{"_id":"60a3b2361d2d4c5e384b0600","slug":"ddu-acharya-and-sociologist-prof-manvendra-singh-passed-away-in-gorakhpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर: गोविवि के आचार्य और समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र सिंह का कोरोना से निधन, वेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर: गोविवि के आचार्य और समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र सिंह का कोरोना से निधन, वेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस
Tue, 18 May 2021 05:55 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 18 May 2021 05:55 PM IST
सार
कोरोना से संक्रमित प्रो सिंह ने लखनऊ मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस, शिक्षाविदों में शोक की लहर, कुलपति ने बताया विवि की अपूरणीय क्षति
विज्ञापन
समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र सिंह। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र के विभाग के पूर्व अध्यक्ष और समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र प्रताप सिंह (48 वर्ष) का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। प्रो. सिंह कोरोना से संक्रमित थे और उनका लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं कुलपति प्रो राजेश सिंह ने प्रो. सिंह के निधन पर गहरा शोक जताया है। मुख्यमंत्री ने पत्नी विदिशा सिंह को जारी शोक संदेश में उन्होंने कहा है कि प्रो. सिंह एक सुयोग्य शिक्षक थे और गोरक्षपीठ के प्रति उनकी अनन्य आस्था थी।
विज्ञापन
प्रो. सिंह की पत्नी विदिशा सिंह लखनऊ में आरटीओ के पद पर तैनात हैं। उनका बेटा सार्थक और बेटी शिवाली लखनऊ में अध्ययनरत हैं। प्रो. सिंह भारतीय समाजशास्त्र परिषद प्रबंध समिति के सदस्य होने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश समाजशास्त्र परिषद के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे। उनकी लिखी पुस्तक ‘सोशल डेवलपमेंट इन इंडिया’ और ‘नेशनल ड्यूटीज एंड हायर एजुकेशन’ को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली।
विज्ञापन
प्रो. मानवेंद्र ने विश्वविद्यालय के अलावा समाजशास्त्र विषय से जुड़ी विभिन्न संस्थानों में कई अहम पदों पर अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन किया। उनके निधन की सूचना जैसे ही मिली, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों के अलावा शहर में उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। उनसे जुड़े संस्मरणों को सोशल मीडिया पर साझा कर लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
वर्ष 1998 में शुरू किया अध्यापन कार्य
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से एमए और एमफिल करने के बाद उन्होंने वर्ष 1998 में गोरखपुर विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर अध्यापन कार्य शुरू किया। 2017-2020 तक वह विभागाध्यक्ष भी रहे। उनके निर्देशन में एक दर्जन से अधिक शोधार्थियों ने समाज कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध किया।