यूपी: पुलिस ने बंद कर दी थी फाइल, क्राइम ब्रांच ने पकड़ी ढाई करोड़ की जालसाजी
- ठेका और नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजी करता था गिरोह, दो गिरफ्तार
- शाहपुर इलाके की एक महिला से रेलवे में ठेका के नाम पर लिए थे 35 लाख रुपये
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दूसरे राज्य में भी केस दर्ज होने की बात कहकर स्थानीय पुलिस ने जिसकी जांच बंद कर दी थी, वह ढाई करोड़ रुपये की जालसाजी का मामला निकला। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंपी गई तो ठेका और नौकरी दिलाने के नाम पर जालसाजी करने वाले गिरोह के दो शातिर पकड़ लिए गए।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान लखनऊ के सरोजनी नगर निवासी संजय कुमार वर्मा व उसके भाई सुनील कुमार वर्मा के रूप में हुई। उन्हें सोमवार को क्राइम ब्रांच की टीम ने शाहपुर इलाके के खजांची चौराहे से गिरफ्तार किया।
सोमवार को एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि शाहपुर के आवास विकास कॉलोनी निवासी विन्ध्यवासिनी दुबे से वर्ष 2012-13 में कुछ लोग मिले। बताया कि उनका रेलवे में ठेका है। प्रस्ताव रखा कि वह भी इसी ठेके में रकम लगाकर लाभ कमा सकती हैं।
विन्ध्यवासिनी ने जालसाजों को दो बार में 35 लाख रुपये (30 लाख खाते में और पांच लाख नकद) दे दिया। कई महीने बीतने के बाद भी उन्हें न तो ठेका में काम मिला और न ही कोई लाभ मिला। उन्होंने रकम वापस मांगी तो जालसाजों ने कहा कि उनके दोनों भाइयों की बदले में एफसीआई में नौकरी दिलवा देंगे।
जालसाजों ने दोनों भाइयों का लखनऊ में ट्रेनिंग करा दिया। नियुक्ति पत्र भी दे दिया। जब वे नौकरी ज्वांइन करने गए तो नियुक्ति पत्र फर्जी निकला। जिसके बाद विन्ध्यवासिनी ने शाहपुर थाने में वर्ष 2017 में आठ लोगों के खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज कराया।
सरगना समेत पांच आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
एसपी क्राइम ने बताया कि अभी स्थानीय पुलिस जांच कर ही रही थी कि इसी तरह के मामले की जांच करने हैदराबाद की पुलिस गोरखपुर आ गई। पता चला कि इन्हीं आरोपियों ने कुछ और लोगों को हैदराबाद में नियुक्ति पत्र देकर ठगा है और वहां भी उनके खिलाफ जालसाजी का केस दर्ज है। जिसके बाद यहां की पुलिस ने मामले की जांच बंद कर दी।
एसपी क्राइम ने बताया कि जांज बंद होने के बाद विंध्यवासिनी दुबे हाइकोर्ट चली गईं। हाइकोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी को क्राइम ब्रांच से समयबद्ध तरीके से जांच कराने का आदेश दिया। जांच सीओ क्राइम के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर दिलीप सिंह को मिली।
जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने पहले गिरोह के एक सदस्य लखनऊ निवासी अनिल कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था। सोमवार को गिरोह के दो अन्य सदस्यों संजय कुमार वर्मा व उसके भाई सुनील कुमार वर्मा को गिरफ्तार किया। क्राइम ब्रांच बिहार के छपरा निवासी गिरोह के सरगना समेत पांच आरोपियों की तलाश में जुटी है।
करीब पचास लोगों से ठगे हैं ढाई करोड़ रुपये
एसपी क्राइम ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों व यूपी के कई जिलों में फैला है। बिहार, तेलंगाना के साथ ही यूपी के बलिया, लखनऊ, सुल्तानपुर में भी ठगी के आरोप हैं। सिर्फ गोरखपुर में ही इस गिरोह ने चालीस से पचास लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। उनसे करीब ढाई करोड़ रुपये की ठगी की गई है। उन्होंने बताया कि ये लोगों को अलग-अलग विभागों में नौकरी दिलाने अथवा ठेका दिलाने के नाम पर रकम लेते हैं। ट्रेनिंग भी कराते हैं और फर्जी नियुक्ति पत्र भी देते हैं।