की उपलब्धता से लेकर समय से कूड़ा उठाने पर जोर दिया जा रहा है। कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां किन वजहों से नहीं पहुंचीं, इसकी जानकारी ली जाएगी।



 

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