Gorakhpur News: ऑनलाइन बिजली बिल जमा न होने से उपभोक्ता परेशान, काउंटर पर भी बनी रहती है सर्वर की समस्या
बिजली निगम अब आरटी-डैस सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा है। इसी सॉफ्टवेयर से बिजली बिल भी जमा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब बीस दिनों से काउंटर पर सर्वर की समस्या बनी हुई है। जबकि ऑनलाइन भी बिल जमा नहीं हो पा रहा है। उपभोक्ता गूगल पे, फोन पे या किसी और एप से बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं।
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ऑनलाइन बिजली बिल जमा नहीं हो पाने से उपभोक्ताओं से खासी परेशानी हो रही है। उपभोक्ता बिल जमा करने के लिए काउंटर पर जाता है तो वहां भी सर्वर की समस्या बनी रहती है। इस वजह से बहुत कम उपभोक्ताओं ने बिल जमा किया है। इससे जहां बिजली निगम को राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही है, वहीं उपभोक्ताओं को समय से बिल नहीं जमा कर पाने पर जुर्माने का भय सता रहा है।
दरअसल, बिजली निगम अब आरटी-डैस सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा है। इसी सॉफ्टवेयर से बिजली बिल भी जमा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब बीस दिनों से काउंटर पर सर्वर की समस्या बनी हुई है। जबकि ऑनलाइन भी बिल जमा नहीं हो पा रहा है। उपभोक्ता गूगल पे, फोन पे या किसी और एप से बिल जमा नहीं कर पा रहे हैं।
बता दें कि बिजली निगम शहरी खंड में अब तक 13 हजार 735 उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन बिल का भुगतान किया है। जबकि पिछले महीने 57 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन बिल जमा किया था। सूत्रों ने बताया कि पिछली कंपनियों से निजी सॉफ्टवेयर का अनुबंध था। सर्वर बदलने के बाद उनसे अनुबंध खत्म हो गया होगा। ऐसे में नए सर्वर आरटी-डैस पर डिजिटल प्लेटफार्म काम नहीं कर रहा है।
बुधवार को राप्तीनगर के खंड दफ्तर में अतुल ने ऑनलाइन भुगतान नहीं होने का कारण पूछा तो बताया गया कि अगर भुगतान करना है तो यूपीपीसीएल की अधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। डिजिटल प्लेटफार्म के किसी और मंच पर भुगतान नहीं हो पा रहा है।
अधीक्षण अभियंता शहरी यूसी वर्मा ने बताया कि इस माह सर्वर की खामी से लोग ऑनलाइन बिजली बिल जमा करने में पिछड़ गए हैं। बीते 20 दिनों में 14 हजार उपभोक्ताओं ने ऑनलाइन 4.85 करोड़ का बिल जमा किया है। शुरू के चार दिन सर्वर बदले जाने की वजह से सिस्टम बंद था।
लगभग 60 हजार लोगों ने काउंटर पर जमा किया बिल
अभियंताओं ने बताया कि 59,311 हजार उपभोक्ताओं ने काउंटर से बिजली बिल जमा किया है। जनवरी में सर्वर की खामी का खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया कि अगर 10 फरवरी तक व्यवस्था सही नहीं हुई तो उपभोक्ताओं को ब्याज और अन्य कर अपने बिजली बिल के साथ जोड़कर देने होंगे।