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पुण्यतिथि विशेष: पंडित फिल्लौरी ने क्रांतिकारियों के मन में जगाई थी देशभक्ति की अलख, अंग्रेजों ने कर दिया था गांव से निष्कासित

Thu, 24 Jun 2021 03:18 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 24 Jun 2021 03:18 PM IST
सार

ओम जय जगदीश हरे आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी। 

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death anniversary of Pandit Shraddharam Phillauri author of Om Jai Jagdish Hare Aarti
पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

'ओम जय जगदीश हरे' आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की आज पुण्यतिथि है। इस आरती की रचना करके पंडित फिल्लौरी ने क्रांतिकारियों के मन में देशभक्ति की ऐसी अलख जगाई थी कि डर से अंग्रेजों ने उन्हें उनके गांव फिल्लौरी से निष्कासित कर दिया था और गांव में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था।
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पंडित श्रद्धाराम का जन्म 30 सितंबर 1837 को पंजाब के लुधियाना के पास फुल्लौरी गांव में हुआ और निधन 24 जून 1881 को हुआ। पंडित श्रद्धाराम प्रसिद्ध साहित्यकार तो थे ही, साथ ही सनातन धर्म-प्रचारक, ज्योतिषी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। 
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उन्होंने सात साल की उम्र तक गुरुमुखी में पढाई की। दस साल की उम्र में संस्कृत, हिन्दी, फारसी तथा ज्योतिष की पढ़ाई शुरू की और कुछ ही वर्षों में वे इन सभी विषयों के निष्णात हो गए। उनका विवाह सिख महिला महताब कौर के साथ हुआ था। 24 जून 1881 को लाहौर में उनका देहावसान हुआ।
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उन्होंने धार्मिक कथाओं और आख्यानों का उद्धरण देते हुए अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जनजागरण का ऐसा वातावरण तैयार कर दिया था कि अंग्रेजी सरकार की नींद उड़ गई थी। वे महाभारत का उल्लेख करते हुए ब्रिटिश सरकार को उखाड़ फेंकने का संदेश देते थे और लोगों में क्रांतिकारी विचार पैदा करते थे।

 
1865 में ब्रिटिश सरकार ने उनको फुल्लौरी से निष्कासित कर दिया और आसपास के गांवों तक में उनके प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। जबकि उनकी लिखी किताबें स्कूलों में पढ़ाई जाती रही। पं. श्रद्धाराम खुद ज्योतिष के अच्छे ज्ञाता थे और अमृतसर से लेकर लाहौर तक उनके चाहने वाले थे। इसलिए इस निष्कासन का उन पर कोई असर नहीं हुआ, बल्कि उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई। लोग उनकी बातें सुनने को और उनसे मिलने को उत्सुक रहने लगे। इसी दौरान उन्होंने हिन्दी में ज्योतिष पर कई किताबें भी लिखी।
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