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कोरोना के इलाज में कारगर नहीं मिलीं चार दवाएं
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कोरोना के इलाज में कारगर नहीं मिलीं चार दवाएं
गोरखपुर। कोरोना संक्रमितों के इलाज में चार दवाएं व इंजेक्शन कारगर नहीं मिले हैं। यह तथ्य इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्लूएचओ) के शोध में सामने आया है। अब आईसीएमआर के विज्ञानियों ने लोगों को आगाह किया है कि इन दवाओं का इस्तेमाल न करें। इन दवाओं में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, इंटरफेरॉन, रेमडेसिविर और रिटोम्यून शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर निजी अस्पतालों में इन चारों दवाओं का इस्तेमाल कोरोना संक्रमितों पर खूब किया गया है। सबसे अधिक रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग हुआ। एक-एक मरीज को इंजेक्शन के छह डोज लगाए गए। इसके अलावा शुरुआती चरण में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का भी इस्तेमाल लोगों ने खूब किया। इस दवा की कालाबाजारी को रोकने के लिए शासन को निर्देश तक जारी करने पड़े थे। इंटरफेरॉन की भी डिमांड खूब रही।
लेकिन, आईसीएमआर और डब्लूएचओ के शोध में सामने आया है कि ये चारो दवाएं कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कारगर नहीं है। आईसीएमआर के प्लानिंग कोर्डिनेटर डॉ. रजनीकांत ने बताया कि हाल ही में चारों दवाओं पर शोध किया गया है। शोध यह बात सामने आई कि वायरस के प्रभाव को रोक पाने में ये दवाएं ज्यादा कारगर नहीं साबित हुई हैं।
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मरीजों को दवाएं इस्तेमाल न करने की सलाह
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि इन चारों दवाओं पर शोध अमेरिका, यूरोप और भारत में हुए हैं, लेकिन इसका असर मरीजों पर न के बराबर रहा है। इसलिए मरीजों को यह सलाह दी जा रही है कि अब इन दवाओं का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक मास्क ही सबसे बड़ी दवा है।
12 हजार से अधिक इंजेक्शन बिक चुके हैं
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की भारी मांग को देखते हुए ही समिति ने पहल कर एमआरपी से कम मूल्य में इसे उपलब्ध कराया था। जिले में अब तक करीब 12 हजार से अधिक रेमडेसिविर इंजेक्शन बिक चुके हैं।
कोर कमेटी को भेजी गई रिपोर्ट
चार दवाएं संक्रमितों के इलाज में कारगर नहीं मिली हैं। आईसीएमआर की कोर कमेटी को रिपोर्ट भेजी गई है। कमेटी दवाओं के प्रयोग को लेकर गाइडलाइन तैयार कर रही है।
-डॉ. रजनीकांत, प्लानिंग कोआर्डिनेटर, आईसीएमआर
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गोरखपुर। कोरोना संक्रमितों के इलाज में चार दवाएं व इंजेक्शन कारगर नहीं मिले हैं। यह तथ्य इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्लूएचओ) के शोध में सामने आया है। अब आईसीएमआर के विज्ञानियों ने लोगों को आगाह किया है कि इन दवाओं का इस्तेमाल न करें। इन दवाओं में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, इंटरफेरॉन, रेमडेसिविर और रिटोम्यून शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर निजी अस्पतालों में इन चारों दवाओं का इस्तेमाल कोरोना संक्रमितों पर खूब किया गया है। सबसे अधिक रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग हुआ। एक-एक मरीज को इंजेक्शन के छह डोज लगाए गए। इसके अलावा शुरुआती चरण में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का भी इस्तेमाल लोगों ने खूब किया। इस दवा की कालाबाजारी को रोकने के लिए शासन को निर्देश तक जारी करने पड़े थे। इंटरफेरॉन की भी डिमांड खूब रही।
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लेकिन, आईसीएमआर और डब्लूएचओ के शोध में सामने आया है कि ये चारो दवाएं कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कारगर नहीं है। आईसीएमआर के प्लानिंग कोर्डिनेटर डॉ. रजनीकांत ने बताया कि हाल ही में चारों दवाओं पर शोध किया गया है। शोध यह बात सामने आई कि वायरस के प्रभाव को रोक पाने में ये दवाएं ज्यादा कारगर नहीं साबित हुई हैं।
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मरीजों को दवाएं इस्तेमाल न करने की सलाह
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि इन चारों दवाओं पर शोध अमेरिका, यूरोप और भारत में हुए हैं, लेकिन इसका असर मरीजों पर न के बराबर रहा है। इसलिए मरीजों को यह सलाह दी जा रही है कि अब इन दवाओं का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती है, तब तक मास्क ही सबसे बड़ी दवा है।
12 हजार से अधिक इंजेक्शन बिक चुके हैं
दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की भारी मांग को देखते हुए ही समिति ने पहल कर एमआरपी से कम मूल्य में इसे उपलब्ध कराया था। जिले में अब तक करीब 12 हजार से अधिक रेमडेसिविर इंजेक्शन बिक चुके हैं।
कोर कमेटी को भेजी गई रिपोर्ट
चार दवाएं संक्रमितों के इलाज में कारगर नहीं मिली हैं। आईसीएमआर की कोर कमेटी को रिपोर्ट भेजी गई है। कमेटी दवाओं के प्रयोग को लेकर गाइडलाइन तैयार कर रही है।
-डॉ. रजनीकांत, प्लानिंग कोआर्डिनेटर, आईसीएमआर