सीएम योगी ने गोरखपुर में ही बनाई थी ये रणनीति, जिससे आफत में फंस गए उपद्रवी, जाने क्या है पूरा मामला
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उपद्रवियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई मसलन नुकसान की गई संपत्ति की कीमत वसूलने जैसे कदम के लिए कानून बनाने की रणनीति पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुहर गोरखपुर में ही लग गई थी। जिस दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उपद्रवियों के पोस्टर हटाने के आदेश दिए थे, उस दिन मुख्यमंत्री गोरखपुर में ही थे। वह चार दिवसीय दौरे पर गोरखपुर आए थे।
उन्होंने यहीं से आला अफसरों को हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने के निर्देश दिए थे। उस समय तक लखनऊ से कई चक्र विचार-विमर्श के बाद यह तय हो चुका था कि सरकार इस मसले को लेकर कानून बनाएगी। सुप्रीमकोर्ट में एसएलपी पर सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा यही सामने आया था कि उपद्रवियों से वसूली और फोटो का पोस्टर लगाने से संबंधित कोई कानून है क्या?
सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा था कि उपद्रवियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो मगर उसके लिए कानून तो होना चाहिए। इसी वजह से योगी सरकार ने अध्यादेश के साथ कानून बनाने की मंजूरी दे दी। आपको बता दें कि, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जैसे ही उपद्रव के आरोपितों के पोस्टर हटाने के आदेश दिए, वैसे ही भाजपा व राज्य सरकार का थिंक टैंक आगे की रणनीति बनाने में जुट गया था।
थिंक टैंक का कहना था कि पहली प्राथमिकता हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना, फिर अध्यादेश लाना है। सुप्रीम कोर्ट ने कानून से संबंधित टिप्पणी जैसे की, वैसे ही योगी सरकार ने अध्यादेश पास कर दिया।
भाजपा के थिंक टैंक का कहना था कि मकान, दुकान और गाड़ियों को फूंककर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। ढिलाई बरती गई तो संदेश गलत जाएगा, फिर उपद्रव करने वालों का मन बढ़ेगा। वे फिर सड़क पर उतरेंगे और जो मन में आएगा, वही करेंगे। यूपी की जनता ने भाजपा की सरकार बनाई है। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना और उन्हें सुरक्षा देना पहली प्राथमिकता है।
सीएम योगी ने अमर उजाला को बताई थी बात
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा- सरकार की पहली प्राथमिक यूपी की 23 करोड़ जनता की सुरक्षा है। जो भी जरूरी होगा, उसे किया जाएगा। भाजपा की सरकार पर जनता को भरोसा है। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश होगी।