{"_id":"60ab7a25ac55ad3cf819efbc","slug":"corona-curfew-effect-on-lpg-gas-and-petroleum-products-in-gorakhpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना कर्फ्यू का असर: गोरखपुर में घट गई एलपीजी गैस व पेट्रोलियम पदार्थों की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना कर्फ्यू का असर: गोरखपुर में घट गई एलपीजी गैस व पेट्रोलियम पदार्थों की मांग
Mon, 24 May 2021 03:34 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 24 May 2021 03:34 PM IST
सार
पेट्रोलियम पदार्थों की मांग में 40 फीसदी तक कमी आई, घरेलू गैस सिलिंडरों की मांग भी करीब 25 फीसदी घटी
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर जिले में कोरोना कर्फ्यू में घरेलू गैस और डीजल-पेट्रोल की खपत में 25 से 40 फीसदी तक की कमी आ गई है। इसका प्रमुख कारण कामगार परिवारों का जिले से लौट जाना और वाहनों का कम इस्तेमाल किया जाना बताया जा रहा है।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्व नारायण सिंह के अनुसार कोरोना कर्फ्यू के दौरान पेट्रोल और डीजल की खपत में 40 फीसदी से अधिक कमी आई है। जिले में शहर और देहात मिलाकर करीब डेढ़ सौ पेट्रोल पंप हैं। शहर के अधिकतर पंप पर पहले पेट्रोल-डीजल की बिक्री का औसत करीब चार हजार लीटर प्रतिदिन था, जो अब प्रतिदिन औसतन 2400 से 2600 लीटर है। डीजल की मांग अधिक है।
इसकी वजह है कि आवश्यक वस्तु आदि की पूर्ति के लिए ट्रक, ऑटो आदि डीजल चलित वाहन अधिकतर चल रहे हैं। इसके बावजूद डीजल की खपत में कमी आई है। पेट्रोल की मांग में ज्यादा कमी आई है।
विज्ञापन
वहीं, एलपीजी डीलर के मुताबिक जिले में छह लाख घरेलू और कॉमर्शियल गैस उपभोक्ता हैं। कोरोना कर्फ्यू से पहले जिले में प्रतिदिन औसतन पचास ट्रक एलपीजी सिलिंडर की खपत होती थी। अब यह मांग घटकर 36 से 38 ट्रक रह गई है। इनमें घरेलू गैस सिलिंडरों की मांग करीब 25 फीसदी घटी है।
दरअसल, लोगों के गैस इस्तेमाल करने के पैटर्न में भी बदलाव आया है। पहले एक सिलिंडर की रीफिलिंग औसतन 21 से 22 दिन में होती थी, अब यह 28 से 29 दिन में कराई जा रही है। इसका अर्थ हुआ कि लोग घरेलू गैस का उपयोग किफायत से कर रहे हैं। काम छूटने के की वजह से करीब चार हजार घरेलू गैस उपभोक्ता दूसरे जिलों में जा चुके हैं।
सबसे ज्यादा कमी कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की मांग में आई है। इसकी वजह यह है कि अधिकतर दुकानें, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट्स आदि बंद हैं। कुछ जरूरी सेवाओं में ही कॉमर्शियल सिंलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंडेन गैस के एरिया मैनेजर मुनीश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण क्वारंटीन हैं, वर्तमान में गैस की खपत के आंकड़े उनके पास मौजूद नहीं हैं।
विज्ञापन
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विश्व नारायण सिंह के अनुसार कोरोना कर्फ्यू के दौरान पेट्रोल और डीजल की खपत में 40 फीसदी से अधिक कमी आई है। जिले में शहर और देहात मिलाकर करीब डेढ़ सौ पेट्रोल पंप हैं। शहर के अधिकतर पंप पर पहले पेट्रोल-डीजल की बिक्री का औसत करीब चार हजार लीटर प्रतिदिन था, जो अब प्रतिदिन औसतन 2400 से 2600 लीटर है। डीजल की मांग अधिक है।
विज्ञापन
इसकी वजह है कि आवश्यक वस्तु आदि की पूर्ति के लिए ट्रक, ऑटो आदि डीजल चलित वाहन अधिकतर चल रहे हैं। इसके बावजूद डीजल की खपत में कमी आई है। पेट्रोल की मांग में ज्यादा कमी आई है।
विज्ञापन
वहीं, एलपीजी डीलर के मुताबिक जिले में छह लाख घरेलू और कॉमर्शियल गैस उपभोक्ता हैं। कोरोना कर्फ्यू से पहले जिले में प्रतिदिन औसतन पचास ट्रक एलपीजी सिलिंडर की खपत होती थी। अब यह मांग घटकर 36 से 38 ट्रक रह गई है। इनमें घरेलू गैस सिलिंडरों की मांग करीब 25 फीसदी घटी है।
दरअसल, लोगों के गैस इस्तेमाल करने के पैटर्न में भी बदलाव आया है। पहले एक सिलिंडर की रीफिलिंग औसतन 21 से 22 दिन में होती थी, अब यह 28 से 29 दिन में कराई जा रही है। इसका अर्थ हुआ कि लोग घरेलू गैस का उपयोग किफायत से कर रहे हैं। काम छूटने के की वजह से करीब चार हजार घरेलू गैस उपभोक्ता दूसरे जिलों में जा चुके हैं।
सबसे ज्यादा कमी कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की मांग में आई है। इसकी वजह यह है कि अधिकतर दुकानें, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट्स आदि बंद हैं। कुछ जरूरी सेवाओं में ही कॉमर्शियल सिंलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंडेन गैस के एरिया मैनेजर मुनीश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के कारण क्वारंटीन हैं, वर्तमान में गैस की खपत के आंकड़े उनके पास मौजूद नहीं हैं।