सिद्धार्थनगर: पीएम मोदी के आगमन से बढ़ेगी काला नमक चावल की 'खुशबू', शोध संस्थान की सौगात मिलने की संभावना
वर्ष 2019 में काला नमक चावल को एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की जा रही है। कीमतों में भी वृद्धि हो रही है। यह 15 करोड़ रुपये की परियोजना है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कृषि वैज्ञानिकों की चिंता का विषय है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में काला नमक चावल की खुशबू धीरे-धीरे कम हो सकती है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन से काला नमक चावल की खुशबू और बढ़ सकती है। काला नमक चावल की शोध परियोजना को मंजूरी मिलने की संभावना है, जबकि इसी सत्र में कालानमक चावल की सीएफसी शुरू होगी तो किसानों की तरक्की का रास्ता साफ होगा।
वर्ष 2019 में काला नमक चावल को एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की जा रही है। कीमतों में भी वृद्धि हो रही है। डीएम दीपक मीणा की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति ने जिले में अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान बनाने का प्रस्ताव बनाकर ओडीओपी सेल लखनऊ में फरवरी 2021 को भेजा है। यह 15 करोड़ रुपये की परियोजना है।
इसके अंतर्गत कालानमक चावल की गुणवत्ता बनाए रखने और बढ़ाने पर शोध होना है। कालानमक धान पर शोध करने वाले कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी चौधरी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कालानमक चावल की गुणवत्ता पर निरंतर शोध करने की आवश्यकता है। नेपाल के तराई इलाके में पैदा हुए कालानमक चावल में स्वाद और सुगंध कुछ अलग होती है।
बर्डपुर, शोहरतगढ़, बढ़नी, नौगढ़ क्षेत्र में ज्यादा किसान कालानमक धान की खेती करते हैं, जबकि जिले के सभी क्षेत्रों में कालानमक के लिए मिट्टी अच्छी है। बासमती एक्सपोर्ट बोर्ड की तरह कालानमक एक्सपोर्ट बोर्ड सिद्धार्थनगर बनाया जाना चाहिए।
एयर कंडीशन हाल में चावल रखने की सुविधा
जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त दयाशंकर सरोज ने बताया कि 6.90 करोड़ रुपये की परियोजना काला नमक चावल के कॉमन फैसिलिटी सेंटर को बनाकर हैंडओवर करने की अंतिम तिथि अक्तूबर 2021 है। नवंबर तक कार्य पूूर्ण होने की संभावना है। इस संगठन से 1200 किसान जुड़े हुए हैं। इस सीएफसी में एयर कंडीशन हाल में चावल रखने की सुविधा होगी।
अनुकूल वातावरण में काला नमक धान या चावल नहीं रखा जाता है तो सुगंध उड़ जाती है। कार्यदायी संगठन शिवांश सिद्धार्थ एयर कंडीशन डेवलपमेंट प्रोड्यूसर कंपनी के डायरेक्टर अभिषेक सिंह ने बताया कि एक माह में सीएफसी का कार्य पूर्ण हो जाएगा। इसमें धान को प्रोसेस करके स्टोर कर दिया जाएगा, जब किसानों की जरूरत होगी तो वे महंगे दाम पर बेच सकेंगे।
अब होगा किसानों का फायदा
कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि एयर कंडीशन हाल में भंडारण की सुविधा मिलने पर काला नमक चावल के किसानों का फायदा होगा। इस बार करीब 15 हजार हेक्टेयर में काला नमक धान की रोपाई हुई है। काला नमक चावल के निर्यात और ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू होने के बाद किसानों का रुझान बढ़ गया है। जिले में वर्ष 2020 में काला नमक का रकबा आठ हजार हेक्टेयर था।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक प्रोजेक्ट के अंतर्गत काला नमक की दस प्रजातियों के धान की रोपाई की गई है। इसमें तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है कि इस जलवायु में अन्य मिट्टी के काला नमक धान से कितनी खुशबू आ रही है।
ऑनलाइन होगी मार्केटिंग
जिला प्रशासन एवं जिला उद्योग विभाग ने काला नमक चावल की ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए एक कंपनी से अनुबंध किया है। चावल की खेप कंपनी को भेज दी गई है और सैंपल भी पास हो गया है। कंपनी की पैकिंग के बाद देश-विदेश और दूसरे राज्यों में भी जिले का काला नमक चावल का स्वाद ले सकेंगे।