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Gorakhpur News: सुख-विलास से भी अधिक खतरनाक होती है वासना
Thu, 30 Jul 2026 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 30 Jul 2026 02:35 AM IST
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श्रद्धालुओं ने पंचवटी से सीता हरण के आगे की सुनी पूरी कथा
गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा को लेकर चल रही कथा का हुआ विश्राम
गोरखपुर। रामकथा के दौरान कथा व्यास आचार्य शांतनु ने कहा कि व्यक्ति कहीं भी चला जाए, यदि वह अपनी वासनाओं का त्याग नहीं करता तो वे उसका पीछा नहीं छोड़तीं। शूर्पणखा वन में रहते हुए भी वासना का त्याग नहीं कर सकी और राम व लक्ष्मण को देखते ही उनके प्रति आसक्त हो गई। शूर्पणखा वासना का प्रतीक है और वासना सुख-विलास से भी अधिक खतरनाक होती है क्योंकि यह व्यक्ति का विवेक छीन लेती है।
गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा को लेकर हो रही राम कथा के समापन दिवस पर कथा वाचक आचार्य शांतनु की ओर राम कथा का रसपान श्रद्धालुओं को कराया जा रहा था। इस दौरान कथा सुनाते हुए कथा वाचक ने कहा कि
भगवान का स्वरूप इतना मोहक है कि खर-दूषण जैसे राक्षस भी उससे अछूते नहीं रह सके। रावण जानता था कि उनका वध केवल भगवान नारायण ही कर सकते हैं, इसलिए उसने भगवान राम से बैर कर उनके हाथों मृत्यु प्राप्त कर मोक्ष पाने का मार्ग चुना।
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उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग माया की आराधना करते हैं, जबकि माधव को भूल जाते हैं। जो माधव का भजन करता है, उसके लिए माया स्वयं दासी बन जाती है। उन्होंने कहा कि जब-जब जीवन की मर्यादाओं का उल्लंघन होता है, तब-तब रावण रूपी अनर्थ प्रवेश करता है। इसलिए ऋषि-मुनियों और पूर्वजों की ओर से निर्धारित मर्यादाओं का पालन करना आवश्यक है।
कथा व्यास ने संघर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास सदैव संघर्ष करने वालों का लिखा जाता है, पलायन करने वालों का नहीं। गिद्धराज जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसलिए आज भी उनका स्मरण श्रद्धा के साथ किया जाता है। वहीं माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य, श्रद्धा और ईश्वर पर अटूट विश्वास ही सफलता का आधार है। कर्म करना मनुष्य का कर्तव्य है, जबकि उसका फल भगवान के हाथ में होता है। कथा में शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, सीताहरण, शबरी-राम संवाद, राम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध तथा हनुमान के लंका प्रवेश का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने किया।
इस अवसर पर योगी कमलनाथ, महंत मिथिलेश नाथ, महंत रविंद्र दास , महंत रामदास , मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सांसद रवि किशन, विजय दुबे, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक प्रदीप शुक्ला, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह व रमेश सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा को लेकर चल रही कथा का हुआ विश्राम
गोरखपुर। रामकथा के दौरान कथा व्यास आचार्य शांतनु ने कहा कि व्यक्ति कहीं भी चला जाए, यदि वह अपनी वासनाओं का त्याग नहीं करता तो वे उसका पीछा नहीं छोड़तीं। शूर्पणखा वन में रहते हुए भी वासना का त्याग नहीं कर सकी और राम व लक्ष्मण को देखते ही उनके प्रति आसक्त हो गई। शूर्पणखा वासना का प्रतीक है और वासना सुख-विलास से भी अधिक खतरनाक होती है क्योंकि यह व्यक्ति का विवेक छीन लेती है।
गोरखनाथ मंदिर में गुरु पूर्णिमा को लेकर हो रही राम कथा के समापन दिवस पर कथा वाचक आचार्य शांतनु की ओर राम कथा का रसपान श्रद्धालुओं को कराया जा रहा था। इस दौरान कथा सुनाते हुए कथा वाचक ने कहा कि
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भगवान का स्वरूप इतना मोहक है कि खर-दूषण जैसे राक्षस भी उससे अछूते नहीं रह सके। रावण जानता था कि उनका वध केवल भगवान नारायण ही कर सकते हैं, इसलिए उसने भगवान राम से बैर कर उनके हाथों मृत्यु प्राप्त कर मोक्ष पाने का मार्ग चुना।
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उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग माया की आराधना करते हैं, जबकि माधव को भूल जाते हैं। जो माधव का भजन करता है, उसके लिए माया स्वयं दासी बन जाती है। उन्होंने कहा कि जब-जब जीवन की मर्यादाओं का उल्लंघन होता है, तब-तब रावण रूपी अनर्थ प्रवेश करता है। इसलिए ऋषि-मुनियों और पूर्वजों की ओर से निर्धारित मर्यादाओं का पालन करना आवश्यक है।
कथा व्यास ने संघर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इतिहास सदैव संघर्ष करने वालों का लिखा जाता है, पलायन करने वालों का नहीं। गिद्धराज जटायु ने माता सीता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसलिए आज भी उनका स्मरण श्रद्धा के साथ किया जाता है। वहीं माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य, श्रद्धा और ईश्वर पर अटूट विश्वास ही सफलता का आधार है। कर्म करना मनुष्य का कर्तव्य है, जबकि उसका फल भगवान के हाथ में होता है। कथा में शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध, सीताहरण, शबरी-राम संवाद, राम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध तथा हनुमान के लंका प्रवेश का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने किया।
इस अवसर पर योगी कमलनाथ, महंत मिथिलेश नाथ, महंत रविंद्र दास , महंत रामदास , मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, सांसद रवि किशन, विजय दुबे, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक प्रदीप शुक्ला, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह व रमेश सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।